nazmKuch Alfaaz

"तसव्वुर" तुम ने तो कितने वादे किए थे कि मैं शादी तुम सेे करूँँगी तुम्हारी बाहों में जिऊँगी मरूँगी और कितनी बार मैं ने भी कहा था तुम मुझे छोड़ना मत लेकिन तुम ने मेरी एक न सुनी अब तो तुम्हारे तसव्वुर की महफ़िल सजाता हूँ तुम्हारी यादों को अपने हुजरे में बुलाता हूँ और अब तो तुम मेरे ख़्वाबों में हर रोज़ आने लगी हो हक़ीक़त में तो न सही लेकिन ख़्वाबों में सताने लगी हो लेकिन तुम सेे एक गिला है तुम तो चली गई मगर यादों को न ले गई तुम्हारी याद मुझे धीरे-धीरे खा रही है तुम्हारी बे-वफ़ाई से मेरी जान जा रही है आख़िर तुम किस की बातों में आ गई मेरी मोहब्बत को तुम ठुकरा गई ये तो मैं ने सोचा भी नहीं था कि ऐसा मोड़ आएगा चाहता हूँ जिस को वही दिल तोड़ जाएगा मैं ने तो अपने दिल को मशवरा दे दिया मगर मेरी जाँ तुम ने किस को दिल में दाख़िला दे दिया सुनो तुम सेे ये उम्मीद बिल्कुल नहीं की थी मैं ने लेकिन तुम ने वो भी कर दिखाया अब मोहब्बत मुझे अच्छी नहीं लग रही जाने क्यूँ जब कोई मोहब्बत की बात करता है तो मुझे तुम्हारे वो वादे याद आ जाते हैं तुम को इतना ध्यान रहे तुम ख़ुदा नहीं हो लोग पूछते हैं तो कह देता हूँ कि तुम बे-वफ़ा नहीं हो

Related Nazm

"तुम हो" तुम सुकून हो पुर-सुकून हो मिरे इश्क़ का तुम जुनून हो मैं होश में बाहोश में मिरे जिस्म का तुम ख़ून हो तुम सर्द हो बरसात भी मिरी गर्मियों की तुम जून हो तुम ग़ज़ल हो हो तुम शा'इरी मिरी लिखी नज़्म की धुन हो मिरी हँसी भी तुम मिरी ख़ुशी भी तुम मिरे इस हयात की मम्नून हो तुम धूप हो मिरी छाँव भी तुम सियाह रात का मून हो तुम सिन हो तुम काफ़ भी तुम वाओ के बा'द की नून हो तुम सुकून हो पुर-सुकून हो मिरे इश्क़ का तुम जुनून हो

ZafarAli Memon

25 likes

"जज़्बात" जो ये आँखों से बह रहा है कितने हम लाचार है तुम समझो तो इंतिज़ार है वरना कोई इंतिज़ार नहीं तुम्हारी याद में ऐसे डूबा जैसे कोई बीमार है तुम समझो तो बे-क़रार है वरना कोई बे-क़रार नहीं जो मेरी धड़कन चल रही है इन में बस तुम्हारा नाम है तुम समझो तो ये पुकार है वरना कोई पुकार नहीं इन हाथो से तुम्हारी ज़ुल्फ़ें सँवारनी हैं हर शाम तुम्हारे साथ गुज़ारनी है तुम समझो तो ये दुलार है वरना कोई दुलार नहीं तुम्हारे बस दिल में जगह नहीं तुम्हारी रूह से रिश्ता चाहिए तुम समझो तो ये आर-पार है वरना कुछ आर-पार नहीं तुम्हें मिल तो जाएगा मुझ सेे अच्छा सामने तुम्हारे तो क़तार है तुम्हें पता है ना तुम्हारी चाहत का बस एक हक़दार है बाकी कोई हक़दार नहीं तुम्हारी बाँहों में ही सुकून मिलेगा मुझे सच कहूँ तो दरकार है तुम समझो तो ये बहार है वरना कहीं बहार नहीं तुम्हारी गोद में आराम चाहिए तुम्हारी आवाज़ में बस अपना नाम चाहिए तुम समझो तो ये क़रार है वरना कोई क़रार नहीं तुम हो जो मेरे जीवन का तुम नहीं तो सब बेज़ार है तुम समझो तो ये आधार है वरना कोई आधार नहीं काश तुम भी हम सेे इक़रार करते चाहत की बरसात मूसला-धार करते मैं तुम सेे बेहद करता और तुम बेहद की भी हद पार करते तुम समझो तो इन सब के आसार हैं वरना कोई आसार नहीं अगर तुम कोशिश करते तो पता चलता की तुम हो तो घर-बार है तुम से ही मेरा संसार है वरना कोई संसार नहीं बिन तेरे ज़िन्दगी तो रहेगी काट लेंगे तुम्हारे बिना तुम समझो तो जीने का विचार है वरना कोई विचार नहीं ये दुनिया भले कुछ भी बोले तुम मेरी नहीं तो क्या मैं तुम्हारा तो हूँ ना यही मेरा इज़हार है अगर तुम समझो तो ये प्यार है वरना कोई प्यार नहीं

