din ko daftar mein akela shab bhare ghar mein akela main ki aks-e-muntashir ek ek manzar mein akela
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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तू कोई ग़म है तो दिल में जगह बना अपनी तू इक सदा है तो एहसास की कमाँ से निकल
Rajinder Manchanda Bani
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ज़रा छुआ था कि बस पेड़ आ गिरा मुझ पर कहाँ ख़बर थी कि अंदर से खोखला है बहुत
Rajinder Manchanda Bani
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वो एक अक्स कि पल भर नज़र में ठहरा था तमाम उम्र का अब सिलसिला है मेरे लिए
Rajinder Manchanda Bani
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वो टूटते हुए रिश्तों का हुस्न-ए-आख़िर था कि चुप सी लग गई दोनों को बात करते हुए
Rajinder Manchanda Bani
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लो सारे शहर के पत्थर समेट लाए हैं हम कहाँ है हम को शब-ओ-रोज़ तौलने वाला
Rajinder Manchanda Bani
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