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“कृष्ण है” प्यार भाव का दर्पण कृष्ण है भक्ति रस का समर्पण कृष्ण है तुम प्रेम से बस पुकारो तो सुख करता अर्पण कृष्ण है वो परमेश्वर अंत भी अनंत भी नयन मूँद कर दर्शन कृष्ण है परिस्थिति से हार मत मानो किस का चाहिए समर्थन कृष्ण है ढूँढो तो कहीं नहीं समझो तो गौ गोपी और गोवर्धन कृष्ण है महाभारत हो या जीवन संघर्ष बनो अर्जुन तो हर रण कृष्ण है

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"याद है पहले रोज़ कहा था" याद है पहले रोज़ कहा था फिर न कहना ग़लती दिल की प्यार समझ के करना लड़की प्यार निभाना होता है फिर पार लगाना होता है याद है पहले रोज़ कहा था साथ चलो तो पूरे सफ़र तक मर जाने की अगली ख़बर तक समझो यार ख़ुदा तक होगा सारा प्यार वफ़ा तक होगा फिर ये बंधन तोड़ न जाना छोड़ गए तो फिर न आना छोड़ दिया जो तेरा नहीं है चला गया जो मेरा नहीं है याद है पहले रोज़ कहा था या तो टूट के प्यार न करना या फिर पीठ पे वार न करना जब नादानी हो जाती है नई कहानी हो जाती है नई कहानी लिख लाऊँगा अगले रोज़ मैं बिक जाऊँगा तेरे गुल जब खिल जाएँगे मुझ को पैसे मिल जाएँगे याद है पहले रोज़ कहा था बिछड़ गए तो मौज उड़ाना वापस मेरे पास न आना जब कोई जा कर वापस आए रोए तड़पे या पछताए मैं फिर उस को मिलता नहीं हूँ साथ दोबारा चलता नहीं हूँ गुम जाता हूँ खो जाता हूँ मैं पत्थर का हो जाता हूँ

Khalil Ur Rehman Qamar

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"लव ट्राईऐंगल" जब ख़यालों में मैं उस के पीछे पीछे जाता भाव खाती देखो फिर मैं उस सेे रुठ जाता ऐसे वैसे कैसे कैसे मुझ को वो मनाती जान थी मेरी वो कैसे मैं ना मान पाता अपने लव का ट्राईऐंगल काश जो ना बनता तू सवाल और तेरा मैं जवाब होता काश जो तू मेरी आँखों में वो झाँक जाती तेरे पास में जो महका मैं गुलाब होता अगर ये ख़्वाब सच हुआ तो सुनले ऐ हसीं मैं पूरी उम्र तेरे दिल में ही गुज़ार दूँ तू जो चले तो दिन हो जब रूके तो रात हो ये काएनात तेरे क़दमों में उतार दूँ अपने लव का ट्राईऐंगल काश जो ना बनता काश जो तू बोले तेरी मैं आवाज़ होता तू शबाब तेरी धुन में मैं शराब होता सबके चेहरों को तो तू यूँँ निहार जाती तेरे नैनों का कभी तो मैं शिकार होता अपने लव का ट्राईऐंगल काश जो ना बनता

Rohit tewatia 'Ishq'

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"तेरी याद है" मैं हूँ ये काली अँधेरी रात है तन्हाई है और तेरी याद है मेरे हाथ में क़लम है पास में रखा एक गिलास है जो शराब से भरा है तुझे याद किए जा रहा हूँ शराब पीते हुए नज़्म लिखते जा रहा हूँ सुनो मेरे लिखे नज़्म तो पढ़ोगी ना ख़्वाबों में मुलाक़ात तो करोगी ना प्यार से न सही, नफ़रत से ही मुझे याद तो करोगी ना जब याद आए मेरी तो ये भी ख़याल करना मैं तेरी आवाज़ सुनने को परेशान रहता हूँ मैं तुझे एक बार देखना चाहता हूँ मैं चाहता हूँ कि तू फिर से मेरे सर पे हाथ फेरे मैं ये भी चाहता हूँ कि तू फिर से आए मेरे पास और आ कर फिर कभी न जाए पर ऐसा तो हो ही नहीं सकता ऐसा होना तो नामुम्किन है

