ज़रूरत ही नहीं है, सच बताने की मुझे आदत है तुम सेे रूठ जाने की
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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अब इन जले हुए जिस्मों पे ख़ुद ही साया करो तुम्हें कहा था बता कर क़रीब आया करो मैं उस के बा'द महिनों उदास रहता हूँ मज़ाक में भी मुझे हाथ मत लगाया करो
Tehzeeb Hafi
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मैं ने जो कुछ भी सोचा हुआ है, मैं वो वक़्त आने पे कर जाऊँगा तुम मुझे ज़हर लगते हो और मैं किसी दिन तुम्हें पी के मर जाऊँगा
Tehzeeb Hafi
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सब-के-सब तेरे ही तो बंदे हैं इक बराबर दे बांटने वाले
Vijay Anand Mahir
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तुम सेे मिल कर हम ने जाना दिल तोड़ा भी जा सकता है
Vijay Anand Mahir
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मिले तो पूछना यारों ख़ुदा से वफ़ा होती नहीं क्यूँँ आदमी से
Vijay Anand Mahir
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सुना जब से कभी हम भी थे मछली मोहब्बत हो गई 'माहिर' नदी से
Vijay Anand Mahir
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ख़ुशी तो बस ज़रा सी रह गई है उदासी ही उदासी रह गई है बदन की प्यास सारी मिट गई पर हमारी रूह प्यासी रह गई है
Vijay Anand Mahir
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