चश्म भी नम मिलेंगे नए साल में कुछ नए ग़म मिलेंगे नए साल में आज तक यार तन्हा रहे जिस तरह उस तरह हम मिलेंगे नए साल में
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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ज़माने से ये कहने को कलेजा चाहिए जानाँ तुम्हारे बा'द भी तुम सेे मुहब्बत कर रहा हूँ मैं
Pushpendra Panchal
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ज़ाया' किया है वक़्त जो आवारगी में शायद ही लौटेगा कभी वो ज़िन्दगी में इतना गुज़ारा वक़्त मैं ने रौशनी बिन लगने लगा अच्छा मुझे अब तीरगी में
Pushpendra Panchal
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वक़्त रोने में फ़क़त बर्बाद मत कर वो न आएगा उसे अब याद मत कर अब ख़ुदा भी हो गया लगता है पत्थर अब ख़ुदा से तू कोई फ़रियाद मत कर
Pushpendra Panchal
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जात–मज़हब ये सियासी दायरे हैं हम नहीं आते तुम्हारे दायरे में
Pushpendra Panchal
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सियासत की बग़ावत के लिए हिम्मत कहाँ उन में बड़ी मुश्किल से मिलती है जिन्हें दो जून की रोटी
Pushpendra Panchal
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