थी यक़ीनन जग हँसाई हारने पर ये नहीं सोचा था पहले हम हँसेंगे
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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न बंजर देखी जाती है न ज़रख़ेज़ ये जो हम ने ज़मीं छोड़ी हुई है
Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
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तभी तो अब के मेरी चाल में रवानी थी कि मैं ने पहले भी रस्ते की ख़ाक छानी थी मुझे तो तैरना था डूबना नहीं था ख़ैर ये बात तब की है जब मछली जल की रानी थी
Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
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रात कैसे सोने दे सकती है फिर चाँद को गर दिन-दहाड़े देख लो
Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
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तुम को पता है क्या होता था रात के होने से पहले शाम की धूप के टुकड़े मेरी आँखों में चुभ जाते थे
Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
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क्या मोहब्बत में ये सही था यार जी से मैं जी-हुज़ूरी पे आया
Rajnishwar Chauhan 'Rajnish'
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