फिर चली आई है ये दुनिया सहारा देने इनसे इत्लाफ़ भी मेरा नहीं देखा जाता बीच मँझधार से क्यूँँ मुझ को बचा लाए हो उतना ही उठता मैं जितना कि डुबाया जाता
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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हम ने उस को इतना देखा जितना देखा जा सकता था लेकिन फिर भी दो आँखों से कितना देखा जा सकता था
Farrukh Yar
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उन की सोहबत में गए सँभले दोबारा टूटे हम किसी शख़्स को दे दे के सहारा टूटे ये अजब रस्म है बिल्कुल न समझ आई हमें प्यार भी हम ही करें दिल भी हमारा टूटे
Vikram Gaur Vairagi
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हम को दिल से भी निकाला गया फिर शहर से भी हम को पत्थर से भी मारा गया फिर ज़हरस भी
Azm Shakri
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किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
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एक फ़न है बिखर जाना और मैं उस्ताद हूँ इस में
Abdulla Asif
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ज़हर ने उस को ज़िंदगी दे दी वरना सुकरात मर गया होता
Abdulla Asif
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उदासियों के समुंदर में डूब जाता मैं जो कहकहा न लगाता तो और क्या करता
Abdulla Asif
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ये बंदगी के नताइज नहीं जो ख़ुश हैं हम वो चाहता ही नहीं था कि मुश्किलें आएँ
Abdulla Asif
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अफ़लाक से आगे न निकल जाएँ तसव्वुर महदूद ज़मीं तक ही ख़यालों को रखें आप
Abdulla Asif
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