nazmKuch Alfaaz

"मोर नाच" देखते देखते उस के चारों तरफ़ सात रंगों का रेशम बिखरने लगा धी में धी में कई खिड़कियाँ सी खुलीं फड़फड़ाती हुई फ़ाख़ताएँ उड़ीं बदलियाँ छा गईं बिजलियों की लकीरें चमकने लगीं सारी बंजर ज़मीनें हरी हो गईं नाचते नाचते मोर की आँख से पहला आँसू गिरा ख़ूब-सूरत सजीले परों की धनक टूट कर टुकड़ा टुकड़ा बिखरने लगी फिर फ़ज़ाओं से जंगल बरसने लगा देखते देखते

Nida Fazli1 Likes

Related Nazm

"हाल-ए-दिल" मेरी दिलरुबा तुम ख़ूब-सूरत हो सूरत से नहीं सीरत से मुझे तुम्हारी सीरत से मुहब्बत है इसीलिए सीरत का जानता हूँ शर्म दहशत परेशानी जिन्हें सुख़नवरों कवियों ने इश्क़ की लज़्ज़त बताया है फ़िलहाल ये मेरे दरमियाँ आ रहे हैं बहरहाल मेरी चाहतें तुम्हारे नफ़स में धड़कती हैं ज़िंदा रहती हैं मैं ने तुम्हें देखा है देखते हुए मुझे चाहते हुए मुझे सोचते हुए और मेरे लिए परेशान होते हुए वैसे चाहत हो तो कहना लाज़मी होता है ज़रूरी होता है लेकिन इश्क़ की क़ायनात में लफ़्ज़ ख़ामोश रहते हैं और निग़ाहें बात कर लेती हैं मुझे पता है एक दिन तुम मेरी निग़ाहों से बात कर लोगी पूछ लोगी और तुम्हें जवाब मिलेगा हाँ मैं भी चाहता हूँ ख़ूब चाहता हूँ वैसे मैं भी अपने नग़्मों अपनी ग़ज़लों में मुहब्बत ख़ूब लिखता हूँ हालाँकि सदाक़त ये है कि मैं भी कहने में ख़ौफ़ खाता हूँ वैसे बुरा न मानना कि मैं ने तुम सेे कभी इज़हार नहीं किया सोच लेना कि थियोरी और प्रैक्टिकल में फ़र्क़ होता है ख़ैर अब जो मेरा मौज़ुदा हाल है वो ये है कि आए दिन दिल और दिमाग़ मसअला खड़ा कर देते हैं दिल कहता है तुम ख़ूब-सूरत हो दिमाग़ कहता है मंज़िल पे इख़्तियार करो बहरहाल तुम ख़ूब-सूरत हो तुम ज़ियादा ख़ूब-सूरत हो तुम सब सेे ज़ियादा ख़ूब-सूरत हो तुम ही ख़ूब-सूरत हो

Rakesh Mahadiuree

25 likes

"तुम हो" तुम सुकून हो पुर-सुकून हो मिरे इश्क़ का तुम जुनून हो मैं होश में बाहोश में मिरे जिस्म का तुम ख़ून हो तुम सर्द हो बरसात भी मिरी गर्मियों की तुम जून हो तुम ग़ज़ल हो हो तुम शा'इरी मिरी लिखी नज़्म की धुन हो मिरी हँसी भी तुम मिरी ख़ुशी भी तुम मिरे इस हयात की मम्नून हो तुम धूप हो मिरी छाँव भी तुम सियाह रात का मून हो तुम सिन हो तुम काफ़ भी तुम वाओ के बा'द की नून हो तुम सुकून हो पुर-सुकून हो मिरे इश्क़ का तुम जुनून हो

ZafarAli Memon

25 likes

"तुम से बे-पनाह मोहब्बत" मेरे नूर-ए-नज़र आ भी जा तू नज़र कब सुनाएगा मुझ को तू अच्छी ख़बर तेरा आशिक़ बेचारा परेशान है तुझ से नाराज़ है और हैरान है क़ासिद-ए-मोतबर ले जा मेरी ख़बर तेरी नज़रों से मिलती हैं ख़ामोशियाँ दिल में क्यूँ रखता है इतनी सरगोशियाँ खोल दे अब ज़बाँ ऐ मेरे हम सफ़र मेरे दिल की तमन्ना यहीं हैं सनम मैं रहूँ साथिया बन के सातों जनम बात हो जाए सच तू जो कह दे अगर टूट कर मेरा दिल ये बिखर जाएगा तू न होगा तो ''दानिश'' ये मर जाएगा सूख जाएगा ये ज़िंदगी का शजर

Danish Balliavi

12 likes

"बचपन " आता है याद हम को गुज़रा हुआ ज़माना आँगन में खिड़कियों पर चिड़ियों का चहचहाना बरसात का महीना कागज की कश्तियाँ और फूलों की डालियों से वो तितलियाँ उड़ाना जंगल की सैर करते हम रोज़ सुब्ह उठकर अपना तो क़ा'इदा था सूरज को है जगाना पापा के पालने में बसती थी अपनी दुनिया मम्मी की गोद में था छोटा सा आशियाना खेतों को जब भी जाते पापा के साथ में तो पेशा ही बन गया था पैरों से धूल उड़ाना सुनते थे जब कहानी रातों को दादी माँ से ज़िद कर के फिर से कहते एक और भी सुनाना बचपन का दौर तो बस मस्ती से कट रहा था तितली की आरज़ू थी कलियों सा मुस्कुराना छूने की चाँद को हम कोशिश हज़ार करते और ये भी जानते थे मुश्किल है इस को पाना अंदाज़ उस समय में ख़ालिक़ से कम नहीं था बचपन से ही था अपना जन्नत में आना जाना रोते बहुत हैं अब तो वो दौर याद कर के अश्कों की आस्ताँ ही हँसने का था ठिकाना

