“सुन री सखी” यूँँ ख़याल रख सखी जैसे तेरा ऐनक हूँ मैं यूँँ खिंचा जाऊँ तेरी ओर जैसे चुम्बक हूँ मैं बरसात होने के बा'द निकलते हैं कीट-पतंगे पर तुझे जो पसंद आएगा वही मेंढ़क हूँ मैं यार तू तो समझती ही नहीं है मेरी ख़ामोशी कब से इशारों में कह रहा तेरा सेवक हूँ मैं ऐ सखी क्यूँँ डरती है इक़रार-ए-मोहब्बत से यूँँ माँग रब से जैसे तेरा पूरा-पूरा हक़ हूँ मैं सावन की बरसातें बड़ी प्यारी होती हैं सखी तेरी गीली ज़ुल्फ़ें भीगी-भीगी पलक हूँ मैं देख सखी यूँँ नादानी में मुझे खो मत देना तेरा यार और इक पागल-सा बालक हूँ मैं
Related Nazm
मेरा संसार मेरे मन का सुकून भी तुम हो, तुम ही मेरी मंज़िल उस का जुनून भी तुम हो, मेरा दिन भी तुम हो, मेरी रात भी तुम हो, मेरी नींद भी तुम हो, मेरे जज़्बात भी तुम हो, मेरा हर लम्हा तुम हो, मेरे हालात भी तुम हो, मेरा जीवन भी तुम हो, इस की मस्ती भी तुम हो, हूँ अगर मैं मँझधार तो, फिर इस की कश्ती भी तुम हो, अगर हूँ मैं शरीर तो, इस की अस्थि भी तुम हो, और हूँ अगर मैं आत्मा तो, इस की मुक्ति भी तुम हो, मेरा वैराग्य भी तुम हो, मेरी आसक्ति भी तुम हो, मेरा ईश्वर भी तुम हो, मेरी भक्ति भी तुम हो, मैं अगर दिल हूँ तो, इस की धड़कन भी तुम हो, मेरी हर बात तुम हो, मेरी तड़पन भी तुम हो, मेरी स्वतंत्रता भी तुम हो, मेरा बंधन भी तुम हो, मेरा सुख भी तुम हो, मेरी मुस्कान भी तुम हो, मेरा दुख भी तुम हो, मेरा सम्मान भी तुम हो, मेरा बल भी तुम हो, मेरा स्वाभिमान भी तुम हो, मेरी प्रार्थना भी तुम हो, मेरा अभिमान भी तुम हो, मेरा हर काम भी तुम हो, थक जाऊँ तो आराम भी तुम हो, भेजे हैं तुझ को चाँद के हाथों, वो सारे पैग़ाम भी तुम हो, साँसों में बस तेरा नाम है, मेरा तो अंजाम भी तुम हो, मेरा तो आधार ही तुम हो, मेरी तो सरकार ही तुम हो, मेरी तो फ़कीरी भी तुम हो, ख़ज़ाने का अंबार भी तुम हो, मेरे लबों का मौन भी तुम हो, मेरे दिल की पुकार भी तुम हो, मेरी तो कुटिया भी तुम हो, मेरा राज-दरबार भी तुम हो, मेरा हर विकार भी तुम हो, मेरा तो श्रृंगार भी तुम हो, मेरी जीत-हार भी तुम हो, मेरा गुस्सा-प्यार भी तुम हो, मेरा तो घर बार ही तुम हो, जीने के आसार ही तुम हो, कैसे मैं बताऊ तुझे, तुम्हारे बिन मैं कुछ भी नहीं, मेरा तो संसार ही तुम हो, मेरा तो संसार ही तुम हो, मेरा तो संसार ही तुम हो।
Divya 'Kumar Sahab'
37 likes
"दरीचा-हा-ए-ख़याल" चाहता हूँ कि भूल जाऊँ तुम्हें और ये सब दरीचा-हा-ए-ख़याल जो तुम्हारी ही सम्त खुलते हैं बंद कर दूँ कुछ इस तरह कि यहाँ याद की इक किरन भी आ न सके चाहता हूँ कि भूल जाऊँ तुम्हें और ख़ुद भी न याद आऊँ तुम्हें जैसे तुम सिर्फ़ इक कहानी थीं जैसे मैं सिर्फ़ इक फ़साना था
Jaun Elia
27 likes
"जज़्बात" जो ये आँखों से बह रहा है कितने हम लाचार है तुम समझो तो इंतिज़ार है वरना कोई इंतिज़ार नहीं तुम्हारी याद में ऐसे डूबा जैसे कोई बीमार है तुम समझो तो बे-क़रार है वरना कोई बे-क़रार नहीं जो मेरी धड़कन चल रही है इन में बस तुम्हारा नाम है तुम समझो तो ये पुकार है वरना कोई पुकार नहीं इन हाथो से तुम्हारी ज़ुल्फ़ें सँवारनी हैं हर शाम तुम्हारे साथ गुज़ारनी है तुम समझो तो ये दुलार है वरना कोई दुलार नहीं तुम्हारे बस दिल में जगह नहीं तुम्हारी रूह से रिश्ता चाहिए तुम समझो तो ये आर-पार है वरना कुछ आर-पार नहीं तुम्हें मिल तो जाएगा मुझ सेे अच्छा सामने