"तुम दिखोगी" सारी दुनिया को छोड़कर मेरी आँखों में देखोगी तो एक दुनिया दिखेगी जहाँ सिर्फ़ तुम दिखोगी वो पैसे वाला होगा मगर मेरी जेब में अगर देखोगी तो एक बटवा मिलेगा बटवे में भी तुम दिखोगी चुपके से मेरे ख़्वाब में आना वहाँ इक लड़की दिखेगी जिस की बाँहों में मेरा सर होगा ग़ौर से उस का चेहरा देखोगी तो चेहरे में तुम दिखोगी तुम दोनों की तस्वीर तो है किसी रोज़ मैं मर जाऊँ पोस्टमार्टम होने के बा'द निकलेगी दिल से तस्वीर ख़ून साफ़ कर के अगर देखोगी तो तुम दिखोगी
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तुम्हें इक बात कहनी थी इजाज़त हो तो कह दूँ मैं ये भीगा भीगा सा मौसम ये तितली फूल और शबनम चमकते चाँद की बातें ये बूँदें और बरसातें ये काली रात का आँचल हवा में नाचते बादल धड़कते मौसमों का दिल महकती ख़ुश्बूओं का दिल ये सब जितने नज़ारे हैं कहो किस के इशारे हैं सभी बातें सुनी तुम ने फिर आँखें फेर लीं तुम ने मैं तब जा कर कहीं समझा कि तुम ने कुछ नहीं समझा मैं क़िस्सा मुख़्तसर कर के ज़रा नीची नज़र कर के ये कहता हूँ अभी तुम से मोहब्बत हो गई तुम से
Zubair Ali Tabish
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"दोस्त के नाम ख़त" तुम ने हाल पूछा है हालत-ए-मोहब्बत में हाल का बताना क्या! दिल सिसक रहा हो तो ज़ख़्म का छुपाना क्या! तुम जो पूछ बैठे हो कुछ तो अब बताना है बात एक बहाना है तुम ने हाल पूछा है इक दिया जलाता हूँ ठीक है बताता हूँ रोज़ उस की यादों में दूर तक चले जाना जो भी था कहा उस ने अपने साथ दोहराना साँस जब रुके तो फिर अपनी मरती आँखों में उस की शक्ल ले आना और ज़िन्दगी पाना रोज़ ऐसे होता है कुछ पुराने मैसेज हैं जिन में उस की बातें हैं कुछ तबील सुब्हे हैं कुछ क़दीम रातें हैं मैं ने उस की बातों में ज़िन्दगी गुज़ारी है ज़िन्दगी मिटाने का हौसला नहीं मुझ में एक एक लफ़्ज़ उस का साँस में पिरोया है, रूह में समोया है उस के जितने मैसेज है रोज़ खोल लेता हूँ उस सेे कह नहीं पाता ख़ुद से बोल लेता हूँ उस के पेज पर जा कर रोज़ देखता हूँ मैं आज कितने लोगों ने उस की पैरवी की है और सोचता हूँ मैं ये नसीब वाले हैं उस को देख सकते हैं उस सेे बात करते हैं ये इजाज़तों वाले मुझ सेे कितने बेहतर हैं मैं तो दाग़ था कोई जो मिटा दिया उस ने गर मिटा दिया उस ने ठीक ही किया उस ने, तुम ने हाल पूछा था लो बता दिया मैं ने जो भी कुछ बताया है उस को मत बता देना पढ़ के रो पड़ो तो फिर इन तमाम लफ़्ज़ों को बस गले लगा लेना, वो मेरी मोहब्बत है और सदा रहेगी वो जब नहीं रहूँगा तो एक दिन कहेगी वो तुम अली फ़क़त तुम थे जिस ने मुझ को चाहा था जिस ने मेरे माथे को चूम कर बताया था तुम दुआ का चेहरा हो तुम हया का पहरा हो मैं तो तब नहीं हूँगा पर मेरी सभी नज़्में उस की बात सुन लेंगी तुम भी मुस्कुरा देना फिर बहुत मोहब्बत से उस को सब बता देना उस के नर्म हाथों में मेरा ख़त थमा देना लो ये ख़त तुम्हारा है और उस की जानिब से वो जो बस तुम्हारा था आज भी तुम्हारा है
