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मैं जंगल का मोर हूँ भय्या मैं जंगल का मोर हूँ भय्या पेड़ हैं मेरे राज सिंघासन सर पर मेरे ताज पँख पखेरू तोता मैना सब पर मेरा राज बादल मेरे संग उड़े हैं संग उड़े पुरवय्या मैं जंगल का मोर हूँ भय्या मैं जंगल का मोर हूँ भय्या रंग बिखेरे चारों जानिब मेरा अपना रूप सारा जंगल घर है मेरा क्या छाँव क्या धूप सूरज मेरा रस्ता देखे राह निहारे छैय्या मैं जंगल का मोर हूँ भय्या मैं जंगल का मोर हूँ भय्या बाल-ओ-पर हैं इक फुलवारी नीले पीले रंग छम-छम छम-छम नाच दिखाऊँ जो देखे हो दंग चंदा झू में अंबर झू में झू में धरती मय्या मैं जंगल का मोर हूँ भय्या मैं जंगल का मोर हूँ भय्या

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उस से मुहब्बत झीलें क्या हैं? उस की आँखें उम्दा क्या है? उस का चेहरा ख़ुश्बू क्या है? उस की साँसें ख़ुशियाँ क्या हैं? उस का होना तो ग़म क्या है? उस सेे जुदाई सावन क्या है? उस का रोना सर्दी क्या है? उस की उदासी गर्मी क्या है? उस का ग़ुस्सा और बहारें? उस का हँसना मीठा क्या है? उस की बातें कड़वा क्या है? मेरी बातें क्या पढ़ना है? उस का लिक्खा क्या सुनना है? उस की ग़ज़लें लब की ख़्वाहिश? उस का माथा ज़ख़्म की ख़्वाहिश? उस का छूना दुनिया क्या है? इक जंगल है और तुम क्या हो? पेड़ समझ लो और वो क्या है? इक राही है क्या सोचा है? उस से मुहब्बत क्या करते हो? उस से मुहब्बत मतलब पेशा? उस से मुहब्बत इस के अलावा? उस से मुहब्बत उस सेे मुहब्बत........

Varun Anand

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''चल आ एक ऐसी नज़्म कहूँ'' चल आ एक ऐसी नज़्म कहूँ जो लफ़्ज़ कहूँ वो हो जाए बस अश्क कहूँ तो एक आँसू तेरे गोरे गाल को धो जाए मैं आ लिक्खूँ तू आ जाए मैं बैठ लिक्खूँ तू आ बैठे मेरे शाने पर सर रक्खे तू मैं नींद कहूँ तू सो जाए मैं काग़ज़ पर तेरे होंठ लिक्खूँ तेरे होंठों पर मुस्कान आए मैं दिल लिक्खूँ तू दिल था में मैं गुम लिक्खूँ वो खो जाए तेरे हाथ बनाऊँ पेंसिल से फिर हाथ पे तेरे हाथ रखूँ कुछ उल्टा सीधा फ़र्ज़ करूँँ कुछ सीधा उल्टा हो जाए मैं आह लिखूँ तू हाए करे बेचैन लिखूँ बेचैन हो तू फिर बेचैन का बे काटूँ तुझे चैन ज़रा सा हो जाए अभी ऐन लिखूँ तू सोचे मुझे फिर शीन लिखूँ तेरी नींद उड़े जब क़ाफ़ लिखूँ तुझे कुछ कुछ हो मैं इश्क़ लिखूँ तुझे हो जाए