Rovej sheikh

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"ख़त" तुम को ये बताना था या फिर ये समझाना था दिल की बस ये चाहत थी बस तुम पर प्यार लुटाना था तुम को ये बताना था था छेड़ना तुम को थोड़ा थोड़ा तुम्हें सताना था जो रूठ जाते तुम मुझ सेे हाँ मुझ को तुम्हें मनाना था फिर तुम को गले लगाना था तुम को ये बताना था लड़ के भी तुम सोते तो तुम्हारा सिर सहलाना था मक़्सद सिर्फ़ एक था तुम्हारा प्यार कमाना था सारी दुनिया मिट्टी है तुम्हारा साथ ख़ज़ाना था तुम को ये बताना था मिलने तुम सेे आना था या फिर तुम्हें बुलाना था माँग तुम्हारी भरनी थी अपना तुम्हें बनाना था तुम्हारा ही कहलाना था तुम को ये बताना था इस जीवन का हर मंज़र तुम्हारे साथ बिताना था हर फेरे का हर वा'दा तुम्हारे साथ निभाना था मंगलसूत्र इन हाथों से तुम को ही पहनाना था तुम को ये बताना था फ़ासले जितने भी थे उन को मुझे मिटाना था उस ख़ुदा से हर जन्म में तुम्हारा साथ लिखाना था फिर बारात तुम्हारी चौखट पर तुम सेे ही ब्याह रचाना था तुम को ये बताना था बिन बोले बस चुपके से गजरा तुम्हें दिलाना था बनाता मैं एक दिन खाना फिर खाना तुम्हें खिलाना था तुम्हारे हाथों से खाना मुझ को भी तो खाना था तुम को ये बताना था खो दिया तुम को मैं ने ये दुख अब मुझे मनाना था डूब जाता आसमान बस आँसू मुझे बहाना था फिर लिख दिया मैं ने आँसू बस इतना मेरा फ़साना था तुम को ये बताना था बस तुम को ये बताना था

Divya 'Kumar Sahab'

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"सौदाई" अजब दिल है न जीता है न मरता है न सीने में ठहरता है न बाहर ही निकलता है अजब जाँ है तरसती है कि तू आए झिझकती है कि तू आए तो ना-मालूम क्या होगा परेशाँ है कि दुनिया क्या कहेगी पशेमाँ है कि अपने बा-हमी रिश्ते में वो दम है न वो ख़म है मगर फिर भी बिलखती है कि तन्हाई ने ऐसा मार रक्खा है न तू आई तो मेरा क्या बनेगा अजब तू है न अपनों में न ग़ैरों में न ग़म-अंदोज़ ख़ल्वत में न जाँ-अफ़रोज़ जल्वत में मुझे डर है कि तुझ सेे मेल होगा तो कहाँ होगा किसी सर-सब्ज़ वादी में के इस वीरान कुटिया में इसी दुनिया में या फिर सरहदों के पार उक़्बा में अजब मैं हूँ मुफ़क्किर भी मुहक़्क़िक़ भी मुसन्निफ़ भी मगर अफ़सोस आशिक़ भी गया-गुज़रा सा शाइ'र भी बईद-अज़-अक़्ल भी और रस्म-ए-दुनिया से भी बे-गाना जो अनजाने में तुझ सेे ढेर सारा प्यार कर बैठा ब-हर-सूरत अगर कुछ वाक़िया है तो फ़क़त ये है मिरा दिल तुझ पे शैदा है मिरी जाँ तुझ पे वारी है मगर फिर भी ये हसरत है कि कोई मरहम-ए-दिल दिल को समझाए कोई गिरवीदा-ए-जाँ जाँ को बतलाए कि तू इक पैकर-ए-दिलकश नहीं है एक नागन है जो अपनों ही को डसने के लिए बेताब रहती है ये सब कुछ जान कर भी मैं तिरे इन गेसुओं के पेच-ओ-ख़म का सिर-फिरा क़ैदी तड़पता रहता हूँ मैं इस लिए शायद के तू आए तू आ कर मुझ को पहले की तरह दोबारा डस जाए

Dharmesh bashar

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"वो मैं हूँ" फूलों के बाग़ों से चले तो जो सहरा कर देता है वो मैं हूँ ज़ख़्म पे दवाई लगाकर ज़ख़्म गहरा कर देता है वो मैं हूँ अच्छे लोग भागते हैं मुझ सेे और कभी शरीक नहीं होने देते बारात त्योहार या अच्छे ख़ासे जलसे का जो बुरा कर देता है वो मैं हूँ तुम मेरा नाम लेना और देखना क़िस्मत तुम्हारी भी फूट जाएगी नए जन्में बच्चे को गोद में ले के बूढ़ा या अधमरा कर देता है वो मैं हूँ मेरे घर वालों ने भी मुझे इस लिए ही कच्ची उम्र में फेंक दिया था नासूर बीमारी से जो घर बिकवाकर क़र्ज़ा कर देता है वो मैं हूँ शैतान भी आधी रात में मेरा नाम लेने से घबराता है अब तो जो अपनी इक आँख बंद कर दज्जाल सा चेहरा कर देता है वो मैं हूँ ख़ुदा ने इस लिए मुझे बद सेूरत बनाया कि कोई पसंद न करे वो मनहूस परछाई जो दिन में अँधेरा कर देता है वो मैं हूँ मैं वो इंसान हूँ जो सजदे नहीं करता बस नशे करता है जो हवस को मुहब्बत बना कर मिट्टी को ख़ुदा कर देता है वो मैं हूँ

