हर पान जब घनश्याम सा लगने लगे पर्यावरण तब गोपिका लगने लगे
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मेरे होंटों पे अपनी प्यास रख दो और फिर सोचो कि इस के बा'द भी दुनिया में कुछ पाना ज़रूरी है
Waseem Barelvi
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क्या हुआ जो मुझे हम-उम्र मोहब्बत न मिली मेरी ख़्वाहिश भी यही थी कि बड़ी आग लगे
Muzdum Khan
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वक़्त ही कम था फ़ैसले के लिए वर्ना मैं आता मशवरे के लिए तुम को अच्छे लगे तो तुम रख लो फूल तोड़े थे बेचने के लिए
Zia Mazkoor
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हम ने अच्छी धाँक जमा रक्खी थी अपनी फिर उस ने छोड़ा और सब पानी कर डाला
Prashant Sharma Daraz
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हमें तो उस से मोहब्बत है और बेहद है अगर उसे नहीं लगता तो क्या हुआ न लगे
Jawwad Sheikh
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वो समुंदर है वो प्यासा ही रखेगा मैं सिमट जाऊँगा तुझ में ,हूँ मैं तालाब
"Dharam" Barot
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वो ख़ुद को शे'र माने बैठा देखो बताओ ज़िन्दगी सर्कस है उस को
"Dharam" Barot
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सबका लिखा सब अच्छा सब के वास्ते मुमकिन नहीं सब को मिलेंगे मन मुताबिक़ रास्ते मुमकिन नहीं
"Dharam" Barot
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थी कुछ से प्रीति था कुछ से हमारा बैर कभी अपना कभी अपना बना था ग़ैर कठिन हर रास्ता मंज़िल दिखाएगा मिलेगी क़ामयाबी तुम चलाओ पैर
"Dharam" Barot
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सबने उसे हर पल बताया था ख़राब ये इश्क़ में उस के सिवा लगता ख़राब बस इश्क़ में पागल हुई है वो मेरे कोई न कोई इश्क़ में होता ख़राब
"Dharam" Barot
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