Divya 'Kumar Sahab'

37 likes

"ख़त" तुम को ये बताना था या फिर ये समझाना था दिल की बस ये चाहत थी बस तुम पर प्यार लुटाना था तुम को ये बताना था था छेड़ना तुम को थोड़ा थोड़ा तुम्हें सताना था जो रूठ जाते तुम मुझ सेे हाँ मुझ को तुम्हें मनाना था फिर तुम को गले लगाना था तुम को ये बताना था लड़ के भी तुम सोते तो तुम्हारा सिर सहलाना था मक़्सद सिर्फ़ एक था तुम्हारा प्यार कमाना था सारी दुनिया मिट्टी है तुम्हारा साथ ख़ज़ाना था तुम को ये बताना था मिलने तुम सेे आना था या फिर तुम्हें बुलाना था माँग तुम्हारी भरनी थी अपना तुम्हें बनाना था तुम्हारा ही कहलाना था तुम को ये बताना था इस जीवन का हर मंज़र तुम्हारे साथ बिताना था हर फेरे का हर वा'दा तुम्हारे साथ निभाना था मंगलसूत्र इन हाथों से तुम को ही पहनाना था तुम को ये बताना था फ़ासले जितने भी थे उन को मुझे मिटाना था उस ख़ुदा से हर जन्म में तुम्हारा साथ लिखाना था फिर बारात तुम्हारी चौखट पर तुम सेे ही ब्याह रचाना था तुम को ये बताना था बिन बोले बस चुपके से गजरा तुम्हें दिलाना था बनाता मैं एक दिन खाना फिर खाना तुम्हें खिलाना था तुम्हारे हाथों से खाना मुझ को भी तो खाना था तुम को ये बताना था खो दिया तुम को मैं ने ये दुख अब मुझे मनाना था डूब जाता आसमान बस आँसू मुझे बहाना था फिर लिख दिया मैं ने आँसू बस इतना मेरा फ़साना था तुम को ये बताना था बस तुम को ये बताना था

Divya 'Kumar Sahab'

28 likes

"उस की ख़ुशियाँ" सारी झीलें सूख गई हैं उस की आँखें सूख गई हैं पेड़ों पर पंछी भी चुप हैं उस को कोई दुख है शायद रस्ते सूने सूने हैं सब उस ने टहलना छोड़ दिया है सारी ग़ज़लें बेमानी हैं उस ने पढ़ना छोड़ दिया है वो भी हँसना भूल चुकी है गुलों ने खिलना छोड़ दिया है सावन का मौसम जारी है या'नी उस का ग़म जारी है बाक़ी मौसम टाल दिए हैं सुख कूएँ में डाल दिए हैं चाँद को छुट्टी दे दी गई है तारों को मद्धम रक्खा है आतिश-दान में फेंक दी ख़ुशियाँ दिल में बस इक ग़म रक्खा है खाना पीना छोड़ दिया है सब सेे रिश्ता तोड़ दिया है हाए क़यामत आने को है उस ने जीना छोड़ दिया है हर दिल ख़ुश हर चेहरा ख़ुश हो वो हो ख़ुश तो दुनिया ख़ुश हो वो अच्छी तो सब अच्छा है और दुनिया में क्या रक्खा है ये सब सुन कर ख़ुदा ने बोला बोल तेरी अब ख़्वाहिश क्या है मैं ने बोला मेरी ख़्वाहिश मेरी ख़्वाहिश उस की ख़ुशियाँ ख़ुदा ने बोला तेरी ख़्वाहिश मैं फिर बोला उस की ख़ुशियाँ इस के अलावा पूछ रहा हूँ मैं ने बोला उस की ख़ुशियाँ अपने लिए कुछ माँग ले पगले माँग लिया ना उस की ख़ुशियाँ उस की ख़ुशियाँ उस की ख़ुशियाँ उस की ख़ुशियाँ उस की ख़ुशियाँ