तुम्हारे तो क़तार है तुम्हें पता है ना तुम्हारी चाहत का बस एक हक़दार है बाकी कोई हक़दार नहीं तुम्हारी बाँहों में ही सुकून मिलेगा मुझे सच कहूँ तो दरकार है तुम समझो तो ये बहार है वरना कहीं बहार नहीं तुम्हारी गोद में आराम चाहिए तुम्हारी आवाज़ में बस अपना नाम चाहिए तुम समझो तो ये क़रार है वरना कोई क़रार नहीं तुम हो जो मेरे जीवन का तुम नहीं तो सब बेज़ार है तुम समझो तो ये आधार है वरना कोई आधार नहीं काश तुम भी हम सेे इक़रार करते चाहत की बरसात मूसला-धार करते मैं तुम सेे बेहद करता और तुम बेहद की भी हद पार करते तुम समझो तो इन सब के आसार हैं वरना कोई आसार नहीं अगर तुम कोशिश करते तो पता चलता की तुम हो तो घर-बार है तुम से ही मेरा संसार है वरना कोई संसार नहीं बिन तेरे ज़िन्दगी तो रहेगी काट लेंगे तुम्हारे बिना तुम समझो तो जीने का विचार है वरना कोई विचार नहीं ये दुनिया भले कुछ भी बोले तुम मेरी नहीं तो क्या मैं तुम्हारा तो हूँ ना यही मेरा इज़हार है अगर तुम समझो तो ये प्यार है वरना कोई प्यार नहीं
Divya 'Kumar Sahab'
37 likes
मैं पल-दो-पल का शाइ'र हूँ, पल-दो-पल मेरी कहानी है पल-दो-पल मेरी हस्ती है, पल-दो-पल मेरी जवानी है मुझ से पहले कितने शाइ'र आए और आ कर चले गए कुछ आहें भर कर लौट गए, कुछ नग़ में गा कर चले गए वे भी एक पल का क़िस्सा थे, मैं भी एक पल का क़िस्सा हूँ कल तुम से जुदा हो जाऊँगा गो आज तुम्हारा हिस्सा हूँ मैं पल-दो-पल का शाइ'र हूँ, पल-दो-पल मेरी कहानी है पल-दो-पल मेरी हस्ती है, पल-दो-पल मेरी जवानी है कल और आएँगे नग़मों की खिलती कलियाँ चुनने वाले मुझ सेे बेहतर कहने वाले, तुम सेे बेहतर सुनने वाले कल कोई मुझ को याद करे, क्यूँ कोई मुझ को याद करे मसरुफ़ ज़माना मेरे लिए, क्यूँ वक़्त अपना बर्बाद करे मैं पल-दो-पल का शाइ'र हूँ, पल-दो-पल मेरी कहानी है पल-दो-पल मेरी हस्ती है, पल-दो-पल मेरी जवानी है मैं हर इक पल का शाइ'र हूँ हर इक पल मेरी कहानी है हर इक पल मेरी हस्ती है हर इक पल मेरी जवानी है रिश्तों का रूप बदलता है, बुनियादें ख़त्म नहीं होतीं ख़्वाबों और उमँगों की मियादें ख़त्म नहीं होतीं इक फूल में तेरा रूप बसा, इक फूल में मेरी जवानी है इक चेहरा तेरी निशानी है, इक चेहरा मेरी निशानी है मैं हर इक पल का शाइ'र हूँ हर इक पल मेरी कहानी है हर इक पल मेरी हस्ती है हर इक पल मेरी जवानी है तुझ को मुझ को जीवन अमृत अब इन हाथों से पीना है इन की धड़कन में बसना है, इन की साँसों में जीना है तू अपनी अदाएं बक्ष इन्हें, मैं अपनी वफ़ाएँ देता हूँ जो अपने लिए सोचीं थी कभी, वो सारी दुआएँ देता हूँ मैं हर इक पल का शाइ'र हूँ हर इक पल मेरी कहानी है हर इक पल मेरी हस्ती है हर इक पल मेरी जवानी है
Sahir Ludhianvi
52 likes
तुम्हारा फ़ोन आया है अजब सी ऊब शामिल हो गई है रोज़ जीने में पलों को दिन में, दिन को काट कर जीना महीने में महज़ मायूसियाँ जगती हैं अब कैसी भी आहट पर हज़ारों उलझनों के घोंसले लटके हैं चौखट पर अचानक सब की सब ये चुप्पियाँ इक साथ पिघली हैं उम्मीदें सब सिमट कर हाथ बन जाने को मचली हैं मेरे कमरे के सन्नाटे ने अँगड़ाई सी तोड़ी है मेरी ख़ामोशियों ने एक नग़्मा गुनगुनाया है तुम्हारा फ़ोन आया है, तुम्हारा फ़ोन आया है सती का चैतरा दिख जाए जैसे रूप-बाड़ी में कि जैसे छठ के मौक़े' पर जगह मिल जाए गाड़ी में मेरी आवाज़ से जागे तुम्हारे बाम-ओ-दर जैसे ये नामुमकिन सी हसरत है, ख़याली है, मगर जैसे बड़ी नाकामियों के बा'द हिम्मत की लहर जैसे बड़ी बेचैनियों के बा'द राहत का पहर जैसे बड़ी गुमनामियों के बा'द शोहरत की मेहर जैसे सुब्ह और शाम को साधे हुए इक दोपहर जैसे बड़े उनवान को बाँधे हुए छोटी बहर जैसे नई दुल्हन के शरमाते हुए शाम-ओ-सहर जैसे हथेली पर रची मेहँदी अचानक मुस्कुराई है मेरी आँखों में आँसू का सितारा जगमगाया है तुम्हारा फ़ोन आया है, तुम्हारा फ़ोन आया है
