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पापा अपनी नन्ही पूसी कर बैठी हड़ताल सुनो जी चूहों की बन आई घर में आया है भौंचाल सुनो जी कहती है ये नन्ही पूसी अब चूहे न खाऊँगी मैं घर वालों से जब तक सारी माँगे न मनवाऊँगी मैं माँग है पहली सर्दी में हो स्वेटर और रज़ाई भी माँग है दूजी बंद न रक्खो मक्खन दूध मलाई भी माँग है तीजी रात किचन में थोड़ा भी न उजाला हो माँग है चौथी सब कुत्तों का फ़ौरन देश-निकाला हो

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"हाल-ए-दिल" मेरी दिलरुबा तुम ख़ूब-सूरत हो सूरत से नहीं सीरत से मुझे तुम्हारी सीरत से मुहब्बत है इसीलिए सीरत का जानता हूँ शर्म दहशत परेशानी जिन्हें सुख़नवरों कवियों ने इश्क़ की लज़्ज़त बताया है फ़िलहाल ये मेरे दरमियाँ आ रहे हैं बहरहाल मेरी चाहतें तुम्हारे नफ़स में धड़कती हैं ज़िंदा रहती हैं मैं ने तुम्हें देखा है देखते हुए मुझे चाहते हुए मुझे सोचते हुए और मेरे लिए परेशान होते हुए वैसे चाहत हो तो कहना लाज़मी होता है ज़रूरी होता है लेकिन इश्क़ की क़ायनात में लफ़्ज़ ख़ामोश रहते हैं और निग़ाहें बात कर लेती हैं मुझे पता है एक दिन तुम मेरी निग़ाहों से बात कर लोगी पूछ लोगी और तुम्हें जवाब मिलेगा हाँ मैं भी चाहता हूँ ख़ूब चाहता हूँ वैसे मैं भी अपने नग़्मों अपनी ग़ज़लों में मुहब्बत ख़ूब लिखता हूँ हालाँकि सदाक़त ये है कि मैं भी कहने में ख़ौफ़ खाता हूँ वैसे बुरा न मानना कि मैं ने तुम सेे कभी इज़हार नहीं किया सोच लेना कि थियोरी और प्रैक्टिकल में फ़र्क़ होता है ख़ैर अब जो मेरा मौज़ुदा हाल है वो ये है कि आए दिन दिल और दिमाग़ मसअला खड़ा कर देते हैं दिल कहता है तुम ख़ूब-सूरत हो दिमाग़ कहता है मंज़िल पे इख़्तियार करो बहरहाल तुम ख़ूब-सूरत हो तुम ज़ियादा ख़ूब-सूरत हो तुम सब सेे ज़ियादा ख़ूब-सूरत हो तुम ही ख़ूब-सूरत हो

Rakesh Mahadiuree

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"भूला न देना" सुनो, बदलते वक़्त के साथ तुम बदल तो नहीं जाओगी तुम मुझे भूल तो नहीं जाओगी वो अपनी मुलाक़ातें, वो देर तक फोन पर बातें साथ हँसना, साथ रोना, रूठना, मनाना तुम भूल तो नहीं जाओगी पता है! हम एक-दूसरे के कभी नहीं हो सकते लेकिन ये तो बा'द की बात है नहम एक-दूसरे के हो चुके हैं, है न? पता है, जो आज है कल नहीं होगा एक दिन ये साथ छुट जाएँगे उम्मीदों के धागे टूट जाएँगे तन कहीं और मन कहीं होगा यादों के सिवा कुछ नहीं होगा पता है, जो आज है कल नहीं होगा अक़्श आँखों से मिटा न सकूँगा चाह कर भी तुम्हें भूला न सकूँगा कैसे यक़ीं दिलाऊँ तुम्हें तुम मुझे बहुत याद आओगी सुनो, तुम मुझे भूल तो नहीं जाओगी

