बड़ा होकर जो छोटे लोगों की ताज़ीम करता है ज़माना ऐसे ही इंसान को तसलीम करता है चलो छोड़ो सियासत के पुराने ता'ने बाने को यही वो फ़लसफ़ा है जो हमें तक़्सीम करता है
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यक़ीन कर वो तिरे पास लौट आएगा जब उस का उठने लगेगा यक़ीन लोगों से
Varun Anand
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उस के हाथों में बस हम ही जँचते थे दावा सोने का कंगन भी करता था
Vishal Bagh
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किसी कॉलेज में टकराए तो कहना उसे यारो तेरे स्कूल का आशिक़ बहुत मिस करता है तुझ को
Rohit Gustakh
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ये नहीं है कि वो एहसान बहुत करता है अपने एहसान का एलान बहुत करता है आप इस बात को सच ही न समझ लीजिएगा वो मेरी जान मेरी जान बहुत करता है
Jawwad Sheikh
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लेता नहीं जो साँस भी इक बार चैन से करता रहा है गुफ़्तगू बीयर की कैन से
nakul kumar
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इक मसीहा जन्म लेने जा रहा है मरयमों के हाथ काटे जा रहे हैं
Abdulla Asif
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फिर चली आई है ये दुनिया सहारा देने इनसे इत्लाफ़ भी मेरा नहीं देखा जाता बीच मँझधार से क्यूँँ मुझ को बचा लाए हो उतना ही उठता मैं जितना कि डुबाया जाता
Abdulla Asif
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फिर भी हमारा दाग़-ए-गिरेबाँ न दिख सका हम आइने के सामने गर्दन-फ़राज़ थे
Abdulla Asif
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क़ीमत मुकर्रर है तिरी हम तो मुनासिब दाम हैं
Abdulla Asif
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तुम्हारे शहर में चलती है नफ़रतों की हवा हमारे गाँव का मौसम अभी सुहाना है
Abdulla Asif
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