Kumar Vishwas
81 likes
More from Sahil Verma
" तुम मुझे गले नहीं लगातीं " मेरी बाहें राह देख थक जातीं तुम्हारे सितम पर मुझ को हैरानियाँ तक नहीं आतीं और मैं तुम्हारे ख़्वाबों को नैनों से बहती धारों को इन होंठों की मुस्कानों को झुमके वाले कानों को तुम्हारे उन सभी राज़ों को अपने अनकहे वादों को कुछ मज़बूत इरादों को तुम्हारी चश्मदीद निगाहों को तुम्हारी कड़वी-मीठी बातों को तुम्हारे बँधे हुए बालों को साँवले ख़ूब-सूरत हाथों को खिलखिलाते तुम्हारे दाँतों को तुम्हारे संग बिताई यादों को कब से बाहों में भर चुका हूँ दिल-लगी से तुम्हारी तर चुका हूँ तुम इक यही रस्म क्यूँँ नहीं निभातीं आख़िर तुम मुझे गले क्यूँँ नहीं लगातीं
Sahil Verma
2 likes
“ख़्वाब” मैं दिन में माहताब देखता हूँ मैं रातों को आफ़ताब देखता हूँ मैं आँखों में हिजाब देखता हूँ मैं अश्कों को शराब देखता हूँ मैं सवालों में जवाब देखता हूँ मैं किताबों को शादाब देखता हूँ मैं ख़ुद को बे-नक़ाब देखता हूँ मैं तुझ को बे-हिसाब देखता हूँ मैं हर सपना नायाब देखता हूँ यूँँ ही नहीं इतने ख़्वाब देखता हूँ
Sahil Verma
1 likes
"इंतिज़ार" कितनी राहें देखूँ कितना इंतिज़ार करूँँ कह दिया है उस ने दुगना इंतिज़ार करूँँ वो भी तो कभी मेरी तरह इंतिज़ार करे आख़िर मैं ही क्यूँँ तन्हा इंतिज़ार करूँँ फिर मरेगा कोई मजनूँ उस के प्यार में कह रही है फिर से लैला इंतिज़ार करूँँ इज़हार हो गया इक़रार भी कर लिया है फिर भी यही दिलासा इंतिज़ार करूँँ ज़िन्दगी है कि मरने नहीं दे रही मुझ को मौत कह रही है बस थोड़ा इंतिज़ार करूँँ
Sahil Verma
1 likes
" बचपन की बारिश " बारिश का बहाना है, लाइट का आना-जाना है लाइट गई लाइट गई, बच्चों का चिल्लाना है दादा के कुछ क़िस्से हैं, दादी का कोई फ़साना है सब लोग भूखे हैं अभी, माँ को खाना बनाना है गली में पानी भर चुका है, काग़ज़ की नाव चलाना है माँ मैं देर से नहाऊँगा, मुझे बारिश में नहाना है ये तो बचपन की बारिश है, अब मोबाइल का ज़माना है
Sahil Verma
2 likes
"मलाल" तुम लगा देना मुझे, गर कोई गुलाल हो। तुम बता देना मुझे, गर कोई मलाल हो तुम सुना देना मुझे, गर कोई हाल हो। तुम बता देना मुझे, गर कोई मलाल हो तुम पूछ लेना मुझे, गर कोई सवाल हो। तुम बता देना मुझे, गर कोई मलाल हो तुम थाम लेना मुझे, गर कोई ख़याल हो। तुम बता देना मुझे, गर कोई मलाल हो तुम सज़ा देना मुझे, गर कोई मजाल हो। तुम बता देना मुझे, गर कोई मलाल हो तुम क्षमा देना मुझे, गर कोई जलाल हो। तुम बता देना मुझे, गर कोई मलाल हो तुम दिखा देना मुझे, गर कोई कमाल हो। तुम बता देना मुझे, गर कोई मलाल हो तुम छोड़ देना मुझे, गर कोई गोलमाल हो। तुम बता देना मुझे, गर कोई मलाल हो
Sahil Verma
1 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Sahil Verma.
Similar Moods
More moods that pair well with Sahil Verma's nazm.