Vikas Sangam

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मैं सपनों में ऑक्सीजन प्लांट इंस्टॉल कर रहा हूँ और हर मरने वाले के साथ मर रहा हूँ मैं अपने लफ़्ज़ों के जरिए तुम्हें साँसों के सिलेंडर भेजूँगा जो तुम्हें इस जंग में हारने नहीं देंगे और तुम्हारी देखभाल करने वालों के हाथों को काँपने नहीं देंगे ऑक्सीजन स्टॉक ख़त्म होने की ख़बरें गर्दिश भी करें तो क्या मैं तुम्हारे लिए अपनी नज़्मों से वेंटीलेटर बनाऊँगा अस्पतालों के बिस्तर भर भी जाएँ कुछ लोग तुम सेे बिछड़ भी जाएँ तो हौसला मत हारना क्यूँँकि रात चाहे जितनी मर्ज़ी काली हो गुज़र जाने के लिए होती है रंग उतर जाने के लिए होते हैं और ज़ख़्म भर जाने के होते हैं

Tehzeeb Hafi

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"अँधेरा सर पे चढ़ता जा रहा है" गुज़रती उम्र ढ़लती जा रही है ज़मीं पाँव निगलती जा रही है अँधेरा सर पे चढ़ता जा रहा है परी आगे निकलती जा रही है सितारे बारी-बारी बुझ रहे हैं हवा मोअत्तर होती जा रही है चमकती जा रही है कोई मछली समुंदर बर्फ़ करती जा रही है मैं अपनी नाव में बेकस पड़ा हूँ उफकती नब्ज़ डूबी जा रही है अँधेरा सर पे चढ़ता जा रहा है अँधेरा ही समुंदर का ख़ुदा है ख़ुदा मछली पकड़ना चाहता है

Ammar Iqbal

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"तैयब" वो अक्सर मुझ सेे कहती थी सुनो जब हम बड़े होंगे हम अपना घर बसाएँगे तो अपने बेटे को हम प्यार से तैयब बुलाएँगे अभी कुछ दिन ही बीते थे कि तैयब आ गया इक दिन ये तैयब वो नहीं था जो मेरे ख़्वाबों का हिस्सा था ये तैयब वो था जो उस की यादों में रहता था नहीं समझे हो जो अब भी सुनो तुम को मैं समझाऊँ मैं अपनी पहली मोहब्बत का दूजा इश्क़ था प्यारे सुना है अब वो कहती है सुनो तैयब सुनो तैयब कहो तो अपने बेटे को आनंद पुकारें अब

Anand Raj Singh

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"क्रिसमस" आया है त्यौहार क्रिसमस बाँटे सब को प्यार क्रिसमस मैं लाया हूँ प्यारे तोहफ़े देखो कितने सारे तोहफ़े गुड़िया कैसी आली लाया गुड्डा दाढ़ी वाला लाया जिस के पास हों पैसे ले लो जी चाहे तो वैसे ले लो तोहफ़े पा कर सब बोलेंगे आए यूँँ हर बार क्रिसमस बाँटे सब को प्यार क्रिसमस रंगीले ग़ुब्बारे ले लो गोया चाँद सितारे ले लो चलती फिरती मोटर ले लो ढोल बजाता बंदर ले लो देखो आ कर ख़ूब तमाशा आओ जाने आओ 'पाशा' अगले साल मैं फिर आउँगा जब आएगा यार क्रिसमस बाँटे सब को प्यार क्रिसमस

Haidar Bayabani

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आया है त्यौहार क्रिसमस बाँटे सब को प्यार क्रिसमस मैं लाया हूँ प्यारे तोहफ़े देखो कितने सारे तोहफ़े गुड़िया कैसी आली लाया गुड्डा दाढ़ी वाला लाया जिस के पास हों पैसे ले लो जी चाहे तो वैसे ले लो तोहफ़े पा कर सब बोलेंगे आए यूँँ हर बार क्रिसमस बाँटे सब को प्यार क्रिसमस रंगीले ग़ुब्बारे ले लो गोया चाँद सितारे ले लो चलती फिरती मोटर ले लो ढोल बजाता बंदर ले लो देखो आ कर ख़ूब तमाशा आओ जाने आओ 'पाशा' अगले साल मैं फिर आउँगा जब आएगा यार क्रिसमस बाँटे सब को प्यार क्रिसमस

