वो क्या अगर सब गुफ़्तगू खुद सेे किए हम जा रहे ना दिख बुतों में और ना ही दिख फ़लक में वो ख़ुदा
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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ये सोच मत जो जिस्म बिन कपड़ा दिखूँ मैं घूमता ज़ख़्मी फिरूँ हर सू मगर मुझ पर दु'आओं का करम
Zain Aalamgir
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ज़िन्दगी बर्बाद होती है ख़ुशी को ढूँढ़ते गर निकलते ढूँढ़ने दुख को, मिली होती ख़ुशी
Zain Aalamgir
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ये दिल फिर हम किस सेे लगाएँगे जब दिल से किनारा कर आएँगे
Zain Aalamgir
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ज़िंदा रहा मैं आज भी यारों ग़ज़ब की बात है मज़लूम है बख़्शा गया क्या ख़ूब-सूरत रात है
Zain Aalamgir
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ये क्या कि बाहें है खुली तेरी मगर हूँ मौत का भी यार होने जा रहा
Zain Aalamgir
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