marne ki duaen kyuun mangun jiine ki tamanna kaun kare ye duniya ho ya vo duniya ab khvahish-e-duniya kaun kare jab kashti sabit-o-salim thi sahil ki tamanna kis ko thi ab aisi shikasta kashti par sahil ki tamanna kaun kare jo aag lagai thi tum ne us ko to bujhaya ashkon ne jo ashkon ne bhadkai hai us aag ko thanda kaun kare duniya ne hamen chhoda 'jazbi' ham chhod na den kyuun duniya ko duniya ko samajh kar baithe hain ab duniya duniya kaun kare marne ki duaen kyun mangun jine ki tamanna kaun kare ye duniya ho ya wo duniya ab khwahish-e-duniya kaun kare jab kashti sabit-o-salim thi sahil ki tamanna kis ko thi ab aisi shikasta kashti par sahil ki tamanna kaun kare jo aag lagai thi tum ne us ko to bujhaya ashkon ne jo ashkon ne bhadkai hai us aag ko thanda kaun kare duniya ne hamein chhoda 'jazbi' hum chhod na den kyun duniya ko duniya ko samajh kar baithe hain ab duniya duniya kaun kare
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हर कदम पर जो इतना रोते हो किस तमन्ना का बोझ ढोते हो हर किसी से गुरेज क्या मतलब आज कल किस हवा में होते हो इस का मतलब है देख ली दुनिया बात करने से पहले रोते हो चाँद पर जा बसोगे क्या तुम सब नफ़रतें इस क़दर जो बोते हो ये ख़ुदाई सिफ़त भी है तुम में दूर रह कर क़रीब होते हो तुम अज़ीयत पसंद हो 'खालिद' अपने अश्कों से ज़ख़्म धोते ही
Khalid Nadeem Shani
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कोई उम्मीद बर नहीं आती कोई सूरत नज़र नहीं आती मौत का एक दिन मुअय्यन है नींद क्यूँँ रात भर नहीं आती आगे आती थी हाल-ए-दिल पे हँसी अब किसी बात पर नहीं आती जानता हूँ सवाब-ए-ताअत-ओ-ज़ोहद पर तबीअत इधर नहीं आती है कुछ ऐसी ही बात जो चुप हूँ वर्ना क्या बात कर नहीं आती क्यूँँ न चीख़ूँ कि याद करते हैं मेरी आवाज़ गर नहीं आती दाग़-ए-दिल गर नज़र नहीं आता बू भी ऐ चारा-गर नहीं आती हम वहाँ हैं जहाँ से हम को भी कुछ हमारी ख़बर नहीं आती मरते हैं आरज़ू में मरने की मौत आती है पर नहीं आती का'बा किस मुँह से जाओगे 'ग़ालिब' शर्म तुम को मगर नहीं आती
Mirza Ghalib
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जिस तरह वक़्त गुज़रने के लिए होता है आदमी शक्ल पे मरने के लिए होता है तेरी आँखों से मुलाक़ात हुई तब ये खुला डूबने वाला उभरने के लिए होता है इश्क़ क्यूँँ पीछे हटा बात निभाने से मियाँ हुस्न तो ख़ैर मुकरने के लिए होता है आँख होती है किसी राह को तकने के लिए दिल किसी पाँव पे धरने के लिए होता है दिल की दिल्ली का चुनाव ही अलग है साहब जब भी होता है ये हरने के लिए होता है कोई बस्ती हो उजड़ने के लिए बसती है कोई मज़मा हो बिखरने के लिए होता है
Ali Zaryoun
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जब किसी एक को रिहा किया जाए सब असीरों से मशवरा किया जाए रह लिया जाए अपने होने पर अपने मरने पे हौसला किया जाए इश्क़ करने में क्या बुराई है हाँ किया जाए बारहा किया जाए मेरा इक यार सिंध के उस पार ना-ख़ुदाओं से राब्ता किया जाए मेरी नक़्लें उतारने लगा है आईने का बताओ क्या किया जाए ख़ामुशी से लदा हुआ इक पेड़ इस से चल कर मुकालिमा किया जाए
Tehzeeb Hafi
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इश्क़ वाली गमज़दा या दोस्ती वाली करें हम सुख़न-वर हैं बताओ शा'इरी कैसी करें बच गए तो ज़िंदगी लाचार कर देगी तुम्हें इस लिए मरने से पहले मौत को राजी करें मेरा दिल मेरी शिकायत मेरे दुख मेरी सज़ा आप को क्या ही पड़ी है आप बस जी जी करें बाद-ए-रुसवाई कोई ग़म ही नहीं रुसवाई का जी में आता है की अब रुस्वा हर इक हस्ती करें ऐ मोहब्बत तुझ सेे क्यूँ भरता नहीं आख़िर ये दिल कितना दिल को दर्द दें और कितना दिल ज़ख़्मी करें हिज्र की दीवार पर तस्वीर है इक हिज्र की सोचते हैं बारहा सीधी करें उल्टी करें वो जिंहोने ख़्वाहिशें पे ख़्वाहिशें तस्लीम की ज़िंदगी अच्छी कटेगी ख़्वाहिशें छोटी करें हम को अब हम सेे निकलने में लगेगा वक़्त कुछ छोड़ दें हम को हमारे हाल बस इतनी करें दिल दुखाकर बोलते हैं कितने दिल जूँ लोग हैं जाने वाले अब तुम्हारी फ़िक्र भी कितनी करें दर्द ही बस दर्द और इस के अलावा कुछ नहीं अब करें तो क्या करें क्या दर्द की खेती करें धीरे धीरे जल रहा है कुछ तमाम आज़ी कहीं इस सेे पहले ख़ाक हो जाएँ शिफ़ा जल्दी करें
Ajeetendra Aazi Tamaam
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