ek ke ghar ki khidmat ki aur ek ke dil se mohabbat ki donon farz nibha kar us ne sari umr ibaadat ki
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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हम को दिल से भी निकाला गया फिर शहर से भी हम को पत्थर से भी मारा गया फिर ज़हरस भी
Azm Shakri
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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तुम से हासिल हुआ इक गहरे समुंदर का सुकूत और हर मौज से लड़ना भी तुम्हीं से सीखा
Zehra Nigaah
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कहाँ के इश्क़-ओ-मोहब्बत किधर के हिज्र-ओ- विसाल अभी तो लोग तरसते हैं ज़िन्दगी के लिए
Zehra Nigaah
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ख़ताएँ दोनों की यकसाँ थी पर त'अज्जुब है किसी को दाद मिली और किसी को रुसवाई
Zehra Nigaah
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छोटी सी बात पे ख़ुश होना मुझे आता था पर बड़ी बात पे चुप रहना तुम्हीं से सीखा
Zehra Nigaah
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हर फ़िक्र की अपनी मंज़िल थी हर सोच का अपना रस्ता था
Zehra Nigaah
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