हमारी मौत पर बेशक ज़माना आएगा रोने मगर ज़िंदा हैं जब तक चैन से जीने नहीं देगा
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हम को हमारी नींद भी वापस नहीं मिली लोगों को उन के ख़्वाब जगा कर दिए गए
Imran Aami
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माँग सिन्दूर भरी हाथ हिनाई कर के रूप जोबन का ज़रा और निखर आएगा जिस के होने से मेरी रात है रौशन रौशन चाँद में आज वही अक्स नज़र आएगा
Azhar Iqbal
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उसी की तरह मुझे सारा ज़माना चाहे वो मिरा होने से ज़्यादा मुझे पाना चाहे
Kumar Vishwas
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मौत का भी इलाज हो शायद ज़िंदगी का कोई इलाज नहीं
Firaq Gorakhpuri
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वाक़िफ़ कहाँ ज़माना हमारी उड़ान से वो और थे जो हार गए आसमान से
Faheem Jogapuri
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सौ ज़ख़्म भर चुके हों मगर कह सकें ग़ज़ल इतनी कमी तो आज भी रहती है तेरे बिन
Astitwa Ankur
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ग़रीब लोग कहाँ ख़ुद को बचा पाएँगे वबास बच भी गए भूख से मर जाएँगे
Astitwa Ankur
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कम अगर हो भी गया कौन सी हद तक होगा दर्द है टूट के आधा तो नहीं हो सकता
Astitwa Ankur
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आख़िरी पन्ने पे बोलो क्या लिखूँ तुम यहाँ तक साथ तो आए नहीं
Astitwa Ankur
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आज के दिन कभी सीने से लगाते थे तुम्हें और अब तुम को बधाई भी नहीं दे सकते
Astitwa Ankur
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