ज़िंदगी से बड़ी सज़ा ही नहीं और क्या जुर्म है पता ही नहीं
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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मरने वालों को भी मिलते नहीं मरने वाले मौत ले जा के ख़ुदा जाने कहाँ छोड़ती है
Krishna Bihari Noor
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चाहे सोने के फ़्रेम में जड़ दो आइना झूट बोलता ही नहीं
Krishna Bihari Noor
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मैं जिस के हाथ में इक फूल दे के आया था उसी के हाथ का पत्थर मेरी तलाश में है
Krishna Bihari Noor
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अब इस को अपनी हार कहूँ या कहूँ मैं जीत रूठा हुआ था मैं, वो मना ले गया मुझे
Krishna Bihari Noor
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सच घटे या बढ़े तो सच न रहे झूट की कोई इंतिहा ही नहीं
Krishna Bihari Noor
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