Haidar Bayabani

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दीप से दीप जलाएँ साथी हर आँगन उजयारा कर लें हर ज़र्रा मह-पारा कर लें मेरे सीने तेरे सपने तेरे सुख-दुख मेरे अपने हर आशा को पाएँ साथी दीप से दीप जलाएँ साथी हर आँगन उजयारा कर लें हर ज़र्रा मह-पारा कर लें ये घर अपना वो घर अपना हीरा अपना कंकर अपना मिल-जुल साथ निभाएँ साथी दीप से दीप जलाएँ साथी हर आँगन उजयारा कर लें हर ज़र्रा मह-पारा कर लें भाई भाई बन के रहना साथ ही मरना साथ ही जीना मन से मन मिल जाएँ साथी दीप से दीप जलाएँ साथी हर आँगन उजयारा कर लें हर ज़र्रा मह-पारा कर लें जो साथी भी छूट गया हो बिन-कारन ही रूठ गया हो उस को भी मनवाएँ साथी दीप से दीप जलाएँ साथी हर आँगन उजयारा कर लें हर ज़र्रा मह-पारा कर लें

Haidar Bayabani

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कितनी अच्छी प्यारी बाजी प्यारी प्यारी प्यारी बाजी अच्छे अच्छे गीत सुनाए प्यारे प्यारे गीत सुनाए एक था राजा एक थी रानी रोज़ कहे दिलचस्प कहानी बूझे है दिलचस्प पहेली अच्छी दोस्त है प्यारी सहेली कितने क़िस्से याद हैं उस को ख़ूब लतीफ़े याद हैं उस को मुझ को ख़ूब हँसाए बाजी रोऊँ तो बहलाए बाजी कितनी अच्छी प्यारी बाजी प्यारी प्यारी प्यारी बाजी गुड़िया का जब ब्याह रचाए सब बच्चों को साथ खिलाए बाग़ में जा कर झूला झूले मौज में आ कर डाली छू ली खेले मिल-जुल आँख-मिचोली बोले सब से प्यार की बोली खेले पर स्कूल से पहले रुक जाए हर भूल से पहले पढ़ने में होशियार है बाजी खेल में भी तय्यार है बाजी कितनी अच्छी प्यारी बाजी प्यारी प्यारी प्यारी बाजी मुखड़ा उस का भोला-भाला दाँत उस के मोती की माला हँस दे तो फुल-झड़ियाँ छूटे बात करें खुल जाए बूटे प्यारी प्यारी बातें उस की रहबर सारी बातें उस की सब को अच्छी बात बताए सब को सच्ची बात सिखाए सच्ची चाह जताए बाजी सीधी राह दिखाए बाजी कितनी अच्छी प्यारी बाजी प्यारी प्यारी प्यारी बाजी

Haidar Bayabani

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गर्मी का है ज़माना सर्दी हुई रवाना आँखें दिखाए सूरज तन-मन जलाए सूरज पानी हवा हुआ है जंगल जला हुआ है होती है साएँ साएँ ग़ुस्से में हैं हवाएँ उठते हैं यूँँ बगूले जैसे गगन को छू ले तीतर बटेर तोते खाएँ हवा में ग़ोते धरती दहक रही है मिट्टी सुलग रही है गिर जाए जो ज़मीं पर भुन जाए है वो दाना गर्मी का है ज़माना सर्दी हुई रवाना मौसम बदल रहा है इंसाँ पिघल रहा है उतरा गले से मफ़लर मुँह तक रही है चादर तह हो गई रज़ाई ख़ाली है चारपाई कंबल सहज रखी है मलमल गले लगी है पंखों को झल रहे हैं अब फ़ैन चल रहे हैं हीटर से ख़ौफ़ खाएँ कूलर चलाए जाएँ हर शय बदल रही है क्या मर्द क्या ज़नाना गर्मी का है ज़माना सर्दी हुई रवाना आती है याद नानी करते हैं पानी पानी शर्बत का दौर आए क़ुलफ़ी दिलों को भाए तरबूज़ बिक रहे हैं खरबूज़ बिक रहे हैं दूकान कोई खोले बेचे हैं बर्फ़-गोले घर घर में हम ने देखा पीते हैं रूह-अफ़्ज़ा लस्सी का बोल-बाला काफ़ी का मुँह है काला जिस से मिले है ठंडक उस का जहाँ दिवाना गर्मी का है ज़माना सर्दी हुई रवाना

Haidar Bayabani

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