us pe qurban ki jis ne teri aawaz suni sadqe us aankh ke jis ne tera jalwa dekha
sherKuch Alfaaz
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वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन उसे इक ख़ूब-सूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा
Sahir Ludhianvi
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अब उस सेे दोस्ती है जिस सेे कल मुहब्बत थी अब इस सेे ज़्यादा बुरा वक़्त कुछ नहीं है दोस्त
Vishal Singh Tabish
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मिलने की तरह मुझ सेे वो पल भर नहीं मिलता दिल उस से मिला जिस सेे मुक़द्दर नहीं मिलता
Naseer Turabi
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जो तुम्हें मंज़िल पे ले जाएँगी वो राहें अलग हैं मैं वो रस्ता हूँ कि जिस पर तुम भटक कर आ गई हो
Harman Dinesh
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रंग-ओ-रस की हवस और बस मसअला दस्तरस और बस यूँँ बुनी हैं रगें जिस्म की एक नस टस से मस और बस
Ammar Iqbal
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