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duniya meri bala jaane mahngi hai ya sasti hai maut mile to muft na luun hasti ki kya hasti hai abadi bhi dekhi hai virane bhi dekhe hain jo ujde aur phir na base dil vo nirali basti hai khud jo na hone ka ho adam kya use hona kahte hain niist na ho to hast nahin ye hasti kya hasti hai ijz-e-gunah ke dam tak hain ismat-e-kamil ke jalve pasti hai to bulandi hai raz-e-bulandi pasti hai jaan si shai bik jaati hai ek nazar ke badle men aage marzi gahak ki in damon to sasti hai vahshat-e-dil se phirna hai apne khuda se phir jaana divane ye hosh nahin ye to hosh-parasti hai jag suuna hai tere baghhair ankhon ka kya haal hua jab bhi duniya basti thi ab bhi duniya basti hai aansu the so khushk hue ji hai ki umda aata hai dil pe ghata si chhai hai khulti hai na barasti hai dil ka ujadna sahl sahi basna sahl nahin zalim basti basna khel nahin baste baste basti hai 'fani' jis men aansu kya dil ke lahu ka kaal na tha haae vo aankh ab paani ki do bundon ko tarasti hai duniya meri bala jaane mahngi hai ya sasti hai maut mile to muft na lun hasti ki kya hasti hai aabaadi bhi dekhi hai virane bhi dekhe hain jo ujde aur phir na base dil wo nirali basti hai khud jo na hone ka ho adam kya use hona kahte hain nist na ho to hast nahin ye hasti kya hasti hai ijz-e-gunah ke dam tak hain ismat-e-kaamil ke jalwe pasti hai to bulandi hai raaz-e-bulandi pasti hai jaan si shai bik jati hai ek nazar ke badle mein aage marzi gahak ki in damon to sasti hai wahshat-e-dil se phirna hai apne khuda se phir jaana diwane ye hosh nahin ye to hosh-parasti hai jag suna hai tere baghair aankhon ka kya haal hua jab bhi duniya basti thi ab bhi duniya basti hai aansu the so khushk hue ji hai ki umda aata hai dil pe ghata si chhai hai khulti hai na barasti hai dil ka ujadna sahl sahi basna sahl nahin zalim basti basna khel nahin baste baste basti hai 'fani' jis mein aansu kya dil ke lahu ka kal na tha hae wo aankh ab pani ki do bundon ko tarasti hai

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यही अपनी कहानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वो लड़की जाँ हमारी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वहम मुझ को ये भाता है,अभी मेरी दिवानी है मगर मेरी दिवानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले रक़ीब आ कर बताते हैं यहाँ तिल है, वहाँ तिल है हमें ये जानकारी थी मियाँ पहले, बहुत पहले अदब से माँग कर माफ़ी भरी महफ़िल ये कहता हूँ वो लड़की ख़ानदानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले

Anand Raj Singh

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चाँद सितारे फूल परिंदे शाम सवेरा एक तरफ़ सारी दुनिया उस का चर्बा उस का चेहरा एक‌ तरफ़ वो लड़कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस सेे मुहब्बत एक तरफ़ है उस सेे झगड़ा एक तरफ़ जिस शय पर वो उँगली रख दे उस को वो दिलवानी है उस की ख़ुशियाँ सब से अव्वल सस्ता महँगा एक तरफ़ ज़ख़्मों पर मरहम लगवाओ लेकिन उस के हाथों से चारासाज़ी एक तरफ़ है उस का छूना एक तरफ़ सारी दुनिया जो भी बोले सब कुछ शोर शराबा है सब का कहना एक तरफ़ है उस का कहना एक तरफ़ उस ने सारी दुनिया माँगी मैं ने उस को माँगा है उस के सपने एक तरफ़ है मेरा सपना एक तरफ़

