तुझे लगा था कि मर जाऊँगा जुदा होकर तेरे बग़ैर हूँ ज़िंदा कमाल है कि नहीं
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मैं क्या कहूँ के मुझे सब्र क्यूँँ नहीं आता मैं क्या करूँँ के तुझे देखने की आदत है
Ahmad Faraz
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हाथ ख़ाली है तेरे शहर से जाते जाते जान होती तो मेरी जान लुटाते जाते
Rahat Indori
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तेरे जाने के बा'द बस यादें हर तरफ़ याद-याद बस यादें सोना, चाँदी, जमीन, घर सब कुछ हैं मेरी जायदाद बस यादें
Sandeep Thakur
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तेरे बग़ैर ही अच्छे थे क्या मुसीबत है ये कैसा प्यार है हर दिन जताना पड़ता है
Mehshar Afridi
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आज पहली दफ़ा लगा मुझ को वो ज़रा बे-वफ़ा लगा मुझ को बस बिना बात ही बिगड़ता था बेवजह ही ख़फ़ा लगा मुझ को
Sandeep Thakur
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ताल में पंछी पनघट गागर चौपालें कितना सुंदर गाँव का मंज़र होता है टूटा फूटा गिरा पड़ा कुछ तंग सही अपना घर तो अपना ही घर होता है
SALIM RAZA REWA
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वाहिद जमा में और मुज़क्कर में फँस गए कुछ क़ाफ़िए अरुज़ के ख़ंजर में फँस गए कुछ में तो रब्त कुछ में मुअन्नस का ऐब था मेरे हसीन शे'र तो चक्कर में फँस गए
SALIM RAZA REWA
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ज़ख़्म सिलने में कई ज़ख़्म दिए टाँकों ने कौन से दर्द का इज़हार करूँँ मैं पहले चोट खाया है मेरे जिस्म का हर-इक हिस्सा कौन से हिस्से को बीमार करूँँ मैं पहले
SALIM RAZA REWA
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शादाब जिन की ख़ुशबू से हर इक गुलाब है रौशन चमक से जिन की 'रज़ा' आफ़ताब है सूरत वो जिस पे नाज़ है कुल काएनात को वो सूरत-ए-रसूल ख़ुदा की किताब है
SALIM RAZA REWA
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उन के दर पर सलाम कह देना मैं हूँ उन का ग़ुलाम कह देना उन सेे मिलने की दिल में ख़्वाहिश है मेरा इतना पयाम कह देना
SALIM RAZA REWA
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