Amir Ameer

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"हम मिलेंगे कहीं" हम मिलेंगे कहीं अजनबी शहर की ख़्वाब होती हुई शाहराओं पे और शाहराओं पे फैली हुई धूप में एक दिन हम कहीं साथ होगे वक़्त की आँधियों से अटी साहतों पर से मिट्टी हटाते हुए एक ही जैसे आँसू बहाते हुए हम मिलेंगे घने जंगलो की हरी घास पर और किसी शाख़-ए-नाज़ुक पर पड़ते हुए बोझ की दास्तानों में खो जाएँगे हम सनोबर के पेड़ों की नोकीले पत्तों से सदियों से सोए हुए देवताओं की आँखें चभो जाएँगे हम मिलेंगे कहीं बर्फ़ के बाजुओं में घिरे पर्वतों पर बाँझ क़ब्रो में लेटे हुए कोह पेमाओं की याद में नज़्म कहते हुए जो पहाड़ों की औलाद थे, और उन्हें वक़्त आने पर माँ बाप ने अपनी आग़ोश में ले लिया हम मिलेंगे कही शाह सुलेमान के उर्स में हौज़ की सीढियों पर वज़ू करने वालो के शफ़्फ़ाफ़ चेहरों के आगे संगेमरमर से आरस्ता फ़र्श पर पैर रखते हुए आह भरते हुए और दरख़्तों को मन्नत के धागो से आज़ाद करते हुए हम मिलेंगे हम मिलेंगे कहीं नार मेंडी के साहिल पे आते हुए अपने गुम गश्तरश्तो की ख़ाक-ए-सफ़र से अटी वर्दियों के निशाँ देख कर मराकिस से पलटे हुए एक जर्नेल की आख़िरी बात पर मुस्कुराते हुए इक जहाँ जंग की चोट खाते हुए हम मिलेंगे हम मिलेंगे कहीं रूस की दास्ताओं की झूठी कहानी पे आँखों में हैरत सजाए हुए, शाम लेबनान बेरूत की नरगिसी चश्मूरों की आमद के नोहू पे हँसते हुए, ख़ूनी कज़ियो से मफ़लूह जलबानियाँ के पहाड़ी इलाक़ों में मेहमान बन कर मिलेंगे हम मिलेंगे एक मुर्दा ज़माने की ख़ुश रंग तहज़ीब में ज़स्ब होने के इमकान में इक पुरानी इमारत के पहलू में उजड़े हुए लाँन में और अपने असीरों की राह देखते पाँच सदियों से वीरान ज़िंदान में हम मिलेंगे तमन्नाओं की छतरियों के तले, ख़्वाहिशों की हवाओं के बेबाक बोसो से छलनी बदन सौंपने के लिए रास्तों को हम मिलेंगे ज़मीं से नमूदार होते हुए आठवें बर्रे आज़म में उड़ते हुए कालीन पर हम मिलेंगे किसी बार में अपनी बकाया बची उम्र की पायमाली के जाम हाथ में लेंगे और एक ही घूंट में हम ये सैयाल अंदर उतारेंगे और होश आने तलक गीत गायेंगे बचपन के क़िस्से सुनाता हुआ गीत जो आज भी हम को अज़बर है बेड़ी बे बेड़ी तू ठिलदी तपईये पते पार क्या है पते पार क्या है? हम मिलेंगे बाग़ में, गाँव में, धूप में, छाँव में, रेत में, दश्त में, शहर में, मस्जिदों में, कलीसो में, मंदिर में, मेहराब में, चर्च में, मूसलाधार बारिश में, बाज़ार में, ख़्वाब में, आग में, गहरे पानी में, गलियों में, जंगल में और आसमानों में कोनो मकाँ से परे गैर आबद सैयाराए आरज़ू में सदियों से ख़ाली पड़ी बेंच पर जहाँ मौत भी हम से दस्तो गरेबाँ होगी, तो बस एक दो दिन की मेहमान होगी

