"शा'इरी या बीवी" है घर इन झड़ते बालों से परेशाँ, सभी शादी की बस ज़िद कर रहे हैं, यहाँ मेरी मुहब्बत शा'इरी है, अगर शादी का दिन तय हो गया तो, मुहब्बत मुँह बना कर ग़ुस्से में ही, चली जाएगी मुझ को छोड़कर तो, न आऊँगा किसी के काम में भी, मैं तो बस शा'इरी का ही हूँ लोगों, ये सूरज चाँद से तो दूर रह ले, मगर बिन रौशनी क्या ही करेगा, कोई समझाए घर वालों को ये सब, यही डर खा रहा है मुझ को अब तो, मेरे घर वाले शादी करवा ही देंगे, ख़ुदा अगले जनम भी फ़न यही देना, मुझे बेकस बनाना रखना बेघर, कोई इक ज़िंदगी शाइ'र रहूँ बस, मुझे इस बात की चिंता न हो तब, चुनूँ क्या शा'इरी या बीवी में से, बिताऊँ ज़िंदगी बस शा'इरी में
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तुम्हें इक बात कहनी थी इजाज़त हो तो कह दूँ मैं ये भीगा भीगा सा मौसम ये तितली फूल और शबनम चमकते चाँद की बातें ये बूँदें और बरसातें ये काली रात का आँचल हवा में नाचते बादल धड़कते मौसमों का दिल महकती ख़ुश्बूओं का दिल ये सब जितने नज़ारे हैं कहो किस के इशारे हैं सभी बातें सुनी तुम ने फिर आँखें फेर लीं तुम ने मैं तब जा कर कहीं समझा कि तुम ने कुछ नहीं समझा मैं क़िस्सा मुख़्तसर कर के ज़रा नीची नज़र कर के ये कहता हूँ अभी तुम से मोहब्बत हो गई तुम से
Zubair Ali Tabish
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"दोस्त के नाम ख़त" तुम ने हाल पूछा है हालत-ए-मोहब्बत में हाल का बताना क्या! दिल सिसक रहा हो तो ज़ख़्म का छुपाना क्या! तुम जो पूछ बैठे हो कुछ तो अब बताना है बात एक बहाना है तुम ने हाल पूछा है इक दिया जलाता हूँ ठीक है बताता हूँ रोज़ उस की यादों में दूर तक चले जाना जो भी था कहा उस ने अपने साथ दोहराना साँस जब रुके तो फिर अपनी मरती आँखों में उस की शक्ल ले आना और ज़िन्दगी पाना रोज़ ऐसे होता है कुछ पुराने मैसेज हैं जिन में उस की बातें हैं कुछ तबील सुब्हे हैं कुछ क़दीम रातें हैं मैं ने उस की बातों में ज़िन्दगी गुज़ारी है ज़िन्दगी मिटाने का हौसला नहीं मुझ में एक एक लफ़्ज़ उस का साँस में पिरोया है, रूह में समोया है उस के जितने मैसेज है रोज़ खोल लेता हूँ उस सेे कह नहीं पाता ख़ुद से बोल लेता हूँ उस के पेज पर जा कर रोज़ देखता हूँ मैं आज कितने लोगों ने उस की पैरवी की है और सोचता हूँ मैं ये नसीब वाले हैं उस को देख सकते हैं उस सेे बात करते हैं ये इजाज़तों वाले मुझ सेे कितने बेहतर हैं मैं तो दाग़ था कोई जो मिटा दिया उस ने गर मिटा दिया उस ने ठीक ही किया उस ने, तुम ने हाल पूछा था लो बता दिया मैं ने जो भी कुछ बताया है उस को मत बता देना पढ़ के रो पड़ो तो फिर इन तमाम लफ़्ज़ों को बस गले लगा लेना, वो मेरी मोहब्बत है और सदा रहेगी वो जब नहीं रहूँगा तो एक दिन कहेगी वो तुम अली फ़क़त तुम थे जिस ने मुझ को चाहा था जिस ने मेरे माथे को चूम कर बताया था तुम दुआ का चेहरा हो तुम हया का पहरा हो मैं तो तब नहीं हूँगा पर मेरी सभी नज़्में उस की बात सुन लेंगी तुम भी मुस्कुरा देना फिर बहुत मोहब्बत से उस को सब बता देना उस के नर्म हाथों में मेरा ख़त थमा देना लो ये ख़त तुम्हारा है और उस की जानिब से वो जो बस तुम्हारा था आज भी तुम्हारा है