Varun Anand

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ये ग़म क्या दिल की आदत है नहीं तो किसी से कुछ शिकायत है नहीं तो है वो इक ख़्वाब-ए-बे-ताबीर उस को भुला देने की निय्यत है नहीं तो किसी के बिन किसी की याद के बिन जिए जाने की हिम्मत है नहीं तो किसी सूरत भी दिल लगता नहीं हाँ तो कुछ दिन से ये हालत है नहीं तो तेरे इस हाल पर है सब को हैरत तुझे भी इस पे हैरत है नहीं तो हम-आहंगी नहीं दुनिया से तेरी तुझे इस पर नदामत है नहीं तो हुआ जो कुछ यही मक़्सूम था क्या यही सारी हिकायत है नहीं तो अज़िय्यत-नाक उम्मीदों से तुझ को अमाँ पाने की हसरत है नहीं तो तू रहता है ख़याल-ओ-ख़्वाब में गुम तो इस की वज्ह फ़ुर्सत है नहीं तो सबब जो इस जुदाई का बना है वो मुझ सेे ख़ूब-सूरत है नहीं तो

Jaun Elia

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उसी जगह पर जहाँ कई रास्ते मिलेंगे पलट के आए तो सब सेे पहले तुझे मिलेंगे अगर कभी तेरे नाम पर जंग हो गई तो हम ऐसे बुज़दिल भी पहली सफ़ में खड़े मिलेंगे तुझे ये सड़कें मेरे तवस्सुत से जानती हैं तुझे हमेशा ये सब इशारे खुले मिलेंगे

Tehzeeb Hafi

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तुम हक़ीक़त नहीं हो हसरत हो जो मिले ख़्वाब में वो दौलत हो तुम हो ख़ुशबू के ख़्वाब की ख़ुशबू और इतने ही बेमुरव्वत हो किस तरह छोड़ दूँ तुम्हें जानाँ तुम मेरी ज़िन्दगी की आदत हो किसलिए देखते हो आईना तुम तो ख़ुद से भी ख़ूब-सूरत हो दास्ताँ ख़त्म होने वाली है तुम मेरी आख़िरी मुहब्बत हो

Jaun Elia

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ख़ल्क़ कहती है जिसे दिल तिरे दीवाने का एक गोशा है ये दुनिया इसी वीराने का इक मुअ'म्मा है समझने का न समझाने का ज़िंदगी काहे को है ख़्वाब है दीवाने का हुस्न है ज़ात मिरी इश्क़ सिफ़त है मेरी हूँ तो मैं शम्अ' मगर भेस है परवाने का का'बे को दिल की ज़ियारत के लिए जाता हूँ आस्ताना है हरम मेरे सनम-ख़ाने का मुख़्तसर क़िस्सा-ए-ग़म ये है कि दिल रखता हूँ राज़-ए-कौनैन ख़ुलासा है इस अफ़्साने का ज़िंदगी भी तो पशेमाँ है यहाँ ला के मुझे ढूँडती है कोई हीला मिरे मर जाने का तुम ने देखा है कभी घर को बदलते हुए रंग आओ देखो न तमाशा मिरे ग़म-ख़ाने का अब इसे दार पे ले जा के सुला दे साक़ी यूँँ बहकना नहीं अच्छा तिरे मस्ताने का दिल से पहुँची तो हैं आँखों में लहू की बूँदें सिलसिला शीशे से मिलता तो है पैमाने का हड्डियाँ हैं कई लिपटी हुई ज़ंजीरों में लिए जाते हैं जनाज़ा तिरे दीवाने का वहदत-ए-हुस्न के जल्वों की ये कसरत ऐ इश्क़ दिल के हर ज़र्रे में आलम है परी-ख़ाने का चश्म-ए-साक़ी असर-ए-मय से नहीं है गुल-रंग दिल मिरे ख़ून से लबरेज़ है पैमाने का लौह दिल को ग़म-ए-उल्फ़त को क़लम कहते हैं कुन है अंदाज़-ए-रक़म हुस्न के अफ़्साने का हम ने छानी हैं बहुत दैर-ओ-हरम की गलियाँ कहीं पाया न ठिकाना तिरे दीवाने का किस की आँखें दम-ए-आख़िर मुझे याद आई हैं दिल मुरक़्क़ा' है छलकते हुए पैमाने का कहते हैं क्या ही मज़े का है फ़साना 'फ़ानी' आप की जान से दूर आप के मर जाने का हर नफ़स उम्र-ए-गुज़िश्ता की है मय्यत 'फ़ानी' ज़िंदगी नाम है मर मर के जिए जाने का

Fani Badayuni

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