dariya-e-husn aur bhi do hath badh gaya angdai us ne nashshe mein li jab utha ke hath
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी
Ankita Singh
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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किस की होली जश्न-ए-नौ-रोज़ी है आज सुर्ख़ मय से साक़िया दस्तार रंग
Imam Bakhsh Nasikh
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ग़ैर से खेली है होली यार ने डाले मुझ पर दीदा-ए-ख़ूँ-बार रंग
Imam Bakhsh Nasikh
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वो नहीं भूलता जहाँ जाऊँ हाए मैं क्या करूँँ कहाँ जाऊँ
Imam Bakhsh Nasikh
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अब की होली में रहा बे-कार रंग और ही लाया फ़िराक़-ए-यार रंग
Imam Bakhsh Nasikh
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तेरी सूरत से किसी की नहीं मिलती सूरत हम जहाँ में तिरी तस्वीर लिए फिरते हैं
Imam Bakhsh Nasikh
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