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हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले बहुत निकले मिरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले

Mirza Ghalib35 Likes

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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है

Abrar Kashif

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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा

Allama Iqbal

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ये नहीं है कि वो एहसान बहुत करता है अपने एहसान का एलान बहुत करता है आप इस बात को सच ही न समझ लीजिएगा वो मेरी जान मेरी जान बहुत करता है

Jawwad Sheikh

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याद भी आता नहीं कुछ भूलता भी कुछ नहीं या बहुत मसरूफ़ हूँ मैं या बहुत फ़ुर्सत में हूँ

Bharat Bhushan Pant

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जहान भर में न हो मुयस्सर जो कोई शाना, हमें बताना नहीं मिले गर कोई ठिकाना तो लौट आना, हमें बताना कुछ ऐसी बातें जो अनकही हों, मगर वो अंदर से खा रही हों लगे किसी को बताना है पर नहीं बताना, हमें बताना

Vikram Gaur Vairagi

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