nazmKuch Alfaaz

"मेरे हिस्से की यादें" तुम्हारी शा में मुझ सेे थोड़ी ज़्यादा केसरी सी हैं तुम्हारी सुब्हें मुझ सेे थोड़ी ज़्यादा रोशनाई हैं तुम्हें बस याद हैं वो पल जो बेहद ख़ुशनुमा से थे वो रातें 'इश्क़िया सी ही तुम्हें बस याद आई हैं चलो मेरे तो ज़ेहन में हर इक लम्हा वो ताज़ा है के जिस में हम ने ख़ुद को फिर से ढूँढा फिर से पाया था और हो भी क्यूँँ ना वक़्त ने जब से अपना वक़्त बाँटा है मेरे हिस्से में यादें थोड़ी ज़्यादा आई हैं मेरे हिस्से में यादें थोड़ी ज़्यादा आई हैं

Related Nazm

तुम्हारा फ़ोन आया है अजब सी ऊब शामिल हो गई है रोज़ जीने में पलों को दिन में, दिन को काट कर जीना महीने में महज़ मायूसियाँ जगती हैं अब कैसी भी आहट पर हज़ारों उलझनों के घोंसले लटके हैं चौखट पर अचानक सब की सब ये चुप्पियाँ इक साथ पिघली हैं उम्मीदें सब सिमट कर हाथ बन जाने को मचली हैं मेरे कमरे के सन्नाटे ने अँगड़ाई सी तोड़ी है मेरी ख़ामोशियों ने एक नग़्मा गुनगुनाया है तुम्हारा फ़ोन आया है, तुम्हारा फ़ोन आया है सती का चैतरा दिख जाए जैसे रूप-बाड़ी में कि जैसे छठ के मौक़े' पर जगह मिल जाए गाड़ी में मेरी आवाज़ से जागे तुम्हारे बाम-ओ-दर जैसे ये नामुमकिन सी हसरत है, ख़याली है, मगर जैसे बड़ी नाकामियों के बा'द हिम्मत की लहर जैसे बड़ी बेचैनियों के बा'द राहत का पहर जैसे बड़ी गुमनामियों के बा'द शोहरत की मेहर जैसे सुब्ह और शाम को साधे हुए इक दोपहर जैसे बड़े उनवान को बाँधे हुए छोटी बहर जैसे नई दुल्हन के शरमाते हुए शाम-ओ-सहर जैसे हथेली पर रची मेहँदी अचानक मुस्कुराई है मेरी आँखों में आँसू का सितारा जगमगाया है तुम्हारा फ़ोन आया है, तुम्हारा फ़ोन आया है

Kumar Vishwas

81 likes

बहुत ख़ूब-सूरत हो तुम, बहुत ख़ूब-सूरत हो तुम कभी मैं जो कह दूँ मोहब्बत है तुम से तो मुझ को ख़ुदारा ग़लत मत समझना कि मेरी ज़रूरत हो तुम बहुत ख़ूब-सूरत हो तुम हैं फूलों की डाली पे बाँहें तुम्हारी हैं ख़ामोश जादू निगाहें तुम्हारी जो काँटे हूँ सब अपने दामन में रख लूँ सजाऊँ मैं कलियों से राहें तुम्हारी नज़र से ज़माने की ख़ुद को बचाना किसी और से देखो दिल मत लगाना कि मेरी अमानत हो तुम बहुत ख़ूब-सूरत हो तुम... कभी जुगनुओं की क़तारों में ढूँडा चमकते हुए चाँद तारों में ढूँडा ख़िज़ाओं में ढूँडा बहारों में ढूँडा मचलते हुए आबसारों में ढूँडा हक़ीक़त में देखा, फ़साने में देखा न तुम सा हँसी, इस ज़माने देखा न दुनिया की रंगीन महफ़िल में पाया जो पाया तुम्हें अपना ही दिल में पाया एक ऐसी मसर्रत हो तुम बहुत ख़ूब-सूरत हो तुम है चेहरा तुम्हारा कि दिन है सुनहरा है चेहरा तुम्हारा कि दिन है सुनहरा और इस पर ये काली घटाओं का पहरा गुलाबों से नाज़ुक महकता बदन है ये लब हैं तुम्हारे कि खिलता चमन है बिखेरो जो ज़ुल्फ़ें तो शरमाए बादल फ़रिश्ते भी देखें तो हो जाएँ पागल वो पाकीज़ा मूरत हो तुम बहुत ख़ूब-सूरत हो तुम जो बन के कली मुस्कुराती है अक्सर शब हिज्र में जो रुलाती है अक्सर जो लम्हों ही लम्हों में दुनिया बदल दे जो शाइ'र को दे जाए पहलू ग़ज़ल के छुपाना जो चाहें छुपाई न जाए भुलाना जो चाहें भुलाई न जाए वो पहली मोहब्बत हो तुम बहुत ख़ूब-सूरत हो तुम बहुत ख़ूब-सूरत हो तुम बहुत ख़ूब-सूरत हो तुम बहुत ख़ूब-सूरत हो तुम