Tehzeeb Hafi

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"याद है पहले रोज़ कहा था" याद है पहले रोज़ कहा था फिर न कहना ग़लती दिल की प्यार समझ के करना लड़की प्यार निभाना होता है फिर पार लगाना होता है याद है पहले रोज़ कहा था साथ चलो तो पूरे सफ़र तक मर जाने की अगली ख़बर तक समझो यार ख़ुदा तक होगा सारा प्यार वफ़ा तक होगा फिर ये बंधन तोड़ न जाना छोड़ गए तो फिर न आना छोड़ दिया जो तेरा नहीं है चला गया जो मेरा नहीं है याद है पहले रोज़ कहा था या तो टूट के प्यार न करना या फिर पीठ पे वार न करना जब नादानी हो जाती है नई कहानी हो जाती है नई कहानी लिख लाऊँगा अगले रोज़ मैं बिक जाऊँगा तेरे गुल जब खिल जाएँगे मुझ को पैसे मिल जाएँगे याद है पहले रोज़ कहा था बिछड़ गए तो मौज उड़ाना वापस मेरे पास न आना जब कोई जा कर वापस आए रोए तड़पे या पछताए मैं फिर उस को मिलता नहीं हूँ साथ दोबारा चलता नहीं हूँ गुम जाता हूँ खो जाता हूँ मैं पत्थर का हो जाता हूँ

Khalil Ur Rehman Qamar

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"हमेशा देर कर देता हूँ" हमेशा देर कर देता हूँ मैं हर काम करने में ज़रूरी बात कहनी हो कोई वा'दा निभाना हो उसे आवाज़ देनी हो उसे वापस बुलाना हो हमेशा देर कर देता हूँ मैं मदद करनी हो उस की यार की ढारस बँधाना हो बहुत देरीना रस्तों पर किसी से मिलने जाना हो हमेशा देर कर देता हूँ मैं बदलते मौसमों की सैर में दिल को लगाना हो किसी को याद रखना हो किसी को भूल जाना हो हमेशा देर कर देता हूँ मैं किसी को मौत से पहले किसी ग़म से बचाना हो हक़ीक़त और थी कुछ उस को जा के ये बताना हो हमेशा देर कर देता हूँ मैं हर काम करने में

Muneer Niyazi

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"क्रिसमस" आया है त्यौहार क्रिसमस बाँटे सब को प्यार क्रिसमस मैं लाया हूँ प्यारे तोहफ़े देखो कितने सारे तोहफ़े गुड़िया कैसी आली लाया गुड्डा दाढ़ी वाला लाया जिस के पास हों पैसे ले लो जी चाहे तो वैसे ले लो तोहफ़े पा कर सब बोलेंगे आए यूँँ हर बार क्रिसमस बाँटे सब को प्यार क्रिसमस रंगीले ग़ुब्बारे ले लो गोया चाँद सितारे ले लो चलती फिरती मोटर ले लो ढोल बजाता बंदर ले लो देखो आ कर ख़ूब तमाशा आओ जाने आओ 'पाशा' अगले साल मैं फिर आउँगा जब आएगा यार क्रिसमस बाँटे सब को प्यार क्रिसमस

Haidar Bayabani

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बेलों पर टॉफ़ी खिल जाए चाय कॉफ़ी नल से आए बिस्कुट डाली डाली झूले बच्चा बच्चा जिस को छू ले बगिया होगी कितनी प्यारी लड्डू हों जब क्यारी क्यारी बूँदें टपके बूँदीं बन कर बर्फ़ी फैले घर की छत पर हलवे का बादल घर आए ऐसा काश कभी हो जाए पेड़ों पर पेड़े लग जाएँ जब चाहें हम तोड़ के खाएँ हर जानिब सोहन हलवा हो बालूशाही का जल्वा हो झरना ख़ैर का बहता जाए ख़ूब जलेबी तैरती आए बेरी पर जब मारें पत्थर खील बताशे टपकें दिन भर बच्चा खाए बूढ़ा खाए ऐसा काश कभी हो जाए क़ुलफ़ी का मीनार खड़ा हो हर तारे में केक जुड़ा हो निकलें जब सड़कों पर घर से मोती-चूर के लड्डू बरसे मीठे दूध की बरसातें हों पेठे की सब सौग़ातें हों फ़ालूदे से हौज़ भरा हो लस्सी का दरिया बहता हो बारिश आ कर रस बरसाए ऐसा काश कभी हो जाए नफ़रत हो कड़वी बोली से उल्फ़त हो हर हम-जोली से शीरीं कर दें दुनिया सारी प्यार से भर दें दुनिया सारी दुनिया में हर काम हो शीरीं अव्वल आख़िर नाम हो शीरीं सब से 'हैदर' बोलो मीठा मीठा खा कर बोलो मीठा शीरीनी होंटों पर छाए ऐसा काश अभी हो जाए

