nazmKuch Alfaaz

दादी अम्माँ जल्दी आओ आ कर एक कहानी सुनाओ आओ बैठो पास हमारे शाही शालू पप्पी दुलारे इक बच्चा था नेक और अच्छा दिल का साफ़ ज़बाँ का सच्चा माँ से अपनी कर के मिन्नत सफ़र की माँगी उस ने इजाज़त माँ ने रक़म सदरी में सी कर कर दिया रुख़्सत आँसू पी कर चलते चलते की ये नसीहत चाहे जितनी आए मुसीबत झूट कभी लब पर मत आए चाहे जान भले ही जाए चला सफ़र पर जब वो बच्चा मन का साफ़ ज़बाँ का सच्चा रस्ते में कुछ डाकू आए ज़ुल्म-ओ-सितम हर इक पर ढाए आख़िर में बच्चे से पूछा पास तिरे जो कुछ हो बतला बच्चे ने कुछ ख़ौफ़ न खाया जो कुछ सच था उन को बताया चीर के सदरी रक़म दिखा दी माँ की नसीहत उन को बता दी बच्चे की जो देखी सदाक़त पाई उस डाकू ने नसीहत तौबा बुरे कामों से कर ली और ईमान से झोली भर ली शैख़ अबदुल-क़ादिर जीलानी दुनिया उन्हें इस नाम से जानी

Related Nazm

"शाइ'र" उस सेे कहना कि रोए नहीं उस सेे कहना कि रोने से भी वो वापस नहीं आएगा उस सेे कहना कि रोना ठीक नहीं उस सेे कहना कि तुम हंसती हुई अच्छी लगती हो उस को समझाना सब कुछ ठीक है कुछ नहीं बिगड़ा उस को कहना कि वो अब भी तुम्हारे साथ है, तुम्हारे पास है उस को ये बताना कि उस की सारी ग़ज़लें तुम्हारी दी हुई हैं और उस को बताना कि तुम उस की सब सेे ख़ूब-सूरत ग़ज़ल हो उस सेे कहना कि वो तुम्हारा कोई भी वा'दा निभा नहीं सका उस सेे कहना कि ख़ुदा ने उसे वक़्त कम दिया उस सेे कहना कि वो इतनी जल्दी जाना नहीं चाहता था उस को ये बार बार मत कहना कि वो लड़का अब मर चुका है उस सेे कहना कि वो शाइ'र था और शाइ'र कभी नहीं मरता

Kabir Altamash

6 likes

"आ जाओ ना बाबा मुझ को नाती कौन पुकारेगा" आप जो मुझ सेे दूर हुए अब मुझ को मौन पुकारेगा आजाओ ना बाबा मुझ को नाती कौन पुकारेगा घर के हर सामान पे हरदम आप का पहरा रहता था मेरा बाहर छूट गया जो आप को फोन पुकारेगा एक बड़े बरगद के जैसे पूरे घर पे छाया थी घर का हर एक बच्चा-बच्चा शनि से सोम पुकारेगा एक हमारी दादी हैं जो दिन भर रोया करती हैं रो रो कर वो कहती हैं अब मुझ को कौन पुकारेगा एक बुआ बाहर रोती हैं एक बुआ तो आँगन में दोनों रो कर कहती हैं अब बेटी कौन पुकारेगा कर्म आप के अच्छे थे ये धरती-अम्बर जाना है हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई हर एक कौम पुकारेगा धूप धूल और बारिश से घर की रखवाली करते थे ऐसा पेड़ जिसे भी मिले वो हर एक यौम पुकारेगा मैं तो ठहरा छोटा बालक मेरी अभी उमर है क्या बाबा के साए में था जो रोम-रोम पुकारेगा

Nirbhay Nishchhal

4 likes

“मेहँदी” जब उस की मेहँदी का रंग सुर्ख़ नहीं हुआ तो उस ने सोचा मैं ने उसे प्रेम नहीं किया ये भी तो हो सकता है मेहँदी मिलावटी हो या फिर उस ने जल्दी ही मेहँदी धो दी हो परंतु मेरे प्रेम का पैमाना उस मेहँदी ने तय किया और देखा जाए तो सही किया यदि मेरा प्रेम सच्चा है तो मेहँदी को हर हाल में रच जाना चाहिए था मिलावटी होना या जल्दी धो देना तो केवल समाज के वे रीति रिवाज हैं जिन्हें तोड़कर ही प्रेम किया जाता है और मेरा प्रेम इन्हें नहीं लाँघ पाया या'नी मेरा प्रेम सच्चा नहीं था मेहँदी को रच जाना चाहिए था

