अब कहाँ खो गए वो सिलसिले मुहब्बत के इक वो भी वक़्त था जब हर-सू तू ही शामिल था
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आँख में नम तक आ पहुँचा हूँ उस के ग़म तक आ पहुँचा हूँ पहली बार मुहब्बत की थी आख़िरी दम तक आ पहुँचा हूँ
Khalil Ur Rehman Qamar
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मैं चूमता हूँ तो वो हाथ खींच लेता है उसे पता है ये सीढ़ी कहाँ पे जानी है
Nadir Ariz
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मत पूछो कितना ग़मगीं हूँ गंगा जी और जमुना जी ज़्यादा तुम को याद नहीं हूँ गंगा जी और जमुना जी अमरोहे में बान नदी के पास जो लड़का रहता था अब वो कहाँ है मैं तो वहीं हूँ गंगा जी और जमुना जी
Jaun Elia
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अब उस सेे दोस्ती है जिस सेे कल मुहब्बत थी अब इस सेे ज़्यादा बुरा वक़्त कुछ नहीं है दोस्त
Vishal Singh Tabish
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ये मुहब्बत की किताबें कौन यूँँ कब तक पढ़े कौन मारे रोज़ ही इक बात पे अपना ही मन
nakul kumar
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ये रब्त कब मिटे है यूँँ मिटाने से ये आग है जो बढ़ती है बुझाने से
Rohan Hamirpuriya
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घर के हर कमरे में ऐ सी रखने वाला सब से ज़्यादा परेशाँ है धरती की ख़ातिर
Rohan Hamirpuriya
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याद नहीं आती है उस को मेरी अब मगर देखे हैं पत्थर के दिल मैं ने पिघलते हुए
Rohan Hamirpuriya
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ये हँसने गाने वाले लोग तस्वीरों में रह जाऍंगे
Rohan Hamirpuriya
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जुदाई नहीं देगी जीने मुझे वो देखे मिरा दम निकलते हुए
Rohan Hamirpuriya
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