nazmKuch Alfaaz

जिस तरह रात को टूटे तारे की नहीं गहरे समुंदर को आँसू खारे की नहीं घमंडी इमारत को अंदरूँ गारे की नहीं हाँ जैसे थोड़े को बाक़ी सारे की नहीं जिस तरह गए को वापस पुकारे की नहीं हाकिम-ए-शाही को कल के मारे की नहीं गुज़रे वक़्त को पल गुज़ारे की नहीं हाँ जैसे इश्क़ को इस में हारे की नहीं या'नी इस तरह जैसे तेरे दिल को उस के प्यारे की नहीं

Related Nazm

मैं सिगरेट तो नहीं पीता मगर हर आने वाले से पूछ लेता हूँ कि "माचिस है?" बहुत कुछ है जिसे मैं फूँक देना चाहता हूँ.

Gulzar

107 likes

तुम्हें इक बात कहनी थी इजाज़त हो तो कह दूँ मैं ये भीगा भीगा सा मौसम ये तितली फूल और शबनम चमकते चाँद की बातें ये बूँदें और बरसातें ये काली रात का आँचल हवा में नाचते बादल धड़कते मौसमों का दिल महकती ख़ुश्बूओं का दिल ये सब जितने नज़ारे हैं कहो किस के इशारे हैं सभी बातें सुनी तुम ने फिर आँखें फेर लीं तुम ने मैं तब जा कर कहीं समझा कि तुम ने कुछ नहीं समझा मैं क़िस्सा मुख़्तसर कर के ज़रा नीची नज़र कर के ये कहता हूँ अभी तुम से मोहब्बत हो गई तुम से

Zubair Ali Tabish

117 likes

बहुत ख़ूब-सूरत हो तुम, बहुत ख़ूब-सूरत हो तुम कभी मैं जो कह दूँ मोहब्बत है तुम से तो मुझ को ख़ुदारा ग़लत मत समझना कि मेरी ज़रूरत हो तुम बहुत ख़ूब-सूरत हो तुम हैं फूलों की डाली पे बाँहें तुम्हारी हैं ख़ामोश जादू निगाहें तुम्हारी जो काँटे हूँ सब अपने दामन में रख लूँ सजाऊँ मैं कलियों से राहें तुम्हारी नज़र से ज़माने की ख़ुद को बचाना किसी और से देखो दिल मत लगाना कि मेरी अमानत हो तुम बहुत ख़ूब-सूरत हो तुम... कभी जुगनुओं की क़तारों में ढूँडा चमकते हुए चाँद तारों में ढूँडा ख़िज़ाओं में ढूँडा बहारों में ढूँडा मचलते हुए आबसारों में ढूँडा हक़ीक़त में देखा, फ़साने में देखा न तुम सा हँसी, इस ज़माने देखा न दुनिया की रंगीन महफ़िल में पाया जो पाया तुम्हें अपना ही दिल में पाया एक ऐसी मसर्रत हो तुम बहुत ख़ूब-सूरत हो तुम है चेहरा तुम्हारा कि दिन है सुनहरा है चेहरा तुम्हारा कि दिन है सुनहरा और इस पर ये काली घटाओं का पहरा गुलाबों से नाज़ुक महकता बदन है ये लब हैं तुम्हारे कि खिलता चमन है बिखेरो जो ज़ुल्फ़ें तो शरमाए बादल फ़रिश्ते भी देखें तो हो जाएँ पागल वो पाकीज़ा मूरत हो तुम बहुत ख़ूब-सूरत हो तुम जो बन के कली मुस्कुराती है अक्सर शब हिज्र में जो रुलाती है अक्सर जो लम्हों ही लम्हों में दुनिया बदल दे जो शाइ'र को दे जाए पहलू ग़ज़ल के छुपाना जो चाहें छुपाई न जाए भुलाना जो चाहें भुलाई न जाए वो पहली मोहब्बत हो तुम बहुत ख़ूब-सूरत हो तुम बहुत ख़ूब-सूरत हो तुम बहुत ख़ूब-सूरत हो तुम बहुत ख़ूब-सूरत हो तुम

Tahir Faraz

54 likes

राजा बोला रात है रानी बोली रात है मंत्री बोला रात है संतरी बोला रात है ये सुब्ह सुब्ह की बात है

Gorakh Pandey

48 likes

"दोस्त के नाम ख़त" तुम ने हाल पूछा है हालत-ए-मोहब्बत में हाल का बताना क्या! दिल सिसक रहा हो तो ज़ख़्म का छुपाना क्या! तुम जो पूछ बैठे हो कुछ तो अब बताना है बात एक बहाना है तुम ने हाल पूछा है इक दिया जलाता हूँ ठीक है बताता हूँ रोज़ उस की यादों में दूर तक चले जाना जो भी था कहा उस ने अपने साथ दोहराना साँस जब रुके तो फिर अपनी मरती आँखों में उस की शक्ल ले आना और ज़िन्दगी पाना रोज़ ऐसे होता है कुछ पुराने मैसेज हैं जिन में उस की बातें हैं कुछ तबील सुब्हे हैं कुछ क़दीम रातें हैं मैं ने उस की बातों में ज़िन्दगी गुज़ारी है ज़िन्दगी मिटाने का हौसला नहीं मुझ में एक एक लफ़्ज़ उस का साँस में पिरोया है, रूह में समोया है उस के जितने मैसेज है रोज़ खोल लेता हूँ उस सेे कह नहीं पाता ख़ुद से बोल लेता हूँ उस के पेज पर जा कर रोज़ देखता हूँ मैं आज कितने लोगों ने उस की पैरवी की है और सोचता हूँ मैं ये नसीब वाले हैं उस को देख सकते हैं उस सेे बात करते हैं ये इजाज़तों वाले मुझ सेे कितने बेहतर हैं मैं तो दाग़ था कोई जो मिटा दिया उस ने गर मिटा दिया उस ने ठीक ही किया उस ने, तुम ने हाल पूछा था लो बता दिया मैं ने जो भी कुछ बताया है उस को मत बता देना पढ़ के रो पड़ो तो फिर इन तमाम लफ़्ज़ों को बस गले लगा लेना, वो मेरी मोहब्बत है और सदा रहेगी वो जब नहीं रहूँगा तो एक दिन कहेगी वो तुम अली फ़क़त तुम थे जिस ने मुझ को चाहा था जिस ने मेरे माथे को चूम कर बताया था तुम दुआ का चेहरा हो तुम हया का पहरा हो मैं तो तब नहीं हूँगा पर मेरी सभी नज़्में उस की बात सुन लेंगी तुम भी मुस्कुरा देना फिर बहुत मोहब्बत से उस को सब बता देना उस के नर्म हाथों में मेरा ख़त थमा देना लो ये ख़त तुम्हारा है और उस की जानिब से वो जो बस तुम्हारा था आज भी तुम्हारा है