Hamza ali

3 likes

नज़्म:-'शाहज़ादी' बहुत नादान थी लड़की मुझे अपना समझती थी मुझी पे जाँ लुटाती थी बहुत बातें बनाती थी मुझे क़िस्से सुनाती थी और उस में शाहज़ादी थी जिसे इक शाहज़ादे से मोहब्बत थी.! वो कहती थी, कि मैं भी शाहज़ादी हूँ मुझे भी शाहज़ादा ही मिलेगा ना.! जो मुझ पे जाँ लुटाएगा मुझे अपना बनाएगा.. मैं कहता था, कि मैं हूँ आम सा लड़का मोहब्बत का तो मतलब भी मुझे अब तक नहीं मालूम.! तुम्हें देखूं तो लगता है, मोहब्बत चीज़ है कोई,जो तुम जैसी हसीं होंगी.. मैं तुम सेे बात करता हूँ तो लगता है, मोहब्बत है कोई लड़की जो यूँ ही बोलती होगी.. तुम्हारे साथ होता हूँ तो लगता है, मोहब्बत है यहीं पे पास में मेरे.. सो यूँ समझो, मेरी ख़ातिर मोहब्बत तुम. मोहब्बत का हो मतलब तुम. वो कहती थी, चलो झूठे बहुत बातें बनाते हो नहीं हो इतने भोले तुम मुझे जितना दिखाते हो कहा मैं ने, अरे पगली मुझे छोड़ो चलो जाओ कहीं से ढूंढ़ के लाओ है कोई शाहज़ादा तो कि तुम तो शाहज़ादी हो तुम्हें तो शाहज़ादा ही मिलेगा ना.! दिखा आँखें कहा उस ने कि हाँ हाँ ले ही आऊंगी तुम्हें मैं फिर दिखाऊंगी. दिखाया तो नहीं लेकिन वो ख़ुद में खो गई शायद या कोई मिल गया उस को वो अब बातें बनाना भूल जाती थी मुझे क़िस्से सुनाना भूल जाती थी फिर इक दिन फोन कर बोली कहा था ना, कि मैं तो शाहज़ादी हूँ.! तो देखो ढूंढ़ लाई मैं तुम्हारे ही तरह बातें नहीं बिल्कुल बनाता है मुझे वो शाहज़ादी ही बुलाता है मुझे अपना बताता है बहुत पैसे कमाता है वो कहता है उसे मुझ सेे मोहब्बत है जो मैं ने बोलना चाहा, कहा उस ने कि रहने दो,ये बातें तुम न समझोगे कि तुम हो आम से लड़के, सो तुम सेे दूर जाना है उसे अपना बनाना है मुझे घर भी बसाना है.. मैं उस को अलविदा कहता दुआ भी दे ही देता ना.! बहुत जल्दी में थी शायद सो उस ने कुछ भी सुनना ठीक ना समझा, बिना बोले ही उस का फोन कट गया शायद...!! बहुत नादान थी लड़की__....

Ankit Maurya

12 likes

मैं पल-दो-पल का शाइ'र हूँ, पल-दो-पल मेरी कहानी है पल-दो-पल मेरी हस्ती है, पल-दो-पल मेरी जवानी है मुझ से पहले कितने शाइ'र आए और आ कर चले गए कुछ आहें भर कर लौट गए, कुछ नग़ में गा कर चले गए वे भी एक पल का क़िस्सा थे, मैं भी एक पल का क़िस्सा हूँ कल तुम से जुदा हो जाऊँगा गो आज तुम्हारा हिस्सा हूँ मैं पल-दो-पल का शाइ'र हूँ, पल-दो-पल मेरी कहानी है पल-दो-पल मेरी हस्ती है, पल-दो-पल मेरी जवानी है कल और आएँगे नग़मों की खिलती कलियाँ चुनने वाले मुझ सेे बेहतर कहने वाले, तुम सेे बेहतर सुनने वाले कल कोई मुझ को याद करे, क्यूँ कोई मुझ को याद करे मसरुफ़ ज़माना मेरे लिए, क्यूँ वक़्त अपना बर्बाद करे मैं पल-दो-पल का शाइ'र हूँ, पल-दो-पल मेरी कहानी है पल-दो-पल मेरी हस्ती है, पल-दो-पल मेरी जवानी है मैं हर इक पल का शाइ'र हूँ हर इक पल मेरी कहानी है हर इक पल मेरी हस्ती है हर इक पल मेरी जवानी है रिश्तों का रूप बदलता है, बुनियादें ख़त्म नहीं होतीं ख़्वाबों और उमँगों की मियादें ख़त्म नहीं होतीं इक फूल में तेरा रूप बसा, इक फूल में मेरी जवानी है इक चेहरा तेरी निशानी है, इक चेहरा मेरी निशानी है मैं हर इक पल का शाइ'र हूँ हर इक पल मेरी कहानी है हर इक पल मेरी हस्ती है हर इक पल मेरी जवानी है तुझ को मुझ को जीवन अमृत अब इन हाथों से पीना है इन की धड़कन में बसना है, इन की साँसों में जीना है तू अपनी अदाएं बक्ष इन्हें, मैं अपनी वफ़ाएँ देता हूँ जो अपने लिए सोचीं थी कभी, वो सारी दुआएँ देता हूँ मैं हर इक पल का शाइ'र हूँ हर इक पल मेरी कहानी है हर इक पल मेरी हस्ती है हर इक पल मेरी जवानी है

