वरक़ पर आज के बरसों में ठहरा है फ़लक आओ लिखें ज़िंदान में भी नज़्म हम उनवान जो भी हो
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kapil verma
@99kapilverma
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Nazm
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sherKuch Alfaaz
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सब कुछ कमाल और नया सा लगा था तब हर शय है अब हमारी तवज्जोह की आस में
sherKuch Alfaaz
नुमाइश है यहाँ लगती जमाल-ए-जिस्म की हर-सू बिखेरा जिस क़दर इस्मत को उतना दाम लगता है
sherKuch Alfaaz
लोग जो पत्थर उठा लेते हैं हर इक बात पर कोई उन के सामने फिर आइना रखवाए क्यूँँ
sherKuch Alfaaz
क्यूँँ है तेग़ लफ़्ज़ों की बात-बात में शामिल ख़ामुशी से मुझ को भी बे-सिपर करे कोई
sherKuch Alfaaz
हयात आए कहाँ से हलाक ज़र्रों में ज़ुहूर क़ैद किए बिन नहीं रवाई दे
sherKuch Alfaaz
देखना सब किताबें बदल जाएँगी इक नई खोज से क़ैद में आदमी की जहालत भरी मंज़िलें हैं कई
sherKuch Alfaaz
अभी ही दिल की अलमारी समेटी है मिलेगा कल यहाँ बिखरा हुआ सा कुछ
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