Tahir Faraz

54 likes

"महबूबा के नाम" तू अपनी चिट्ठियों में मीर के अश'आर लिखती है मोहब्बत के बिना है ज़िंदगी बेकार लिखती है तेरे ख़त तो इबारत हैं वफ़ादारी की क़समों से जिन्हें मैं पढ़ते डरता हूँ वही हर बार लिखती है तू पैरोकार लैला की है शीरीं की पुजारन है मगर तू जिस पे बैठी है वो सोने का सिंहासन है तेरी पलकों के मस्कारे तेरे होंठों की ये लाली ये तेरे रेशमी कपड़े ये तेरे कान की बाली गले का ये चमकता हार हाथों के तेरे कंगन ये सब के सब है मेरे दिल मेरे एहसास के दुश्मन कि इन के सामने कुछ भी नहीं है प्यार की क़ीमत वफ़ा का मोल क्या क्या है ऐतिबार की क़ीमत शिकस्ता कश्तियों टूटी हुई पतवार की क़ीमत है मेरी जीत से बढ़कर तो तेरी हार की क़ीमत हक़ीक़त ख़ून के आँसू तुझे रुलवाएगी जानाँ तू अपने फ़ैसले पर बा'द में पछताएगी जानाँ मेरे काँधे पे छोटे भाइयों की ज़िम्मेदारी है मेरे माँ बाप बूढ़े है बहन भी तो कुँवारी है बरहना मौसमों के वार को तू सह न पाएगी हवेली छोड़ कर तू झोपड़ी में रह न पाएगी अमीरी तेरी मेरी मुफ़्लिसी को छल नहीं सकती तू नंगे पाँव तो कालीन पर चल नहीं सकती

Abrar Kashif

50 likes

दौलत ना अता करना मौला, शोहरत ना अता करना मौला बस इतना अता करना चाहे जन्नत ना अता करना मौला शम्मा-ए-वतन की लौ पर जब कुर्बान पतंगा हो होंठों पर गंगा हो, हाथों में तिरंगा हो होंठों पर गंगा हो, हाथों में तिरंगा हो बस एक सदा ही सुनें सदा बर्फ़ीली मस्त हवाओं में बस एक दुआ ही उठे सदा जलते-तपते सेहराओं में जीते-जी इस का मान रखें मर कर मर्यादा याद रहे हम रहें कभी ना रहें मगर इस की सज-धज आबाद रहे जन-मन में उच्छल देश प्रेम का जलधि तरंगा हो होंठों पर गंगा हो, हाथों में तिरंगा हो होंठों पर गंगा हो, हाथों में तिरंगा हो गीता का ज्ञान सुने ना सुनें, इस धरती का यशगान सुनें हम सबद-कीर्तन सुन ना सकें भारत मां का जयगान सुनें परवरदिगार,मैं तेरे द्वार पर ले पुकार ये आया हूँ चाहे अज़ान ना सुनें कान पर जय-जय हिन्दुस्तान सुनें जन-मन में उच्छल देश प्रेम का जलधि तरंगा हो होंठों पर गंगा हो, हाथों में तिरंगा हो होंठों पर गंगा हो, हाथों में तिरंगा हो

Kumar Vishwas

66 likes

पानी कौन पकड़ सकता है जब वो इस दुनिया के शोर और ख़मोशी से क़त'अ-तअल्लुक़ होकर इंग्लिश में ग़ुस्सा करती है, मैं तो डर जाता हूँ लेकिन कमरे की दीवारें हँसने लगती हैं वो इक ऐसी आग है जिसे सिर्फ़ दहकने से मतलब है, वो इक ऐसा फूल है जिस पर अपनी ख़ुशबू बोझ बनी है, वो इक ऐसा ख़्वाब है जिस को देखने वाला ख़ुद मुश्किल में पड़ सकता है, उस को छूने की ख़्वाइश तो ठीक है लेकिन पानी कौन पकड़ सकता है वो रंगों से वाकिफ़ है बल्कि हर इक रंग के शजरे तक से वाकिफ़ है, उस को इल्म है किन ख़्वाबों से आँखें नीली पढ़ सकती हैं, हम ने जिन को नफ़रत से मंसूब किया वो उन पीले फूलों की इज़्ज़त करती है कभी-कभी वो अपने हाथ में पेंसिल ले कर ऐसी सतरें खींचती है सब कुछ सीधा हो जाता है वो चाहे तो हर इक चीज़ को उस के अस्ल में ला सकती है, सिर्फ़ उसी के हाथों से सारी दुनिया तरतीब में आ सकती है, हर पत्थर उस पाँव से टकराने की ख़्वाइश में ज़िंदा है लेकिन ये तो इसी अधूरेपन का जहाँ है, हर पिंजरे में ऐसे क़ैदी कब होते हैं हर कपड़े की किस्मत में वो जिस्म कहाँ है मेरी बे-मक़सद बातों से तंग भी आ जाती है तो महसूस नहीं होने देती लेकिन अपने होने से उकता जाती है, उस को वक़्त की पाबंदी से क्या मतलब है वो तो बंद घड़ी भी हाथ में बाँध के कॉलेज आ जाती है