Ali Zaryoun
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मैं पल-दो-पल का शाइ'र हूँ, पल-दो-पल मेरी कहानी है पल-दो-पल मेरी हस्ती है, पल-दो-पल मेरी जवानी है मुझ से पहले कितने शाइ'र आए और आ कर चले गए कुछ आहें भर कर लौट गए, कुछ नग़ में गा कर चले गए वे भी एक पल का क़िस्सा थे, मैं भी एक पल का क़िस्सा हूँ कल तुम से जुदा हो जाऊँगा गो आज तुम्हारा हिस्सा हूँ मैं पल-दो-पल का शाइ'र हूँ, पल-दो-पल मेरी कहानी है पल-दो-पल मेरी हस्ती है, पल-दो-पल मेरी जवानी है कल और आएँगे नग़मों की खिलती कलियाँ चुनने वाले मुझ सेे बेहतर कहने वाले, तुम सेे बेहतर सुनने वाले कल कोई मुझ को याद करे, क्यूँ कोई मुझ को याद करे मसरुफ़ ज़माना मेरे लिए, क्यूँ वक़्त अपना बर्बाद करे मैं पल-दो-पल का शाइ'र हूँ, पल-दो-पल मेरी कहानी है पल-दो-पल मेरी हस्ती है, पल-दो-पल मेरी जवानी है मैं हर इक पल का शाइ'र हूँ हर इक पल मेरी कहानी है हर इक पल मेरी हस्ती है हर इक पल मेरी जवानी है रिश्तों का रूप बदलता है, बुनियादें ख़त्म नहीं होतीं ख़्वाबों और उमँगों की मियादें ख़त्म नहीं होतीं इक फूल में तेरा रूप बसा, इक फूल में मेरी जवानी है इक चेहरा तेरी निशानी है, इक चेहरा मेरी निशानी है मैं हर इक पल का शाइ'र हूँ हर इक पल मेरी कहानी है हर इक पल मेरी हस्ती है हर इक पल मेरी जवानी है तुझ को मुझ को जीवन अमृत अब इन हाथों से पीना है इन की धड़कन में बसना है, इन की साँसों में जीना है तू अपनी अदाएं बक्ष इन्हें, मैं अपनी वफ़ाएँ देता हूँ जो अपने लिए सोचीं थी कभी, वो सारी दुआएँ देता हूँ मैं हर इक पल का शाइ'र हूँ हर इक पल मेरी कहानी है हर इक पल मेरी हस्ती है हर इक पल मेरी जवानी है
Sahir Ludhianvi
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मेरा संसार मेरे मन का सुकून भी तुम हो, तुम ही मेरी मंज़िल उस का जुनून भी तुम हो, मेरा दिन भी तुम हो, मेरी रात भी तुम हो, मेरी नींद भी तुम हो, मेरे जज़्बात भी तुम हो, मेरा हर लम्हा तुम हो, मेरे हालात भी तुम हो, मेरा जीवन भी तुम हो, इस की मस्ती भी तुम हो, हूँ अगर मैं मँझधार तो, फिर इस की कश्ती भी तुम हो, अगर हूँ मैं शरीर तो, इस की अस्थि भी तुम हो, और हूँ अगर मैं आत्मा तो, इस की मुक्ति भी तुम हो, मेरा वैराग्य भी तुम हो, मेरी आसक्ति भी तुम हो, मेरा ईश्वर भी तुम हो, मेरी भक्ति भी तुम हो, मैं अगर दिल हूँ तो, इस की धड़कन भी तुम हो, मेरी हर बात तुम हो, मेरी तड़पन भी तुम हो, मेरी स्वतंत्रता भी तुम हो, मेरा बंधन