Prashant Kumar

5 likes

"कब" कब ये पेड़ हरे होंगे फिर से कब ये कलियाँ फूटेंगी और ये फूल हसेंगे कब ये झरने अपनी प्यास भरेंगे कब ये नदियाँ शोर मचाएँगी कब ये आज़ाद किए जाएँगे सब पंछी कब जंगल साँसे लेंगे कब सब जाएँगे अपने घर कब हाथों से ज़ंजीरें खोली जाएँगी कब हम ऐसों को पूछेगा कोई और ये फ़क़ीरों को भी क़िस्से में लाया जाएगा कब इन काँटों की भी क़ीमत होगी और मिट्टी सोने के भाव में आएगी कब लोगों की ग़लती टाली जाएगी कब ये हवाएँ पायल पहने झूमेगी कब अंबर से परियाँ उतरेंगी कब पत्थरों से भी ख़ुशबू आएगी कब हंसों के जोड़ें नदियों पे बैठेंगे बरखा गीत बनाएगी और मोर उठा के पर कत्थक करते देखे जाएँगे नीलकमल पानी से इश्क़ लड़ाएंगे मछलियाँ ख़ुशी के गोते मारेंगी कब कोयल की कूक सुनाई देगी कब भॅंवरे फिर गुन- गुन करते लौटेंगे बागों में और कब ये प्यारी तितलियाँ कलर फेकेंगी फिर सब कुछ डूबा होगा रंगों में कब ये दुनिया रौशन होगी कब ये जुगनू अपने रंग में आएँगे कब ये सब मुमकिन है कब सबके ही सपने पूरे होंगे कब अपने मन के मुताबिक़ होगा सब कुछ कब ये बहारें लोटेंगी कब वो तारीख़ आएगी बस मुझ को ही नहीं सब को इंतिज़ार है तेरे ' बर्थडे ' का

BR SUDHAKAR

16 likes

More from Nida Fazli

"क़ौमी यक-जेहती" वो तवाइफ़ कई मर्दों को पहचानती है शायद इसी लिए दुनिया को ज़ियादा जानती है उस के कमरे में हर मज़हब के भगवान की एक एक तस्वीर लटकी है ये तस्वीरें लीडरों की तक़रीरों की तरह नुमाइशी नहीं उस का दरवाज़ा रात गए तक हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई हर मज़हब के आदमी के लिए खुला रहता है ख़ुदा जाने उस के कमरे की सी कुशादगी मस्जिद और मंदिर के आँगनों में कब पैदा होगी

Nida Fazli

1 likes

"बुझ गए नील-गगन" अब कहीं कोई नहीं जल गए सारे फ़रिश्तों के बदन बुझ गए नील-गगन टूटता चाँद बिखरता सूरज कोई नेकी न बदी अब कहीं कोई नहीं आग के शो'ले बढ़े आसमानों का ख़ुदा डर के ज़मीं पर उतरा चार छे गाम चला टूट गया आदमी अपनी ही दीवारों से पत्थर ले कर फिर गुफाओं की तरफ़ लौट गया अब कहीं कोई नहीं

Nida Fazli

0 likes

"कच्ची दीवारें" मेरी माँ हर दिन अपने बूढे हाथों से इधर उधर से मिट्टी ला कर घर की कच्ची दीवारों के ज़ख़्मों को भरती रहती है तेज़ हवाओं के झोंकों से बेचारी कितना डरती है मेरी माँ कितनी भोली है बरसों की सीली दीवारें छोटे-मोटे पैवंदों से आख़िर कब तक रुक पाएँगी जब कोई बादल गरजेगा हर हर करती ढह जाएँगी

Nida Fazli

2 likes

और रास्ता चल रहा है पोस्टर में वो जो लड़की हंस रही है नौज़वां तन्हाइयों को डस रही है आ समाँ सिर पर है, पैरों में ज़मीं है कोई लाठी है न बम है क्या ये कम है? दूर बस्ती के किसी कोने में काली दौलतों ने थोड़ी तोड़ा फोड़ी की है चलते फिरते शहर के बस एक ही रस्ते में ग़म है क्या ये कम है? बाअसर लड़कों ने इस नाज़ुक बदन से खेला फिर उस को तोड़ डाला टूटे-फूटे उस बदल का हाल थाने में रक़म है क्या ये कम है? खेल यूँ हर जगह होता है जो होता रहेगा.... जानवर हंसते रहेंगे आदमी रोता रहेगा ज़िंदा लाशें यूँ ही हर अख़बार में जलती रहेंगी सरहदों पर सरहदों की गोलियां चलती रहेंगी ज़िन्दगी में फिर भी सदियों से जिए जाने का दम है क्या ये कम है...?

Nida Fazli

3 likes

"इत्तिफ़ाक़" हम सब एक इत्तिफ़ाक़ के मुख़्तलिफ़ नाम हैं मज़हब मुल्क ज़बान इसी इत्तिफ़ाक़ की अन-गिनत कड़ियाँ हैं अगर पैदाइश से पहले इन्तिख़ाब की इजाज़त होती तो कोई लड़का अपने बाप के घर में पैदा होना पसंद नहीं करता

Nida Fazli

2 likes

Similar Writers

View All ›

Our suggestions based on Nida Fazli.

Similar Moods

View All ›

More moods that pair well with Nida Fazli's nazm.