aise hans hans ke na dekha karo sab ki jaanib log aisi hi adaon pe fida hote hain
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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वो मुझ को छोड़ के जिस आदमी के पास गया बराबरी का भी होता तो सब्र आ जाता
Parveen Shakir
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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दिल से साबित करो कि ज़िंदा हो साँस लेना कोई सुबूत नहीं
Fahmi Badayuni
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इस बाग़ में वो संग के क़ाबिल कहा न जाए जब तक किसी समर को मेरा दिल कहा न जाए
Majrooh Sultanpuri
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बहाने और भी होते जो ज़िंदगी के लिए हम एक बार तेरी आरज़ू भी खो देते
Majrooh Sultanpuri
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सुनते हैं कि काँटे से गुल तक हैं राह में लाखों वीराने कहता है मगर ये अज़्म-ए-जुनूँ सहरा से गुलिस्ताँ दूर नहीं
Majrooh Sultanpuri
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सुतून-ए-दार पे रखते चलो सरों के चराग़ जहाँ तलक ये सितम की सियाह रात चले
Majrooh Sultanpuri
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'मजरूह' क़ाफ़िले की मिरे दास्ताँ ये है रहबर ने मिल के लूट लिया राहज़न के साथ
Majrooh Sultanpuri
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