धरती के दरिंदो की सभा चौंक गई थी इंसान को इंसान पुकारा किसी ने जब
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पड़ी रहने दो इंसानों की लाशें ज़मीं का बोझ हल्का क्यूँँ करें हम
Jaun Elia
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जैसा मूड हो वैसा मंज़र होता है मौसम तो इंसान के अंदर होता है
Aziz Ejaaz
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मैं ने पूछा था कि इज़हार नहीं हो सकता दिल पुकारा कि ख़बर-दार नहीं हो सकता
Abbas Tabish
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ये वही हूँ मैं वो ही हारा हुआ फिर वही दिन है वो गुज़ारा हुआ कैसे अपनी तरफ़ चला आया मैं किसी और का पुकारा हुआ
Swapnil Tiwari
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सुब्ह-ए-मग़रूर को वो शाम भी कर देता है शोहरतें छीन के गुमनाम भी कर देता है वक़्त से आँख मिलाने की हिमाकत न करो वक़्त इंसान को नीलाम भी कर देता है
Nadeem Farrukh
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वो अब मेरा नहीं ये मानना आसाँ यूँँ हो जाए बराबर एक्स के कुछ मान लेना जितना आसाँ था
SHIV SAFAR
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ये दुनिया जो अपनों को भी याद नहीं अब करती है मुझ को याद रखेगी इस उम्मीद पे ही दम तोड़ा हूँ
SHIV SAFAR
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उड़ानें ऊंँची भरते हैं वो जिन के पर नहीं होते जो अक्सर घर बनाते हैं उन्हीं के घर नहीं होते
SHIV SAFAR
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मैं तो उन को जाने कब का भूल गया वो जो जिन के गालों पर तिल काला था यारो लेकिन भूल न पाया आज तलक उस को जिस के सीने में दिल काला था
SHIV SAFAR
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रह जाएगा ये दीद-ए-असद ख़्वाब ही ‘सफ़र’ ‘ग़ालिब’ के दौर में जो न जन्में तो अब मरो
SHIV SAFAR
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