Varun Anand

30 likes

उस से मुहब्बत झीलें क्या हैं? उस की आँखें उम्दा क्या है? उस का चेहरा ख़ुश्बू क्या है? उस की साँसें ख़ुशियाँ क्या हैं? उस का होना तो ग़म क्या है? उस सेे जुदाई सावन क्या है? उस का रोना सर्दी क्या है? उस की उदासी गर्मी क्या है? उस का ग़ुस्सा और बहारें? उस का हँसना मीठा क्या है? उस की बातें कड़वा क्या है? मेरी बातें क्या पढ़ना है? उस का लिक्खा क्या सुनना है? उस की ग़ज़लें लब की ख़्वाहिश? उस का माथा ज़ख़्म की ख़्वाहिश? उस का छूना दुनिया क्या है? इक जंगल है और तुम क्या हो? पेड़ समझ लो और वो क्या है? इक राही है क्या सोचा है? उस से मुहब्बत क्या करते हो? उस से मुहब्बत मतलब पेशा? उस से मुहब्बत इस के अलावा? उस से मुहब्बत उस सेे मुहब्बत........

Varun Anand

475 likes

More from Vaseem 'Haidar'

''मशवरा'' तुम हम सेे मोहब्बत क्यूँ कर बैठी हो तुम्हें इल्म है हम किसी और से मोहब्बत करते हैं  मगर तुम्हारे दिल में क्या आया कि तुम हम सेे मोहब्बत कर के बैठी हो देखो अब ये हमारा दिल किसी का नहीं हो सकता  देखो तुम मासूम हो अभी कमसिन उम्र हो अभी तुम मोहब्बत के जाल में पड़ी नहीं हो अभी तुम्हारे ख़ुश रहने के दिन हैं मोहब्बत कर के तुम बर्बाद हो जाओगी याद बहुत करोगी लेकिन रोटी कम खाओगी फूल जैसे चेहरे को क्यूँ मुरझाना चाहती हो सच बताओ क्यूँ हमारे क़रीब आना चाहती हो हम किसी की फ़ुर्क़त में रोज़-ओ-शब रोते हैं धीरे धीरे उस की सारी यादों को धोते हैं तुम्हारे गेसू काली घटाएँ तुम्हारे लब और तुम्हारी अदाएँ अपने दिल को कैसे भी समझाओ जान-ए-मन तुम हम को भूल जाओ

Vaseem 'Haidar'

1 likes

'तुम्हारी याद' बहुत दिन हो गए हैं तुम ने मुझ सेे बात नहीं की क्या तुम्हें मेरे बिना रहना आ गया है मगर मुझे तो आज तक रहना नहीं आया तुम्हारी याद बहुत सताती है तुम्हारी याद बहुत आती है मगर ये सब तुम सेे अब कहूँगा नहीं और ज़ुल्म तुम्हारे अब सहूँगा नहीं अब तुम सेे कोई शिकायत नहीं करेगा इक लड़का तुम्हारे बिन रह लेगा किस पर तुम ने ज़ुल्फ़ों से बिजली गिराई होगी क्या जान-ए-जाँ तुम को मेरी याद आई होगी मगर तुम बात करने से कतराती हो सो मैं तुम्हारे लायक़ तो बिल्कुल भी नहीं तुम दूर से ही मुझ सेे इतराती हो जाओ मैं तुम को अब भूलने लगा हूँ तुम्हारी नज़र में तो मैं बरसों से मरा हूँ

Vaseem 'Haidar'

0 likes

“निशानी” एक भी तुम्हारी तस्वीर पुरानी नहीं मेरे पास तुम्हारी कोई निशानी नहीं तुम ने हर बार मुझे झूठे दिलासे दिए मैं वो सब हक़ीक़त समझता  रहा अब ये बात किसी को सुनानी नहीं मेरे पास तुम्हारी कोई निशानी नहीं अब तो तुम्हें कोई और पसंद आ गया होगा अब तो तुम उसे ही सोचती रहती होगी मुझे ख़बर है तुम मेरी दिवानी नहीं मेरे पास तुम्हारी कोई निशानी नहीं गर मुझे छोड़ना ही था तो मुझे ख़्वाब क्यूँ दिखाए बुझते हुए दिए को इक उम्मीद क्यूँ दी मैं तो अपनी सुद्द-बुद में खोया था तुम्हें क्या ख़बर मैं तुम्हारी ख़ातिर कितना रोया था आग दिल में जो है वो बुझानी नहीं मेरे पास तुम्हारी कोई निशानी नहीं जाते-जाते तुम ने इक बार भी मेरी ख़बर न ली बरसों पहले तुम ने मुझ सेे किनारा कर लिया अब यादों की मय्यत उठानी नहीं मेरे पास तुम्हारी कोई निशानी नहीं

Vaseem 'Haidar'

1 likes

Similar Writers

View All ›

Our suggestions based on Vaseem 'Haidar'.

Similar Moods

View All ›

More moods that pair well with Vaseem 'Haidar''s nazm.