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दूजों का दुख समझने को बे हद ज़रूरी है थोड़ी सही प दिल में अज़ीयत बनी रहे

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और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा

Faiz Ahmad Faiz

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मज़ा तो तब है कि तुम हार के भी हँसते रहो हमेशा जीत ही जाना कमाल थोड़ी है

Parveen Shakir

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मैं ज़िन्दगी में आज पहली बार घर नहीं गया मगर तमाम रात दिल से माँ का डर नहीं गया बस एक दुख जो मेरे दिल से उम्र भर न जाएगा उस को किसी के साथ देख कर मैं मर नहीं गया

Tehzeeb Hafi

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कोई समुंदर, कोई नदी होती कोई दरिया होता हम जितने प्यासे थे हमारा एक गिलास से क्या होता ता'ने देने से और हम पे शक करने से बेहतर था गले लगा के तुम ने हिजरत का दुख बाट लिया होता

Tehzeeb Hafi

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ये तुम सब मिल के जो कुछ कह रहे हो मैं कह सकता हूँ पर कहना नहीं है हमारा शे'र भी सुनने न आएँ हमारा दुख जिन्हें सहना नहीं है

Ali Zaryoun

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