देर तक कोई भी एहल-ए-ज़ुल्म यूँँ टिकता नहीं चार सू फैली हुई है कर्बला की रौशनी
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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दूर अहबाब से रहता हूँ यूँँ ही तो अकबर न पता कौन सा इक ज़ख़्म नया मिल जाए
''Akbar Rizvi"
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बा'द में बिखरे अगर और भी होगा अफ़सोस मैं न बच्चों को नए ख़्वाब सजाने दूँगा
''Akbar Rizvi"
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या'नी सुकून-ए-क़ल्ब क़ज़ा चाहता हूँ मैं इस दर्द-ए-ला-दवा की दवा चाहता हूँ मैं
''Akbar Rizvi"
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नुसरत-ए-हक़ देखना आशूर तक ले जाएगी हसरत-ए-दीदार कोह-ए-तूर तक ले जाएगी
''Akbar Rizvi"
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किसी परिंद ने थोड़ी उड़ान की ख़ातिर ज़मीर बेच दिया और सुकून बेच दिया
''Akbar Rizvi"
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