बोल हरि नाम लिख दूँ तेरे दिल पे मैं या कि घनश्याम लिख दूँ तेरे दिल पे मैं गर तेरा दिल भी पत्थर का है तो बता प्यार से राम लिख दूँ तेरे दिल पे मैं
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गले मिलना न मिलना तो तेरी मर्ज़ी है लेकिन तेरे चेहरे से लगता है तेरा दिल कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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मत पूछ कि क्या हाल है मेरा तेरे पीछे तू देख कि क्या रंग है तेरा, मेरे आगे
Mirza Ghalib
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कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
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अब मैं सारे जहाँ में हूँ बदनाम अब भी तुम मुझ को जानती हो क्या
Jaun Elia
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नाम पे हम क़ुर्बान थे उस के लेकिन फिर ये तौर हुआ उस को देख के रुक जाना भी सब से बड़ी क़ुर्बानी थी मुझ से बिछड़ कर भी वो लड़की कितनी ख़ुश ख़ुश रहती है उस लड़की ने मुझ से बिछड़ कर मर जाने की ठानी थी
Jaun Elia
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ज़िक्र करता था जो दिन भर उस का हिज्र में मर गया शायर उस का सुनता रहता हूँ पशेमाँ हो कर ज़िक्र जब करते हैं दीगर उस का
Daqiiq Jabaalii
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वो तो कली से बन गई है अब 'अमित' गुलाब अब तितलियाँ भी बैठती हैं उस के गाल में
Daqiiq Jabaalii
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ज़ीस्त की सम्त से ताज़ीर बराबर आई पर मुबीं होता नहीं ग़लती हमारी क्या है
Daqiiq Jabaalii
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तू गले भी तो लगाता है नहीं मुझ को मैं ये कैसे मान लूँ तू दोस्त है मेरा
Daqiiq Jabaalii
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सब सेे मिला ये हाथ मगर दिल नहीं मिला कोई भी ग़म सुनाने के क़ाबिल नहीं मिला
Daqiiq Jabaalii
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