Ali Zaryoun
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"तुम हो" तुम सुकून हो पुर-सुकून हो मिरे इश्क़ का तुम जुनून हो मैं होश में बाहोश में मिरे जिस्म का तुम ख़ून हो तुम सर्द हो बरसात भी मिरी गर्मियों की तुम जून हो तुम ग़ज़ल हो हो तुम शा'इरी मिरी लिखी नज़्म की धुन हो मिरी हँसी भी तुम मिरी ख़ुशी भी तुम मिरे इस हयात की मम्नून हो तुम धूप हो मिरी छाँव भी तुम सियाह रात का मून हो तुम सिन हो तुम काफ़ भी तुम वाओ के बा'द की नून हो तुम सुकून हो पुर-सुकून हो मिरे इश्क़ का तुम जुनून हो
ZafarAli Memon
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"इंतिज़ार" एक उम्र गुज़ार चुके तो महसूस किया है जिसे उम्र भर चाहा वो मग़रूर हुआ है एक शख़्स का इंतिज़ार हर वक़्त किया है वो जा चुका है हमें अब यक़ीन हुआ है तिरे इंतिज़ार ने बालों को सफेद किया है हम समझते रहे ये धूल का किया है
ALI ZUHRI
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"नसरी नज़्म" नस्र अब्बा नज़्म अमाँ दोनों को इनकार है ये जो नसरी नज़्म है ये किस की पैदा-वार है सिर्फ़ लफ्फ़ाज़ी पे मब्नी है ये तजरीदी कलाम जिस में अन्क़ा हैं मआ'नी लफ़्ज़ पर्दा-दार है नस्र है गर नस्र तो वो नज़्म हो सकती नहीं नज़्म जो हो नस्र की मानिंद वो बे-कार है क़ाफ़िए की कोई पाबंदी न है क़ैद-ए-रदीफ़ बे-दर-ओ-दीवार का ये घर भी क्या पुरकार है बहरस आज़ाद क़ैद-ए-वज़न से है बे-नियाज़ वाह क्या मदर पिदर आज़ाद ये दिलदार है मर्तबे में 'मीर' ओ 'मोमिन' से है हर कोई बुलंद इन में हर बे-बहर ग़ालिब से बड़ा फ़नकार है जिस के चमचे जितने ज़्यादा हों वो उतना ही अज़ीम आज कल मिसरा उठाना एक कारोबार है दाद सिर्फ़ अपनों को देते हैं गिरोह-अंदर-गिरोह उन के टोले से जो बाहर हो गया मुरदार है बन गया उस्ताद-ओ-अल्लामा यहाँ हर बे-शुऊर कोर-चश्म अहल-ए-नज़र होने का दावेदार है शा'इरी जुज़-शाइरी है है ज़रा मेहनत-तलब और मेहनत ही वो शय है जिस से उन को आर है पाप-म्यूज़िक के लिए मौज़ूँ है नसरी शा'इरी हर रिवायत से बग़ावत की ये दावेदार है तब्अ-ए-मौज़ूँ गर न बख़्शी हो ख़ुदा ने आप को शा'इरी क्यूँँ कीजे आख़िर क्या ख़ुदा की मार है दाद देना ऐसी नज़्मों को बड़ी बे-दाद है जो न समझा और कहे समझा बड़ा मक्कार है
Aasi Rizvi
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“कृष्ण है” प्यार भाव का दर्पण कृष्ण है भक्ति रस का समर्पण कृष्ण है तुम प्रेम से बस पुकारो तो सुख करता अर्पण कृष्ण है वो परमेश्वर अंत भी अनंत भी नयन मूँद कर दर्शन कृष्ण है परिस्थिति से हार मत मानो किस का चाहिए समर्थन कृष्ण है ढूँढो तो कहीं नहीं समझो तो गौ गोपी और गोवर्धन कृष्ण है महाभारत हो या जीवन संघर्ष बनो अर्जुन तो हर रण कृष्ण है
100rav
