तुम्हें मंज़र का हो जाए अगर इतना भी अंदाज़ा ज़मीन ए कर्बला पर फिर तो माथा टेक दोगे तुम
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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मैं अगर अपनी जवानी के सुना दूँ क़िस्से ये जो लौंडे हैं मेरे पाँव दबाने लग जाए
Mehshar Afridi
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एक फ़न है बिखर जाना और मैं उस्ताद हूँ इस में
Abdulla Asif
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ज़हर ने उस को ज़िंदगी दे दी वरना सुकरात मर गया होता
Abdulla Asif
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इक मसीहा जन्म लेने जा रहा है मरयमों के हाथ काटे जा रहे हैं
Abdulla Asif
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ख़ला की ज़ीनतें महफ़िल ख़ला की शान है सूरज सितारे रक़्स करते हैं तेरे आगे तेरे पीछे क़मर के नूर से ऊपर तू ही अफ़ज़ल तू ही पारस वो सारे रंग फ़ीके हैं तेरे आगे तेरे पीछे
Abdulla Asif
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ख़ता ऐसी भी क्या कर दी जहन्नम ने जहन्नम को जहन्नम क्यूँ मिली आख़िर
Abdulla Asif
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