ग़म-ए-हयात ने आवारा कर दिया वर्ना थी आरज़ू कि तिरे दर पे सुब्ह ओ शाम करें
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उस की जुल्फ़ें उदास हो जाए इस-क़दर रौशनी भी ठीक नहीं तुम ने नाराज़ होना छोड़ दिया इतनी नाराज़गी भी ठीक नहीं
Fahmi Badayuni
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चाँद चेहरा ज़ुल्फ़ दरिया बात ख़ुशबू दिल चमन इक तुम्हें दे कर ख़ुदा ने दे दिया क्या क्या मुझे
Bashir Badr
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ये कहते हो तिरे जाने से दिल को चैन आएगा तो जाता हूँ, ख़ुदा हाफ़िज़! मगर तुम झूठ कहते हो
Zubair Ali Tabish
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ये वो क़बीला है जो हुस्न को ख़ुदा माने यहाँ पे कौन तेरी बात का बुरा माने इशारा कर दिया है आप की तरफ़ मैं ने ये बच्चे पूछ रहे थे कि बे-वफ़ा माने
Kushal Dauneria
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तारीकियों को आग लगे और दिया जले ये रात बैन करती रहे और दिया जले उस की ज़बाँ में इतना असर है कि निस्फ़ शब वो रौशनी की बात करे और दिया जले
Tehzeeb Hafi
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इस बाग़ में वो संग के क़ाबिल कहा न जाए जब तक किसी समर को मेरा दिल कहा न जाए
Majrooh Sultanpuri
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अब कारगह-ए-दहर में लगता है बहुत दिल ऐ दोस्त कहीं ये भी तिरा ग़म तो नहीं है
Majrooh Sultanpuri
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तुझे न माने कोई तुझ को इस से क्या मजरूह चल अपनी राह भटकने दे नुक्ता-चीनों को
Majrooh Sultanpuri
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मुझे ये फ़िक्र सब की प्यास अपनी प्यास है साक़ी तुझे ये ज़िद कि ख़ाली है मिरा पैमाना बरसों से
Majrooh Sultanpuri
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सर पर हवा-ए-ज़ुल्म चले सौ जतन के साथ अपनी कुलाह कज है उसी बाँकपन के साथ
Majrooh Sultanpuri
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