Sahir Ludhianvi

52 likes

More from Jauhar Rahmani

प्यार वफ़ा के दीप जलाएँ घर को अपने स्वर्ग बनाएँ खेलें कूदें और मुस्काएँ देख के ख़ुश हों जिस को माएँ पहला मकतब घर है हमारा दर्स उसी से हम सब पाएँ जिस से मिलें फल इल्म के हम को इस में ऐसे पौदे लगाएँ पहले माँ और बाप से सीखें फिर सब को आदाब सिखाएँ जो भी हमारे घर में आए प्यार से उस को दिल में बिठाएँ बात करें हम मीठी मीठी लफ़्ज़ों के हम फूल खिलाएँ अपने हों या बेगाने हों सब को अपना दोस्त बनाएँ ख़ुश होंगे माँ-बाप हमारे आओ हम ऐसे बन जाएँ और फिर इस के आगे चल कर देश-पुजारी हम कहलाएँ नाम हो रौशन जिस से घर का ऐसे सुंदर दीप जलाएँ

Jauhar Rahmani

0 likes

अब की गर्मी की छुट्टी में या'नी इस गुज़री गर्मी में गए लखनऊ हम ख़ाला के घर देखे तरह तरह के मंज़र भूल-भुलय्याँ हम ने देखी जा के न निकले जिस में कोई देखा हुसैनाबाद का फाटक देखा सिनेमा देखा नाटक लाट शहीदों वाली देखी पार्क गए हम हाथी वाली कौंसिल चैम्बर देखा हम ने ज़ू भी जा कर भालू देखे नाच दिखाते कालू देखे बेली-गारद हम ने देखी जिस में चले थे गोले गोली गए अमीनाबाद भी यारो और हुए हम शाद भी यारो गंज की हम ने सैर भी कर ली हर मंज़र से झोली भर ली गुज़रे क़ैसर-बाग़ से हो कर चार-बाग़ का चलता मंज़र देख के हर मंज़र को आए लौट के अपने घर को आए

Jauhar Rahmani

0 likes

आओ बच्चो बातें बताओ देश का अपने नक़्शा बनाओ गंगा नदी है कहाँ से निकली कहाँ कहाँ ये जा कर फैली संगम का वो कौन नगर है जिस पर सब की लगी नज़र है झांसी क्यूँ मशहूर हुई है किस के नाम से वो चमकी है कैसे अमर पंजाब बना है कौन वहाँ मशहूर हुआ है कहाँ हुए गाँधी जी पैदा काम उन्हों ने किए हैं क्या क्या कौन थे 'शौकत' कौन थे 'जौहर' क्यूँ है इन का चर्चा घर घर पैदा हुए 'अश्फ़ाक़' कहाँ पर नाम है क्यूँ हर एक ज़बाँ पर देश का अपने कौन नगर है जो जन्नत से भी बढ़ कर है दिल्ली को हम क्या हैं कहते जहाँ सफ़ीर हर मुल्क के रहते

Jauhar Rahmani

0 likes

बरखा रुत में आते हैं बादल पानी भर कर लाते हैं बादल आँगन आँगन बरसाते हैं खेतों को तर कर जाते हैं प्यासी धरती के होंटों पर भर जाते हैं अमृत ला कर वर्षा के ये दूत हैं बादल करते हैं धरती को जल-थल फूलों को देते हैं तबस्सुम कोयल को देते हैं तरन्नुम चम-चम बिजली चमकाते हैं एक किरन सी लहराते हैं शोर मचाते हैं गाते हैं चारों तरफ़ ये मंडलाते हैं गीतों की रुत झूलों के दिन कलियों की शब फूलों के दिन वर्षा की रुत भर के लाते बरसाते लहराते जाते

Jauhar Rahmani

0 likes

जाने कितने सपने देखे जीवन के इस रूप नगर में वर्षा रुत में जैसे मुसाफ़िर प्रीत-डगर पर प्रेम-सफ़र में सपने जिन में कोमल परियाँ पर फैलाए डोल रही हैं आशाओं के गीत की लय पर अमृत-रस को घोल रही हैं मैं ने सोचा मीत सभी हैं ये सारा संसार है अपना सारे जग की रीत यही है कड़वी नींदें मीठा सपना धरती की इस फुलवारी में चाँद सितारों के दर्पन में मैं ने देखी अपनी छाया जग में सब अपने हैं तो फिर कोई किसी का बैरी क्यूँ हो होंटों पर मुस्कान तो बिखरे मन में उलझन ठेरी क्यूँ हो

Jauhar Rahmani

0 likes

Similar Writers

View All ›

Our suggestions based on Jauhar Rahmani.

Similar Moods

View All ›

More moods that pair well with Jauhar Rahmani's nazm.