दूर अगर रहते हैं माँ से हम ख़र्चीले हो जाते हैं ऐसा खाना मिलता है सब कपड़े ढीले हो जाते हैं
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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जब राह झूठ की चुनी तो लिफ़्ट भी मिली और सच की राह में मिले पैरों के बस निशाँ
Tanoj Dadhich
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अब उस के हाथ पीले हो गए हैं नहीं पीछे पड़ेगी हाथ धो कर
Tanoj Dadhich
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पतंग ऐसे नहीं उड़ती इसे वैसे उड़ाओ तुम वही कहता है ये अक्सर जो बस चरखी पकड़ता है
Tanoj Dadhich
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दो दफ़ा ग़ुस्सा हुए वो एक ग़लती पर मेरी रात की रोटी सवेरे काम में लाई गई
Tanoj Dadhich
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एक ग़लत-फ़हमी ने ज़िंदा रक्खा है शे'र मेरे वो चुपके चुपके पढ़ती है
Tanoj Dadhich
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