Ali Zaryoun

70 likes

More from Geetanjali Geet

आज के दिन जो अपने डर का इज़हार किया तो कि मैं तो अपना लूँ उसे मौत ने इनकार किया तो वो कच्ची सी उम्र वो पक्का सा हादिसा इक काँच का महल आज संगसार किया तो इक रूप बाहर इक है पीछे और इक उन के बीच मैं ने ग़लत से प्यार किया तो दिल पर रख पत्थर या हो पत्थर दिल हू-ब-हू उन की तरह उन पय वार किया तो कि रुकती हैं साँसें लो रोक दी गईं फिर भी सोचा जाए तेरा इंतिज़ार किया तो

Geetanjali Geet

0 likes

किसी ने कहा कैसी पत्थर दिल है तू क्या ये कब हुआ नहीं तो इस दिल पर कुछ लगे चीख़ उठता है रोता है ख़ून बहाता है यक़ीनन पत्थर तो ऐसा नहीं करता या पत्थर की तबीअ'त में भी बदलाव आया है बदलाव उस मौसम की तरह बदलाव उस की बातों की तरह बदलाव उस मुक़फ़्फ़ल पड़े घर की तरह जो कभी झूमता था इक परिवार के होने से बदलाव जो इक रोते शख़्स को हँसा दे और हँसते को रुला दे बदलाव इस बदलाओ की तरह जो सब बदल दे ये कैसा बदलाव पत्थर पत्थर ही है या बदल गया मेरा दिल दिल ही है या बदल गया कोई तो है जो बदल गया मैं मैं ही हूँ या

Geetanjali Geet

0 likes

सच्चा झूठा झूठा सच्चा वा'दा इक नादान का है जलते जलते राख हुआ मेरा मकाँ इम्कान सा है पत्ते टहनी शजर जो टूटे मसअला ये तूफ़ान का है रेत रेत बन उड़ता जाए वो जो कहे चट्टान सा है नदी परिंदे अंबर बोले सुनना उस की ज़बान का है सुना मैं ने दो बार सुना तीसरा इक गुमान सा है खेल नफ़रत का ठीक नहीं वो तेरे ही ज़ियान का है धर्म मोहब्बत जो अपनाए वो इंसान इंसान सा है

Geetanjali Geet

0 likes

चले चले जाते हैं क़दम नज़रें मिलीं रुक जाते हैं क़दम मंज़िल ना दिखे मुड़ जाते हैं क़दम मंज़िल जो दिखे जुड़ जाते हैं क़दम सफ़र करते पैहम थक जाते हैं क़दम कुछ नोकीला चुभ जाए रो जाते हैं क़दम उस के पास आने से पीछे जाते हैं क़दम शर्म क्यूँ इतनी कर जाते हैं क़दम देख बैठ यहाँ से कहाँ जाते हैं क़दम वापस आते हैं या भटक जाते हैं क़दम ग़लत बहुत ग़ुस्से में उठ जाते हैं क़दम मिले जो सुर-ओ-ताल बहल जाते हैं क़दम वक़्त से तेज़ जाए जाते हैं क़दम वक़्त जो आए मर जाते हैं क़दम

Geetanjali Geet

0 likes

दर्द लिखा है अच्छा लिक्खा है दिल पर जो बीती वो कोई बात नहीं टूट कर लिखने लगी अच्छा लिखने लगी मोहब्बत है मुझ से वो कोई बात नहीं ख़ुश हूँ मैं ये क्या लिक्खा है लिखा है रो कर वो कोई बात नहीं आबाद हूँ मैं ये क्या लिक्खा है हाँ लिखा बर्बाद हो कर वो कोई बात नहीं चलते चलते थक गई अच्छा लिखा है पैहम मुझे पुकारती रही वो कोई बात नहीं हसरतें मरती चली गईं अच्छा लिखा है क़ातिल मैं हूँ ख़ैर वो कोई बात नहीं ख़ामोश सी हो गई हूँ ये क्या लिखा है क़ज़ा की अलामत है वो कोई बात नहीं जा रही हूँ ये क्या लिखा है अच्छा तो चली गई वो कोई बात नहीं

Geetanjali Geet

0 likes

Similar Writers

View All ›

Our suggestions based on Geetanjali Geet.

Similar Moods

View All ›

More moods that pair well with Geetanjali Geet's nazm.