अब न निकलूँगा तेरी बाँहों से, अपनी हद में रहा करूँँगा मैं मेरे सीने में है मेरा उस्ताद इसने जो भी कहा करूँँगा मैं
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चाँदी सोना एक तरफ़ तेरा होना एक तरफ़ एक तरफ़ तेरी आँखें जादू टोना एक तरफ़
Gyan Prakash Akul
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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हमारा दिल तो हमेशा से इक जगह पर है तुम्हारा दर्द ही रस्ता भटक गया होगा
Zubair Ali Tabish
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ऊँचे नीचे घर थे बस्ती में बहुत ज़लज़ले ने सब बराबर कर दिए
Zubair Ali Tabish
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अब तलक उस को ध्यान हो मेरा क्या पता ये गुमान हो मेरा
Zubair Ali Tabish
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मैं कहाँ जाऊँ करूँँ किस से शिकायत उस की हर तरफ़ उस के तरफ़-दार नज़र आते हैं।
Zubair Ali Tabish
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एक ही बार नज़र पड़ती है उन पर ‘ताबिश’ और फिर वो ही लगातार नज़र आते हैं
Zubair Ali Tabish
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