Tehzeeb Hafi

88 likes

More from Surendra Bhatia "Salil"

"ग़फ़लत" ये कुछ लम्हे ही होते हैं जो हम जीते हैं ग़फ़लत में कि इक दिन बैठ फ़ुर्सत में कसक महसूस कर लेंगे नहीं होती ख़बर तक भी कि केवल ये ही लम्हे हैं हैं शायद सोहबतों के जो इन्हीं में ख़ुद को जीना है हमें एहसास तब होगा कि जब तन्हा कहीं होंगे न वो होंगे न हम होंगे फ़क़त हर सू ख़ला होगी तो अपनी किस्मतों पर या कि अपनी चाहतों पर भी न खीझेंगे न रोएँगे बस अपना मानी ढूँढेंगे

Surendra Bhatia "Salil"

1 likes

"पीरी" सुनो जब वक़्त गुज़रेगा तुम्हारे ज़िस्म से होकर लकीरें याद की रुख़ पर तुम्हारे छोड़ जाएगा ये ढलती उम्र ख़ुद की फिर न तुम को रास आएगी दग़ा कर आइना भी तुम सेे नाता तोड़ जाएगा सभी सामान ओ साज़-ए-नाज़ तुम को बे-सबब होंगे तुम्हारा दिल सँवरने से भी जब मुँह मोड़ जाएगा तब अपने घर की छत पर बैठ यादों की किताबों में मेरे क़िस्सों मेरी बातों के पन्नों पर नज़र करना मेरे एहसास की बू का 'सलिल' ये इत्र सौंधा सा तुम्हारी साँस में मेरी महक इक छोड़ जाएगा

Surendra Bhatia "Salil"

0 likes

“किर्चें” आज एक पुराना रिश्ता दिखा काफी जर्जर हो चुका था उस की दीवारों से पुरानी यादों की पपड़ियाँ भुर-भुर कर गिर रहीं थीं मैं ने सोचा इतना कमज़ोर तो ना हुआ करता था ये ऐसी हालत कैसे हो गई काफी देर टटोला जाँचा-परखा तो देखा नींव कमज़ोर रह गई थी कमबख़्त भरोसे का सी मेंट काफ़ी कम डला था

Surendra Bhatia "Salil"

0 likes

“बारिश” ये बारिश जो अक्सर बरसती है मुझ पर तुम्हारी भी ज़ुल्फ़ें भिगाती तो होगी कभी चाय चुस्काते छज्जे पे बैठे तुम्हें भी मेरी याद आती तो होगी जो मैं ने तुम्हें पेश हसरत से की थी किताब-ए-मुहब्बत निशानी वो मेरी उसी के किसी इक सफ़्हे से गुज़रते ग़ज़ल तुम मेरी गुनगुनाती तो होगी करे सरसराहट ये जब भी तुम्हारे बग़ीचे के पीपल के पत्तों को छू कर तुम्हारी मेरी देर रातों की बातों के एहसास फिर से दिलाती तो होगी हुई एक मुद्दत था मेहमाँ किया तुम को बेनागा आता है हर बार सावन ये जैसे छुपाती है जज़्बात मेरे तुम्हारे भी आँसू छुपाती तो होगी

Surendra Bhatia "Salil"

0 likes

कहानी वो ही होती है कहानी जो भी हो चाहे कहानी वो ही होती है वही लड़का वही लड़की जवानी वो ही होती है बदलते वक़्त में केवल हवा तब्दील होती है वो मिलने की बिछड़ने की अदा तब्दील होती है तड़प उतनी ही होती है वो मजनूँ हो कि राँझा हो बदलते वक़्त में केवल सदा तब्दील होती है रगों में दौड़ते ख़ूॅं की रवानी वो ही होती है कहानी जो भी हो चाहे कहानी वो ही होती है मुक़द्दर की रवानी में विरह सहना भी पड़ता है हर इक पल साथ होकर भी जुदा रहना भी पड़ता है किनारे पर खड़े सोहनी को बहते देखते रह कर कभी महिवाल बनकर साथ में बहना भी पड़ता है मुखौटों में छिपी दुनिया सयानी वो ही होती है कहानी जो भी हो चाहे कहानी वो ही होती है

Surendra Bhatia "Salil"

0 likes

Similar Writers

View All ›

Our suggestions based on Surendra Bhatia "Salil".

Similar Moods

View All ›

More moods that pair well with Surendra Bhatia "Salil"'s nazm.