भी तुम हो, मेरा सुख भी तुम हो, मेरी मुस्कान भी तुम हो, मेरा दुख भी तुम हो, मेरा सम्मान भी तुम हो, मेरा बल भी तुम हो, मेरा स्वाभिमान भी तुम हो, मेरी प्रार्थना भी तुम हो, मेरा अभिमान भी तुम हो, मेरा हर काम भी तुम हो, थक जाऊँ तो आराम भी तुम हो, भेजे हैं तुझ को चाँद के हाथों, वो सारे पैग़ाम भी तुम हो, साँसों में बस तेरा नाम है, मेरा तो अंजाम भी तुम हो, मेरा तो आधार ही तुम हो, मेरी तो सरकार ही तुम हो, मेरी तो फ़कीरी भी तुम हो, ख़ज़ाने का अंबार भी तुम हो, मेरे लबों का मौन भी तुम हो, मेरे दिल की पुकार भी तुम हो, मेरी तो कुटिया भी तुम हो, मेरा राज-दरबार भी तुम हो, मेरा हर विकार भी तुम हो, मेरा तो श्रृंगार भी तुम हो, मेरी जीत-हार भी तुम हो, मेरा गुस्सा-प्यार भी तुम हो, मेरा तो घर बार ही तुम हो, जीने के आसार ही तुम हो, कैसे मैं बताऊ तुझे, तुम्हारे बिन मैं कुछ भी नहीं, मेरा तो संसार ही तुम हो, मेरा तो संसार ही तुम हो, मेरा तो संसार ही तुम हो।
Divya 'Kumar Sahab'
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याद है एक दिन? मेरी मेज़ पे बैठे-बैठे सिगरेट की डिबिया पर तुम ने एक स्केच बनाया था आ कर देखो उस पौधे पर फूल आया है.
Gulzar
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"तुम फिर चली जाना" कुछ दिन बाक़ी है जीने को काफ़ी है थोड़ा और सताना तुम फिर चली जाना बस अब यही है पाना साथ तस्वीर खींचवाना ज़िंदा रहूँ इस के लिए इक बार गले लग जाना इतना बस रिश्ता निभाना तुम फिर चली जाना महफ़िल में शे'र पढूँगा शे'र में तेरा नाम कहूँगा नहीं तेरी बदनामी होगी ये पाँच साल बा'द करूँँगा महफ़िल बनकर मुस्कुराना तुम फिर चली जाना ख़ुश रहूँगा चैन से सोना याद आए तो थोड़ा रोना इस जनम तू उस की हो जा किसी जनम बस मेरी होना कहीं मिलना तो चेहरा छुपाना तुम फिर चली जाना
100rav
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"वो मैं हूँ" फूलों के बाग़ों से चले तो जो सहरा कर देता है वो मैं हूँ ज़ख़्म पे दवाई लगाकर ज़ख़्म गहरा कर देता है वो मैं हूँ अच्छे लोग भागते हैं मुझ सेे और कभी शरीक नहीं होने देते बारात त्योहार या अच्छे ख़ासे जलसे का जो बुरा कर देता है वो मैं हूँ तुम मेरा नाम लेना और देखना क़िस्मत तुम्हारी भी फूट जाएगी नए जन्में बच्चे को गोद में ले के बूढ़ा या अधमरा कर देता है वो मैं हूँ मेरे घर वालों ने भी मुझे इस लिए ही कच्ची उम्र में फेंक दिया था नासूर बीमारी से जो घर बिकवाकर क़र्ज़ा कर देता है वो मैं हूँ शैतान भी आधी रात में मेरा नाम लेने से घबराता है अब तो जो अपनी इक आँख बंद कर दज्जाल सा चेहरा कर देता है वो मैं हूँ ख़ुदा ने इस लिए मुझे बद सेूरत बनाया कि कोई पसंद न करे वो मनहूस परछाई जो दिन में अँधेरा कर देता है वो मैं हूँ मैं वो इंसान हूँ जो सजदे नहीं करता बस नशे करता है जो हवस को मुहब्बत बना कर मिट्टी को ख़ुदा कर देता है वो मैं हूँ