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"तुम फिर चली जाना" कुछ दिन बाक़ी है जीने को काफ़ी है थोड़ा और सताना तुम फिर चली जाना बस अब यही है पाना साथ तस्वीर खींचवाना ज़िंदा रहूँ इस के लिए इक बार गले लग जाना इतना बस रिश्ता निभाना तुम फिर चली जाना महफ़िल में शे'र पढूँगा शे'र में तेरा नाम कहूँगा नहीं तेरी बदनामी होगी ये पाँच साल बा'द करूँँगा महफ़िल बनकर मुस्कुराना तुम फिर चली जाना ख़ुश रहूँगा चैन से सोना याद आए तो थोड़ा रोना इस जनम तू उस की हो जा किसी जनम बस मेरी होना कहीं मिलना तो चेहरा छुपाना तुम फिर चली जाना
100rav
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"वो मैं हूँ" फूलों के बाग़ों से चले तो जो सहरा कर देता है वो मैं हूँ ज़ख़्म पे दवाई लगाकर ज़ख़्म गहरा कर देता है वो मैं हूँ अच्छे लोग भागते हैं मुझ सेे और कभी शरीक नहीं होने देते बारात त्योहार या अच्छे ख़ासे जलसे का जो बुरा कर देता है वो मैं हूँ तुम मेरा नाम लेना और देखना क़िस्मत तुम्हारी भी फूट जाएगी नए जन्में बच्चे को गोद में ले के बूढ़ा या अधमरा कर देता है वो मैं हूँ मेरे घर वालों ने भी मुझे इस लिए ही कच्ची उम्र में फेंक दिया था नासूर बीमारी से जो घर बिकवाकर क़र्ज़ा कर देता है वो मैं हूँ शैतान भी आधी रात में मेरा नाम लेने से घबराता है अब तो जो अपनी इक आँख बंद कर दज्जाल सा चेहरा कर देता है वो मैं हूँ ख़ुदा ने इस लिए मुझे बद सेूरत बनाया कि कोई पसंद न करे वो मनहूस परछाई जो दिन में अँधेरा कर देता है वो मैं हूँ मैं वो इंसान हूँ जो सजदे नहीं करता बस नशे करता है जो हवस को मुहब्बत बना कर मिट्टी को ख़ुदा कर देता है वो मैं हूँ
100rav
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"तुम दिखोगी" सारी दुनिया को छोड़कर मेरी आँखों में देखोगी तो एक दुनिया दिखेगी जहाँ सिर्फ़ तुम दिखोगी वो पैसे वाला होगा मगर मेरी जेब में अगर देखोगी तो एक बटवा मिलेगा बटवे में भी तुम दिखोगी चुपके से मेरे ख़्वाब में आना वहाँ इक लड़की दिखेगी जिस की बाँहों में मेरा सर होगा ग़ौर से उस का चेहरा देखोगी तो चेहरे में तुम दिखोगी तुम दोनों की तस्वीर तो है किसी रोज़ मैं मर जाऊँ पोस्टमार्टम होने के बा'द निकलेगी दिल से तस्वीर ख़ून साफ़ कर के अगर देखोगी तो तुम दिखोगी
100rav
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“मोशमी” मैं कबूतर तो वो खिड़की है मोशमी चाहता हूँ मैं वो लड़की है मोशमी इस ज़माने से क्यूँ डरती है मोशमी अब ग़लत से निडर लड़ती है मोशमी हीरे जैसी वो अब चमकी है मोशमी ज़ुल्म अब तो नहीं सहती है मोशमी मैं क़दम जैसे तो धरती है मोशमी जैसे बारिश यहाँ पहली है मोशमी नूर तारों में भी भरती है मोशमी देखने में परी दिखती है मोशमी यार क्या अब कहूँ कैसी है मोशमी सोचा था जैसी बस वैसी है मोशमी साथ सौरभ के बस जँचती है मोशमी पर लगन में किसी बहकी है मोशमी इन दिनों जाल में उस की है मोशमी लौट आ दिल की गर सुनती है मोशमी मत समझ इश्क़ जिस्मानी है मोशमी प्यार से बढ़ के तू पत्नी है मोशमी देर की तू ने अब गर्दी है मोशमी देख आई मेरी अर्थी है मोशमी
100rav
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