ghar mein khud ko qaid to main ne aaj kiya hai tab bhi tanha tha jab mahfil mahfil tha main
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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सब आसान हुआ जाता है मुश्किल वक़्त तो अब आया है
Shariq Kaifi
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बहुत जनाज़े थे रास्ते में क़दम भी हम गिन न पाए अपने
Shariq Kaifi
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तेरी बातों में यूँँ भी आ गया मैं भटकने का बहुत दिल कर रहा था
Shariq Kaifi
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ज़माने पहले जिसे डूबना था डूब गया न जाने अब यहाँ किस को बचाने आता हूँ
Shariq Kaifi
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ले आता हूँ हर रिश्ते को झगड़े तक फिर झगड़े से काम चलाता रहता हूँ
Shariq Kaifi
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