ये दुनिया क्या समझती है, मुझे कोई तो समझाओ वगर्ना मैं बताता हूँ ये ख़ुद को क्या समझती है
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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होश वालों को ख़बर क्या बे-ख़ुदी क्या चीज़ है इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िंदगी क्या चीज़ है
Nida Fazli
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मंज़िलें क्या हैं, रास्ता क्या है हौसला हो तो फ़ासला क्या है
Aalok Shrivastav
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दिल से साबित करो कि ज़िंदा हो साँस लेना कोई सुबूत नहीं
Fahmi Badayuni
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तेरे दिल की इक ये बस्ती, पहले उस इक राजा की थी जिस ने तेरे नाम पर, जंगें भी बे-अंदाज़ा की थी
"Nadeem khan' Kaavish"
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"शहीद-ए-आज़म भगतसिंह" आँखों में वो आँसू नहीं कुछ ख़्वाब सँजोया करता था वतन की आज़ादी के ख़ातिर खूनी आँसू रोया करता था आज़ादी का दीवाना था वो रगों में उबाल ख़ानदानी था जिस ने सब कुछ लुटा दिया अपना वो वीर भगत बलिदानी था अंगारों पर चल कर जिस ने एक नई राह बनाई थी उस मतवाले शे'र ने क़सम आज़ादी की खाई थी चाहे उम्र कम रही हो लेकिन वो एक लंबी कहानी था जिस ने सब कुछ लुटा दिया अपना वो वीर भगत बलिदानी था जिस के दिल में सिर्फ़ और सिर्फ़ इन्कलाब की आग थी आँखों में थी जलती ज्वाला लिबास जिस का त्याग थी हर दिल में निशाँ छोड़ गया वो भारत माँ की निशानी था जिस ने सब कुछ लुटा दिया अपना वो वीर भगत बलिदानी था जब तक धरती-अम्बर होंगे मिट न सकेगा नाम तुम्हारा भारत का हर बच्चा-बच्चा याद रखेगा काम तुम्हारा समुंदर से भी गहरा था जो ख़ुद में ही एक रवानी था जिस ने सब कुछ लुटा दिया अपना वो वीर भगत बलिदानी था
"Nadeem khan' Kaavish"
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मिला था जिस बग़ीचे में वो अब शमशान लगता है मुहब्बत ने ये कैसे दिन दिखाए हैं मुहब्बत में
"Nadeem khan' Kaavish"
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मेरी बातों में नहीं आएगा चाँद रातों में नहीं आएगा
"Nadeem khan' Kaavish"
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हमारी इबादत भी,आदत भी हो तुम मेरा दिन है तुम सेे, तेरी रात हम सेे
"Nadeem khan' Kaavish"
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