Top 20 Sher Series

Shayari on Mirror

Shayari on Mirror ek clean reading flow me, writer aur full-detail links ke saath.

Total

19

Sher

19

Featured Picks

Series se pehle kuch standout sher padhein.

आईना क्यूँ न दूँ कि तमाशा कहें जिसे ऐसा कहाँ से लाऊँ कि तुझ सा कहें जिसे

शायर अपने महबूब से कहता है कि तुम बेमिसाल हो और दुनिया में तुम्हारा कोई मुकाबला नहीं है। इसलिए मैं तुम्हें आईना देता हूँ, क्योंकि केवल आईने में तुम्हारी अपनी परछाईं ही है जो तुम्हारे जैसी लग सकती है; यह अपने आप में एक अद्भुत नज़ारा है।

आईने में वो देख रहे थे बहार-ए-हुस्न आया मिरा ख़याल तो शर्मा के रह गए

~ Unknown

देखना अच्छा नहीं ज़ानू पे रख कर आइना दोनों नाज़ुक हैं न रखियो आईने पर आइना

यहाँ कवि ऊपर से सावधानी की बात करता है कि आईना भी टूटने वाला है और घुटने/गोद का सहारा भी नर्म है। अंदरूनी अर्थ में “आईना” चेहरा, दिल और अपनी छवि का संकेत बन जाता है—ये सब जल्दी आहत हो जाते हैं। भाव यह है कि प्रेम और नाज़ में अहं को न टकराओ; वरना रिश्तों का आईना टूट सकता है।

मुश्किल बहुत पड़ेगी बराबर की चोट है आईना देखिएगा ज़रा देख-भाल के

देखिएगा सँभल कर आईना सामना आज है मुक़ाबिल का

न देखना कभी आईना भूल कर देखो तुम्हारे हुस्न का पैदा जवाब कर देगा

आइना देख के फ़रमाते हैं किस ग़ज़ब की है जवानी मेरी

इक बार जो टूटे तो कभी जुड़ नहीं सकता आईना नहीं दिल मगर आईना-नुमा है

हम ने देखा है रू-ब-रू उन के आईना आईना नहीं होता

बनाया तोड़ के आईना आईना-ख़ाना न देखी राह जो ख़ल्वत से अंजुमन की तरफ़

पहले तो मेरी याद से आई हया उन्हें फिर आइने में चूम लिया अपने-आप को

~ Shakeb Jalali

हम सब आईना-दर-आईना-दर-आईना हैं क्या ख़बर कौन कहाँ किस की तरफ़ देखता है

~ Unknown

देखो क़लई खुलेगी साफ़ उस की आईना उन के मुँह चढ़ा है आज

~ Unknown

आईना क्यूँ न दूँ कि तमाशा कहें जिसे ऐसा कहाँ से लाऊँ कि तुझ सा कहें जिसे

शायर अपने महबूब से कहता है कि तुम बेमिसाल हो और दुनिया में तुम्हारा कोई मुकाबला नहीं है। इसलिए मैं तुम्हें आईना देता हूँ, क्योंकि केवल आईने में तुम्हारी अपनी परछाईं ही है जो तुम्हारे जैसी लग सकती है; यह अपने आप में एक अद्भुत नज़ारा है।

आईना देख अपना सा मुँह ले के रह गए साहब को दिल न देने पे कितना ग़ुरूर था

यह शेर घमंड टूटने का चित्र है। आईना सच दिखाता है और इंसान को उसकी असल, साधारण सूरत से मिला देता है। जो व्यक्ति प्रेम से दूर रहने पर इतराता था, वही अपने ही सामने छोटा पड़ जाता है। भाव यह है कि सच्चाई के सामने दिखावा नहीं टिकता।

कोई भूला हुआ चेहरा नज़र आए शायद आईना ग़ौर से तू ने कभी देखा ही नहीं

~ Shakeb Jalali

देखना अच्छा नहीं ज़ानू पे रख कर आइना दोनों नाज़ुक हैं न रखियो आईने पर आइना

यहाँ कवि ऊपर से सावधानी की बात करता है कि आईना भी टूटने वाला है और घुटने/गोद का सहारा भी नर्म है। अंदरूनी अर्थ में “आईना” चेहरा, दिल और अपनी छवि का संकेत बन जाता है—ये सब जल्दी आहत हो जाते हैं। भाव यह है कि प्रेम और नाज़ में अहं को न टकराओ; वरना रिश्तों का आईना टूट सकता है।

चाहे सोने के फ़्रेम में जड़ दो आइना झूट बोलता ही नहीं

देखिएगा सँभल कर आईना सामना आज है मुक़ाबिल का

न देखना कभी आईना भूल कर देखो तुम्हारे हुस्न का पैदा जवाब कर देगा

हम सब आईना-दर-आईना-दर-आईना हैं क्या ख़बर कौन कहाँ किस की तरफ़ देखता है

~ Unknown

आइना देख के फ़रमाते हैं किस ग़ज़ब की है जवानी मेरी

इक बार जो टूटे तो कभी जुड़ नहीं सकता आईना नहीं दिल मगर आईना-नुमा है

हम ने देखा है रू-ब-रू उन के आईना आईना नहीं होता

बनाया तोड़ के आईना आईना-ख़ाना न देखी राह जो ख़ल्वत से अंजुमन की तरफ़

देखो क़लई खुलेगी साफ़ उस की आईना उन के मुँह चढ़ा है आज

~ Unknown

You have reached the end.

Explore Similar Collections

Shayari on Mirror FAQs

This selection of verses Top 20 me kya milega?

This selection of verses ke selected sher readable cards, internal detail links, aur writer discovery ke saath milenge.

Kya is page ki links internal hain?

Haan, collection links, writer links aur detail links sab Kuch Alfaaz ke internal routes par map kiye gaye hain.

Collection ko kaise explore karein?

Type filter (Sher/Ghazal/Nazm), featured picks aur similar collections rail use karke fast discovery kar sakte hain.