ज़माना धूप से गुज़रा ज़माना शाम से गुज़रा हमारे इश्क़ का क़िस्सा हमारे नाम से गुज़रा सुनी फिर से कहानी जो हमारे दूर जाने की सुहाना दिन हमारा फिर पुराने जाम से गुज़रा
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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इश्क़ में ये दावा तो नईं है मैं ही अव्वल आऊँगा लेकिन इतना कह सकता हूँ अच्छे नंबर लाऊँगा
Zubair Ali Tabish
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मैं बाल बाल बच गया हर बार इश्क़ से सर के बहुत क़रीब से पत्थर गुज़र गए
Umair Najmi
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जब मुंडेरों से धूप ढलती है तो कमी उस की मुझ को खलती है जो हथेली पे अपनी लिखती थी दोस्ती प्यार में बदलती है
Sandeep Thakur
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बहुत डूबे चलो अब तो किनारा कर लिया जाए हमारा था उसे मेरा तुम्हारा कर लिया जाए अँधेरा है बहुत चारों तरफ़ कुछ ऐसा करते हैं जलाकर दरमियाँ का सब उजाला कर दिया जाए
Abhay Mishra
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हम भी उसी अंजाम पे आ कर हुए ख़ुद से फ़ना जिस मोड़ के आगे समुंदर के सिवा कुछ भी नहीं
Abhay Mishra
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देरी से समझोगे इनका साथ मगर तुम क्या जानो ऐसे लोगों का होना जो ख़ूब अकेले रहते हैं
Abhay Mishra
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आज उस को कुछ दिनों के बा'द देखा इस क़दर देखा कभी देखा नहीं था
Abhay Mishra
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साँस मुझ को अब तलक़ आई नहीं है तू गले लग कर मुझे साँसें अता कर
Abhay Mishra
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