100rav
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“कृष्ण है” प्यार भाव का दर्पण कृष्ण है भक्ति रस का समर्पण कृष्ण है तुम प्रेम से बस पुकारो तो सुख करता अर्पण कृष्ण है वो परमेश्वर अंत भी अनंत भी नयन मूँद कर दर्शन कृष्ण है परिस्थिति से हार मत मानो किस का चाहिए समर्थन कृष्ण है ढूँढो तो कहीं नहीं समझो तो गौ गोपी और गोवर्धन कृष्ण है महाभारत हो या जीवन संघर्ष बनो अर्जुन तो हर रण कृष्ण है
100rav
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"मैं सोचता हूँ" बैठे बैठे बात ये मैं सोचता हूँ मेरी क़िस्मत क्यूँ नहीं उस के ही जैसी सुब्ह होते करती हो मैसेज जिस को उस का दिन बन जाता होगा और उस को कोई भी तकलीफ़ थोड़ी होती होगी 'इत्र तो अब वो लगाता भी न होगा हाँ गले जो तुम लगाती हो उसे अब राब्ता भी करते होंगे सब कि ख़ाली बेचे उन को ही पसीने वस्ल वाले बनते हैं दोनों के ही अब दरमियाँ से तुम उसे जो छूती हो तो देखना अब लक़्वा सारी उम्र मारेगा ही कैसे क्योंकि मुझ को याद है जब आई थी घर और हम सोए थे जिस खटिये पे उस में थे उड़स जो फिर कहीं गुम हो गए और मेरे घर में इक अलग सी थी रवानी सुब्ह लोगों ने कहा हीरा मिला क्या रात भर उस की चमक थी मेरे घर में ख़ैर अब उस को सभी ये कहते होंगे पूछते हैं लोग कि हीरा कहाँ है बेचा क्यूँ उस लड़के को और कितना पाया मैं परेशाँ हूँ इन्हें क्या ही बताऊँ सिर्फ़ हीरा ही नहीं वो मेरी जाँ है नूर है वो ज़िंदगी का मेरे लेकिन उस ने ठाना है मुझे तोड़ेगी ऐसे आइना जैसे गिरे सौ फ़ीट से तो मेरी भी ख़्वाहिश यही बस रह गई है टूट के उस के ही हाथों है बिखरना कौन पागल चाहता है ऐसे जीना ये बदन होगा अकेला क़ब्र में पर दूर उस सेे मर के रहना अच्छा होगा
100rav
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"शा'इरी या बीवी" है घर इन झड़ते बालों से परेशाँ, सभी शादी की बस ज़िद कर रहे हैं, यहाँ मेरी मुहब्बत शा'इरी है, अगर शादी का दिन तय हो गया तो, मुहब्बत मुँह बना कर ग़ुस्से में ही, चली जाएगी मुझ को छोड़कर तो, न आऊँगा किसी के काम में भी, मैं तो बस शा'इरी का ही हूँ लोगों, ये सूरज चाँद से तो दूर रह ले, मगर बिन रौशनी क्या ही करेगा, कोई समझाए घर वालों को ये सब, यही डर खा रहा है मुझ को अब तो, मेरे घर वाले शादी करवा ही देंगे, ख़ुदा अगले जनम भी फ़न यही देना, मुझे बेकस बनाना रखना बेघर, कोई इक ज़िंदगी शाइ'र रहूँ बस, मुझे इस बात की चिंता न हो तब, चुनूँ क्या शा'इरी या बीवी में से, बिताऊँ ज़िंदगी बस शा'इरी में
100rav
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