ye kah kah ke hum dil ko bahla rahe hain wo ab chal chuke hain wo ab aa rahe hain
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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जो उन पे गुज़रती है किस ने उसे जाना है अपनी ही मुसीबत है अपना ही फ़साना है
Jigar Moradabadi
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यही है ज़िंदगी तो ज़िंदगी से ख़ुद-कुशी अच्छी कि इंसाँ आलम-ए-इंसानियत पर बार हो जाए
Jigar Moradabadi
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कूचा-ए-इश्क़ में निकल आया जिस को ख़ाना-ख़राब होना था
Jigar Moradabadi
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तिरे जमाल की तस्वीर खींच दूँ लेकिन ज़बाँ में आँख नहीं आँख में ज़बान नहीं
Jigar Moradabadi
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सदाक़त हो तो दिल सीनों से खिंचने लगते हैं वाइज़ हक़ीक़त ख़ुद को मनवा लेती है मानी नहीं जाती
Jigar Moradabadi
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