nazmKuch Alfaaz

आज फिर तेज बारिश आई और बहा ले गई एक मजदूर की झोपड़ी एक चिड़िया का घोंसला एक किसान का खेत एक दीवार जो कल ही ग़रीब मजदूर औरतों ने तपती धूप में बनाई थी बस नहीं बहा पाई तो भ्रष्टाचार की नींव पर खड़ी वो आलीशान इमारत जो तेज बारिश पर हँसती थी एक सवाल अब भी ज़ेहन में कौंधता है क्या प्रकृति का न्याय करने का यही तरीका है।

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