100rav

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"तुम दिखोगी" सारी दुनिया को छोड़कर मेरी आँखों में देखोगी तो एक दुनिया दिखेगी जहाँ सिर्फ़ तुम दिखोगी वो पैसे वाला होगा मगर मेरी जेब में अगर देखोगी तो एक बटवा मिलेगा बटवे में भी तुम दिखोगी चुपके से मेरे ख़्वाब में आना वहाँ इक लड़की दिखेगी जिस की बाँहों में मेरा सर होगा ग़ौर से उस का चेहरा देखोगी तो चेहरे में तुम दिखोगी तुम दोनों की तस्वीर तो है किसी रोज़ मैं मर जाऊँ पोस्टमार्टम होने के बा'द निकलेगी दिल से तस्वीर ख़ून साफ़ कर के अगर देखोगी तो तुम दिखोगी

100rav

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"तुम फिर चली जाना" कुछ दिन बाक़ी है जीने को काफ़ी है थोड़ा और सताना तुम फिर चली जाना बस अब यही है पाना साथ तस्वीर खींचवाना ज़िंदा रहूँ इस के लिए इक बार गले लग जाना इतना बस रिश्ता निभाना तुम फिर चली जाना महफ़िल में शे'र पढूँगा शे'र में तेरा नाम कहूँगा नहीं तेरी बदनामी होगी ये पाँच साल बा'द करूँँगा महफ़िल बनकर मुस्कुराना तुम फिर चली जाना ख़ुश रहूँगा चैन से सोना याद आए तो थोड़ा रोना इस जनम तू उस की हो जा किसी जनम बस मेरी होना कहीं मिलना तो चेहरा छुपाना तुम फिर चली जाना

100rav

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''यक़ीन है मुझे'' यक़ीन है मुझे ख़ुद पर तुझ पर और उस ख़ुदा पर तू मिलेगा फिर वहीं छोड़ गया था जहाँ पर मैं एकतरफ़ा प्यार शिद्दत से निभाऊँगा तू नहीं चाहती तो मेरे मरने की दुआ कर सब तो मिट्टी होंगे चाहे दफ़नाकर या जलाकर तू भी मिलेगा फिर वहीं छोड़ गया था जहाँ पर यक़ीन है मुझे ख़ुद पर तुझ पर और उस ख़ुदा पर मैं और याद आऊँगा ये मेरा वा'दा है तुझ सेे तू एक बार भूलने की कोशिश तो कर भुलाकर मर जाऊँगा तो ये जिस्म तो सो जाएगा क़ब्र में मगर मुहब्बत रूह को ले कर आएगी शायद जगाकर इस लिए भी मैं ने तुझे जाने दिया था उस के पास मज़ा ही क्या किसी को पाना वो भी रुला कर तू याद भी कर ले तो बस मुझे इश्क़ मुकम्मल है चल याद कर ले मुझ को तू इतनी सी दया कर मेरा इश्क़ देख कर ख़ुदा अगले जनम ये करेगा तेरा मेरा नाम साथ लिख देगा उस का मिटाकर यक़ीन है मुझे ख़ुद पर तुझ पर और उस ख़ुदा पर तू मिलेगा फिर वहीं छोड़ गया था जहाँ पर

100rav

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"मैं सोचता हूँ" बैठे बैठे बात ये मैं सोचता हूँ मेरी क़िस्मत क्यूँ नहीं उस के ही जैसी सुब्ह होते करती हो मैसेज जिस को उस का दिन बन जाता होगा और उस को कोई भी तकलीफ़ थोड़ी होती होगी 'इत्र तो अब वो लगाता भी न होगा हाँ गले जो तुम लगाती हो उसे अब राब्ता भी करते होंगे सब कि ख़ाली बेचे उन को ही पसीने वस्ल वाले बनते हैं दोनों के ही अब दरमियाँ से तुम उसे जो छूती हो तो देखना अब लक़्वा सारी उम्र मारेगा ही कैसे क्योंकि मुझ को याद है जब आई थी घर और हम सोए थे जिस खटिये पे उस में थे उड़स जो फिर कहीं गुम हो गए और मेरे घर में इक अलग सी थी रवानी सुब्ह लोगों ने कहा हीरा मिला क्या रात भर उस की चमक थी मेरे घर में ख़ैर अब उस को सभी ये कहते होंगे पूछते हैं लोग कि हीरा कहाँ है बेचा क्यूँ उस लड़के को और कितना पाया मैं परेशाँ हूँ इन्हें क्या ही बताऊँ सिर्फ़ हीरा ही नहीं वो मेरी जाँ है नूर है वो ज़िंदगी का मेरे लेकिन उस ने ठाना है मुझे तोड़ेगी ऐसे आइना जैसे गिरे सौ फ़ीट से तो मेरी भी ख़्वाहिश यही बस रह गई है टूट के उस के ही हाथों है बिखरना कौन पागल चाहता है ऐसे जीना ये बदन होगा अकेला क़ब्र में पर दूर उस सेे मर के रहना अच्छा होगा

100rav

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