तेरी दोस्ती तो महँगी पड़ी है चारा-गर ज़ख़्म हर-सू अब मेरा इंतिज़ार करते हैं
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अब तो लगता है कि आ जाएगी बारी मेरी किस ने दे दी तेरी आँखों को सुपारी मेरी
Abrar Kashif
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कमरे में सिगरेटों का धुआँ और तेरी महक जैसे शदीद धुँध में बाग़ों की सैर हो
Umair Najmi
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तेरी ख़ुशबू को क़ैद में रखना इत्रदानों के बस की बात नहीं
Fahmi Badayuni
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दोस्ती लफ़्ज़ ही में दो है दो सिर्फ़ तेरी नहीं चलेगी दोस्त
Zubair Ali Tabish
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उलझ कर के तेरी ज़ुल्फ़ों में यूँँ आबाद हो जाऊँ कि जैसे लखनऊ का मैं अमीनाबाद हो जाऊँ मैं यमुना की तरह तन्हा निहारूँ ताज को कब तक कोई गंगा मिले तो मैं इलाहाबाद हो जाऊँ
Ashraf Jahangeer
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ता-कयामत प्यासे सब दरिया रहेंगे दरिया की तो तिश्नगी ख़ुद कर्बला हैं
Sabir Hussain
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शोर-ओ-गुल माज़ी के अपने याद कर के तन्हा बूढ़ा घर बिलख कर रो रहा है
Sabir Hussain
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हम जो थे कभी सिकंदर अपनी दुनिया के उन के हाथों का खिलौना बन कर रह गए
Sabir Hussain
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बस ख़ुद-कुशी से बचने का जरिया है शा'इरी हम को सुख़न-वरी से तो शोहरत तलब नहीं
Sabir Hussain
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उम्मीद ए विसाल ए जांँ मिसमार हुई नहीं ये दामन-ए-शब अभी दुश्वार हुई नहीं उस ने भी शब-ए-गुज़श्ता क़ैद रखी हवस हम सेे भी बदन की सरहद पार हुई नहीं
Sabir Hussain
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