Haidar Bayabani

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दादी अम्माँ दादी अम्माँ कितनी सीधी-सादी अम्माँ चाँदी जैसे बालों वाली कितनी अच्छी दादी अम्माँ बातें उन की मिस्री जैसी क़ौल की पक्की दादी अमाँ उजले उजले कपड़े पहने सीधी-सादी दादी अम्माँ दादी अम्माँ दादी अम्माँ कैसी सीधी-सादी अम्माँ रात गए तक परियों वाले क़िस्से हमें सुनाती हैं गीत सुना कर लोरी गा कर मीठी नींद सुलाती हैं आधी रात गए तक जागते रहने की है आदी अम्माँ दादी अम्माँ दादी अम्माँ कैसी सीधी-सादी अम्माँ गुड़िया गुड्डे की पोशाकें हम को सी सी कर देती हैं जितने भी हैं पास हमारे सब संदूक़चे भर देती हैं बन कर फिर बच्चों में बच्चा कर देती है शादी अम्माँ दादी अमाँ दादी अम्माँ कैसी सीधी-सादी अम्माँ अब्बू जब नाराज़ हों हम से वो अब्बू को डाँटती हैं हम बच्चों के हर सुख-दुख को वो हँस हँस के बाँटती हैं जैसे कोई शहर का दादा वैसे घर की दादी अम्माँ दादी अम्माँ दादी अम्माँ कैसी सीधी-सादी अम्माँ

Haidar Bayabani

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आया है त्यौहार क्रिसमस बाँटे सब को प्यार क्रिसमस मैं लाया हूँ प्यारे तोहफ़े देखो कितने सारे तोहफ़े गुड़िया कैसी आली लाया गुड्डा दाढ़ी वाला लाया जिस के पास हों पैसे ले लो जी चाहे तो वैसे ले लो तोहफ़े पा कर सब बोलेंगे आए यूँँ हर बार क्रिसमस बाँटे सब को प्यार क्रिसमस रंगीले ग़ुब्बारे ले लो गोया चाँद सितारे ले लो चलती फिरती मोटर ले लो ढोल बजाता बंदर ले लो देखो आ कर ख़ूब तमाशा आओ जाने आओ 'पाशा' अगले साल मैं फिर आउँगा जब आएगा यार क्रिसमस बाँटे सब को प्यार क्रिसमस

Haidar Bayabani

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दीप से दीप जलाएँ साथी हर आँगन उजयारा कर लें हर ज़र्रा मह-पारा कर लें मेरे सीने तेरे सपने तेरे सुख-दुख मेरे अपने हर आशा को पाएँ साथी दीप से दीप जलाएँ साथी हर आँगन उजयारा कर लें हर ज़र्रा मह-पारा कर लें ये घर अपना वो घर अपना हीरा अपना कंकर अपना मिल-जुल साथ निभाएँ साथी दीप से दीप जलाएँ साथी हर आँगन उजयारा कर लें हर ज़र्रा मह-पारा कर लें भाई भाई बन के रहना साथ ही मरना साथ ही जीना मन से मन मिल जाएँ साथी दीप से दीप जलाएँ साथी हर आँगन उजयारा कर लें हर ज़र्रा मह-पारा कर लें जो साथी भी छूट गया हो बिन-कारन ही रूठ गया हो उस को भी मनवाएँ साथी दीप से दीप जलाएँ साथी हर आँगन उजयारा कर लें हर ज़र्रा मह-पारा कर लें

Haidar Bayabani

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