usi ka shahr wahi muddai wahi munsif hamein yaqin tha hamara qusur niklega
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कोई होंठों पे उँगली रख गया है उसी दिन से मैं लिखकर बोलता हूँ
Fahmi Badayuni
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रास्ते में फिर वही पैरों का चक्कर आ गया जनवरी गुज़रा नहीं था और दिसंबर आ गया
Rahat Indori
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मत पूछो कितना ग़मगीं हूँ गंगा जी और जमुना जी ज़्यादा तुम को याद नहीं हूँ गंगा जी और जमुना जी अमरोहे में बान नदी के पास जो लड़का रहता था अब वो कहाँ है मैं तो वहीं हूँ गंगा जी और जमुना जी
Jaun Elia
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फिर उसी बे-वफ़ा पे मरते हैं फिर वही ज़िंदगी हमारी है
Mirza Ghalib
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जो देखने में बहुत ही क़रीब लगता है उसी के बारे में सोचो तो फ़ासला निकले
Waseem Barelvi
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इक परिंदा अभी उड़ान में है तीर हर शख़्स की कमान में है
Ameer Qazalbash
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मेरे पड़ोस में ऐसे भी लोग बसते हैं जो मुझ में ढूँड रहे हैं बुराइयाँ अपनी
Ameer Qazalbash
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महसूस कर रहा था उसे अपने आस पास अपना ख़याल ख़ुद ही बदलना पड़ा मुझे
Ameer Qazalbash
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तुम राह में चुप-चाप खड़े हो तो गए हो किस किस को बताओगे कि घर क्यूँँ नहीं जाते
Ameer Qazalbash
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आज की रात भी गुज़री है मिरी कल की तरह हाथ आए न सितारे तिरे आँचल की तरह
Ameer Qazalbash
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