यहाँ कुछ शे'र मैं ने भी बतौर-ए-ख़ास बोले है कोई जा कर मेरे ये शे'र उस को भी सुना देना
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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मैं अगर अपनी जवानी के सुना दूँ क़िस्से ये जो लौंडे हैं मेरे पाँव दबाने लग जाए
Mehshar Afridi
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जब लगे मुश्किल है यूँँ ही मुस्कुराना लौट आना जब लगे दुनिया है कोई क़ैद-ख़ाना लौट आना
AYUSH SONI
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मेरे अहबाब कहते हैं वो तुम को याद करती है उन्हे कैसे बताऊँ अब मुझे हिचकी नहीं आती
AYUSH SONI
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मातम फ़रेब ज़ख़्म ग़म-ओ-रंज औ ज़हर ज़ालिम बता ये आशिक़ी ने और क्या दिया
AYUSH SONI
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तलाशा जब कभी तुझ को मेरे दिल में कहीं पाया शबों में और शामों में तुझे हर पल वहीं पाया मुझे डर था कहीं कोई न उस को छीन ले मुझ सेे मगर वो आसमाँ थी कोई उस को छू नहीं पाया
AYUSH SONI
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तुम्हारे साथ था जब तक, वहीं गलियों में रहता था सुना है अब, रक़ीबों ने तुम्हारा घर नहीं देखा
AYUSH SONI
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