एक काफ़िर से मोहब्बत जो की मैं ने मुफ़्ती-ए-दीं ने मुझे दीं से निकाला
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नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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ये मैं ने कब कहा कि मेरे हक़ में फ़ैसला करे अगर वो मुझ से ख़ुश नहीं है तो मुझे जुदा करे मैं उस के साथ जिस तरह गुज़ारता हूँ ज़िंदगी उसे तो चाहिए कि मेरा शुक्रिया अदा करे
Tehzeeb Hafi
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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आप के तोड़े हुए फूल या छोड़े हुए लोग एक ही क़िस्म की बर्बादी यहाँ पाएँगे पहले पहले तो लुभाएँगे तुम्हें ख़ुशबू से धीरे धीरे वो किताबों में बिखर जाएँगे
ALI ZUHRI
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जो मेरे नाम से मंसूब कर के तोड़े थे वो फूल अब भी रखे हैं तेरी किताब में क्या मुझे यूँँ वहशतों की मौत मारने वाले बचा हुआ है मेरा अक्स तेरे ख़्वाब में क्या
ALI ZUHRI
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तुम एक शख़्स पे जीवन बिताते हो हद है किसी के प्यार में ख़ुद को भुलाते हो हद है तुम्हारी राह से कंकर चुने थे मैंनें दोस्त मुझे ही राह का पत्थर बताते हो हद है
ALI ZUHRI
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नज़र घुमा के कभी देख ले घड़ी की तरफ़ बहुत समय से कोई तेरे इंतिज़ार में है
ALI ZUHRI
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या रब मुझ को अब हक़ रस्ता दिखला भी दे बे मक़्सद इंसाँ को इल्म-ए-रूहानी दे
ALI ZUHRI
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