वस्ल की आख़िरी वो घड़ी याद है वो जहाँ रू-ब-रू थी गली याद है जो ख़फ़ा हो के जाती रक़ीबों तलक मुझ को वो सरफिरी मनचली याद है
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अब मैं सारे जहाँ में हूँ बदनाम अब भी तुम मुझ को जानती हो क्या
Jaun Elia
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कुछ न रह सका जहाँ विरानियाँ तो रह गईं तुम चले गए तो क्या कहानियाँ तो रह गईं
Khalil Ur Rehman Qamar
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हम को यारों ने याद भी न रखा 'जौन' यारों के यार थे हम तो
Jaun Elia
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इस तरह रोते हैं हम याद तुझे करते हुए जैसे तू होता तो सीने से लगा लेता हमें
Vikram Gaur Vairagi
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किताबें बंद कर के जब मैं बिस्तर पर पहुँचता हूँ तुम्हारी याद भी आ कर बगल में लेट जाती है
Bhaskar Shukla
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उस के हक में मुझे जो लगा कर दिया क़ैद से उस को हम ने रिहा कर दिया बात हिम्मत से दिल की कही थी मगर आपने जो सुना अन-सुना कर दिया
Harshwardhan Aurangabadi
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रफ़्ता-रफ़्ता सब कुछ खोने को बैठा हूँ क्यूँँ चाहत में पागल होने को बैठा हूँ ना आया था साथी मेरा, ना आएगा सजदे में, राहों पर रोने को बैठा हूँ
Harshwardhan Aurangabadi
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तेरी याद में हम ने ग़ज़लें कही थी तभी तो बड़ा ख़ूब ये साल गुज़रा
Harshwardhan Aurangabadi
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वो अपनी ज़िंदगी में, हम सफ़र कुछ यूँँ बदलते हैं नया गर मिल गया कोई, पुराना छोड़ देते हैं
Harshwardhan Aurangabadi
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आने वाली नस्ल पढ़ के रोएगी दर्द हम इतना लिखेंगे उम्र भर
Harshwardhan Aurangabadi
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